न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए झारखंड के ये वाटर फॉल्स हैं बेहतरीन, खूबसूरती ऐसी कि आप दीवाना हो जाएं

इस फॉल में 320 फीट ऊंचाई से गिरता पानी मन मोह लेता है. प्राकृतिक सौंदर्य फॉल के चारों ओर मानों चार चांद लगा देते हैं. फॉल के ऊपर जीप लाइन है. यहां से पर्यटक फॉल को नजदीक से देख सकते हैं.
रांची : नया साल की खुशियां हौले-हौले परवान चढ़ रही हैं. लोग सेलिब्रेशन के मूड में आने लगे हैं. ऐसे में न्यू ईयर सेलिब्रेशन को यादगार बनाने के लिए आप कुछ खास कर सकते हैं. राजधानी रांची और आसपास मौजूद वाटर फॉल्स की खूबसूरती के बीच कुछ पल गुजार कर नये साल को यादगार बना सकते हैं. कई लोग परिवार व रिश्तेदारों के साथ पिकनिक पर जाने की तैयारी में जुट गये हैं. आज इन्हीं वाटर फॉल्स के बारे में पेश है. रांची की रिपोर्ट.
मशहूर जलप्रपात हुंडरू फॉल पर हर साल सैकड़ों सैलानी आते हैं. इस फॉल में 320 फीट ऊंचाई से गिरता पानी मन मोह लेता है. प्राकृतिक सौंदर्य फॉल के चारों ओर मानों चार चांद लगा देते हैं. फॉल के ऊपर जीप लाइन है. यहां से पर्यटक फॉल को नजदीक से देख सकते हैं.
रांची से सीता फॉल की दूरी 44 किमी है. यह जोन्हा फॉल से चार किमी दूरी पर है. फॉल की ऊंचाई 300 फीट है. पर्यटक 350 सीढ़ियां उतरकर मनमोहक फॉल के दृश्य का आनंद उठा सकते हैं. जंगलों और पहाड़ों से घिरा होने के कारण यह जल प्रपात बेहद खूबसूरत लगता है.
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अनगड़ा स्थित जोन्हा फॉल पर्यटकों की पसंदीदा जगह है. सैकड़ों लोग पिकनिक मनाने पहुंचते है. गौतम पहाड़ी पर स्थित जोन्हा फॉल रांची से 40 किमी दूर है. यह रांची-पुरुलिया मार्ग से जुड़ा है. फॉल की ऊंचाई 140 फीट है. 500 सीढ़ियां उतरकर मनमोहक दृश्य का आनंद उठा सकते हैं.
लातेहार जिले के गारू प्रखंड में मिरचइया फॉल एक ऐसा स्पॉट है, जो पर्यटकों को बेहद पसंद आ रहा है. यहां पूरे साल पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. दिसंबर के अंतिम सप्ताह से काफी भीड़भाड़ है. जंगलों और पहाड़ियों के बीच नदी का फॉल के रूप में गिरता पानी पर्यटकों को काफी रोमांचित करता है. हाल में ही वन विभाग ने यहां रैंप का निर्माण कराया है. बेतला -गारू मार्ग पर गारू के पास ऑन रोड होने के कारण आते-जाते पर्यटकों को इसका नजारा सुलभ ही हो जाता है.
रांची से पंचघाघ की दूसरी करीब 40 किमी है. साथ ही खूंटी जिले से यह पांच किमी दूर है. पंचघाघ स्वर्ण रेखा नदी पर स्थित है. यह पांच धाराओं से बना हुआ है. यहां सालों पर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. लेकिन नये साल के स्वागत पर सैलानियों की भीड़ भाड़ काफी बढ़ जाती है.
खूंटी से 18 किमी दूर सिलादोन पंचायत अंतर्गत रेमता में लटरजंग डैम (रेमता डैम) बरबस ही आकर्षित करता है. यह डैम रांची रिंग रोड से काफी नजदीक है. वहीं दशम फॉल और रीमिक्स फॉल जाने के रास्ते में पड़ने के कारण काफी लोग यहां पहुंचते भी हैं. यह चारों ओर से जंगल से घिरा हुआ है. यहां सुकून और शांति का पल बिताने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं. यहां बोटिंग की भी व्यवस्था है. डैम के समीप कई सौंदर्यीकरण कार्य किये गये हैं. हालांकि देखरेख के अभाव में सब कुछ जर्जर हो गया है.
खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा प्रखंड की डुमरगड़ी पंचायत में लतरातू डैम सह साईं रिसोर्ट पार्क पिकनिक मनानेवालों के लिए बेहद पसंदीदा जगह है. डैम में विदेशी पक्षियों का भी समय-समय पर आगमन होता है. ऊंचे-ऊंचे पहाड़ व जंगलों से घिरे लतरातू डैम का प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने सालों भर पर्यटक आते हैं.
राजधानी से करीब 50 किमी दूरी पर दशम फॉल है. यह रांची जमशेदपुर मार्ग पर स्थित है. यहां कांची नदी 144 फीट की ऊंचाई से गिरती है. कभी इसमें दस धाराएं थी. जिसके कारण इसे दशम कहा जाता है. झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर लातेहार जिले के महुआडाड़ स्थित लोध फॉल की खूबसूरती देखते ही बनती है. पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आनेवाला यह वाटर फॉल 143 मीटर ऊंचा है.
पतरातू डैम पर बने लेक रिजॉर्ट पर सैलानियों की भीड़ उमड़ने लगी है. पतरातू डैम पर आये प्रवासी पक्षी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. मनोरंजन के लिए आसपास के ग्रामीणों द्वारा डैम के दक्षिणी छोर कठुआ कोचा में बच्चों के मनोरंजन के लिए कई झूले लगवाये गये हैं. लेक रिजॉर्ट के सामने डिजनीलैंड मेला लगाया गया है. पतरातू लेक रिजॉर्ट से लगभग तीन किलोमीटर दूर पलानी झील भी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
पुटदाग फॉल यानी कि छोटा हुंडरू जंगलों के बीच स्थित है. इसे छोटा हुंडरू फॉल भी कहते हैं. यह जगह अनगड़ा में आता है. जोन्हा से आगे स्कूल मोड़ आता है. वहां से बायें 20 किमी के बाद सुरसु घाटी होते हुए कुतुरलोवा, पुटदाग के बाद महुआ बेड़ा में यह जगह मिलेगी.
बहेया वॉटर फॉल रांची के खूबसूरत जल प्रताप में से एक है. बहेया वॉटर फॉल अनगड़ा , टाटीसिलवे से 30 किमी दूर है. इसकी खोज हाल के दिनों में ही हुई है. इस जल प्रपात के नीचे नहाने का भी आनंद ले सकते हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित है.
बोड़ेया जाने के रास्ते में, पिठोरियावाले रास्ते में पड़नेवाले चौराहा के आगे सदमा गांव मिलेगा. इसके आगे आपको चंद्रा वैली और चंद्रा फॉल भी देखने को मिलेगा. इसे चंद्राणी भी कहते हैं. वैसे तो छोटा फॉल है, पर बेहतरीन पिकनिक स्पॉट है.
रांची के आसपास भी कुछ अद्भुत तसवीरें हैं, जो लोगों की निगाहों से अभी तक दूर हैं. इस नये साल में आप अपने परिजनों और मित्रों के साथ यहां बेहिचक जा सकते हैं. यह पूरी तरह सुरक्षित भी है. हमें इन जल प्रपातों का धन्यवाद करना चाहिए. इन जल प्रपातों में अलग ही आनंद है. पानी के साथ नैचुरल गीत आप यहां सुन सकते हैं.
नीतिश प्रियदर्शी,पर्यावरणविद
एक ट्रैकर और राइडर होने के नाते आये दिन नयी जगहों पर ट्रैकिंग करता रहता हूं. इस बीच हम रांची के आसपास नयी नयी खूबसूरत वादियों का भ्रमण करतें हैं. इसी कड़ी में हमने ओरमांझीवाले रास्ते में हल्दबदी गांव के करीब वॉटर फॉल की भ्रमण किया. यह अद्भुत है. नये फॉल का नाम आरएमआर फॉल रखा गया.
मनोज जायसवाल, ट्रैकर्स एवं राइडर्स
मैं एक लेखक हूं , साथ हीं साइक्लिस्ट ,ट्रैकर्स एवं योग एक्सपर्ट हूं. अपनी साइकिल से हीं फिटनेस के लिए रांची के आसपास की खूबसूरत वादियों की सैर करती हूं. कई साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में अवार्ड भी हासिल कर पायी. कोलकाता की रहने वाली हूं. जब रांची आयी तो यहां की खूबसूरती की कायल हो गयी.
वदंना खेमका, ट्रैकर्स
रांची से लगभग 35 किमी दूर पतरातू घाटी के खत्म होने के पहले आपको जंगलों के बीच पलानी फॉल्स देखने के लिए मिलेगा. यह प्राकृतिक सौंदर्य से भरा है. यहां आप अलग सा सुकून और शांति पायेंगे. जहां आपको केवल झरने की आवाज सुनाई देगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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