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National Dengue Day: झारखंड में डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण, 5 साल में हुई सिर्फ 2 लोगों की मौत

Updated at : 15 May 2023 8:37 PM (IST)
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National Dengue Day: झारखंड में डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण, 5 साल में हुई सिर्फ 2 लोगों की मौत

National Dengue Day|डेंगू एक वायरल बीमारी है. एडीस एजिप्टी मच्छर के काटने से लोगों को डेंगू होता है. डेंगू को डेंगी भी कहा जाता है. मच्छर के काटने के 5-6 दिन बाद लोगों में इस बीमारी के लक्षण दिखने शुरू होते हैं. यह दो रूपों में सामने आता है- डेंगू बुखार और डेंगू हेमोरेजिक फीवर (डीएचएफ).

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National Dengue Day: डेंगू की वजह से आज भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है. पिछले 7 साल में देश भर के आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि वर्ष 2018, वर्ष 2019 और वर्ष 2020 को छोड़कर हर वर्ष 300 से अधिक लोगों की डेंगू के डंक ने मार डाला. डेंगू के मामलों में भी लगातार वृद्धि हुई है. हालांकि, झारखंड में इसके मामलों में कमी आयी है. पिछले 5 साल की बात करें, तो सिर्फ 2 लोगों की मौत हुई है. डेंगू के मामलों में भी धीरे-धीरे कमी आयी है. पिछले 6 साल में झारखंड में 2,587 लोग संक्रमित हुए और कुल 7 लोगों की जान गयी.

2017 में सबसे ज्यादा 5 लोगों की झारखंड में डेंगू से हुई मौत

वर्ष 2017 से वर्ष 2022 के बीच कुल 6 वर्षों में 7 लोगों की मौत हुई है, जिसमें सबसे ज्यादा 5 लोगों की मौत वर्ष 2017 में हुई. वर्ष 2018 और वर्ष 2021 में 1-1 व्यक्ति की मौत डेंगू के डंक से झारखंड में हुई. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (एनसीवीबीडीसी) के रिकॉर्ड इस बात की तस्दीक करते हैं कि वर्ष 2019, वर्ष 2020 और वर्ष 2022 में डेंगू की वजह से झारखंड में किसी की मौत नहीं हुई.

झारखंड में वर्ष 2020 में सबसे कम लोगों को हुआ डेंगू

डेंगू के सबसे कम मरीज वर्ष 2020 में झारखंड में अस्पतालों में पहुंचे. वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा 825 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आयी थी. इसके पहले वर्ष 2017 में कुल 710, वर्ष 2018 में 463 लोग डेंगू की चपेट में आये. वर्ष 2017 में 710 पीड़ितों में से 5 लोगों की मौत हो गयी, जबकि वर्ष 2018 में 463 में 1 की मौत हुई. वर्ष 2020 में सिर्फ 79 लोगों को डेंगू हुआ. इस वर्ष किसी की मौत नहीं हुई. वर्ष 2021 में कुल 220 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई और इनमें से 1 व्यक्ति की मौत भी हो गयी. हालांकि, वर्ष 2022 में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर 290 हो गयी, लेकिन इस वर्ष किसी की मौत नहीं हुई.

बंगाल में 2022 में डेंगू से 30 लोगों की हुई मौत

पश्चिम बंगाल में डेंगू ने 30 लोगों की जान ले ली. केरल में 29, महाराष्ट्र में 27, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में 18-18, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 10-10, कर्नाटक और दिल्ली में 9-9, तमिलनाडु में 8, गुजरात में 7, मिजोरम में 5, मणिपुर में 4, पुडुचेरी और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 3-3, असम और मध्यप्रदेश में 2-2, गोवा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में 1-1 व्यक्ति की जान डेंगू की वजह से गयी. लक्षद्वीप, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना, उत्तराखंड में वर्ष 2022 में किसी मौत डेंगू से नहीं हुई.

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रिम्स में बनता है डेंगू का अलग वार्ड

बता दें कि झारखंड में जब भी डेंगू का मामला सामने आता है, सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में डेंगू का अलग वार्ड बनाकर लोगों का इलाज किया जाता है. राज्य के सदर अस्पतालों में भी डेंगू के इलाज की सुविधा उपलब्ध है. मच्छर के काटने से होने वाला डेंगू एक खतरनाक बुखार है. पीड़ित व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिलने पर प्लेटलेट तेजी से घटने लगता है, जिससे मरीज की मृत्यु हो जाती है.

डेंगू क्या है, किन लोगों को होता है|What is Dengue

डेंगू एक वायरल बीमारी है. एडीस एजिप्टी मच्छर के काटने से लोगों को डेंगू होता है. डेंगू को डेंगी भी कहा जाता है. मच्छर के काटने के 5-6 दिन बाद लोगों में इस बीमारी के लक्षण दिखने शुरू होते हैं. यह दो रूपों में सामने आता है : डेंगू बुखार और डेंगू हेमोरेजिक फीवर (डीएचएफ). डेंगू बुखार गंभीर फ्लू जैसी बीमारी है. अगर डेंगू ने डेंगू हेमोरेजिक फीवर का रूप ले लिया है, तो यह बेहद गंभीर है. इसकी वजह से मरीज की मौत हो जाती है. अगर यह मालूम हो जाये कि आपको डेंगू हो गया है, भले वो डेंगू बुखार हो या डीएचएफ, आपको निश्चित तौर पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

किसी भी उम्र में हो सकता है डेंगू|Age & Sex Group Affected

डेंगू किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है. पुरुष और महिला दोनों इसकी चपेट में आते हैं. हां, डेंगू की वजह से सबसे ज्यादा बच्चों की मौत होती है. इसलिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. बता दें कि वर्ष 2022 में भारत में कुल 303 लोगों की डेंगू से मौत हो गयी. इसमें सबसे ज्यादा 41 मौतें पंजाब में हुईं. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश रहा, जहां 33 लोगों की जानें गयीं. बिहार में 32 लोगों की मौत डेंगू की वजह से हुई.

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डेंगू और डीएचएफ का इलाज|Treatment of Dengue & DHF

अगर आप उस इलाके में रहते हैं, जहां डेंगू के मच्छर पनपते हैं, तो सावधानी सबसे ज्यादा जरूरी है. डेंगू या डीएचएफ के इलाज के लिए न तो कोई दवा उपलब्ध है, न ही उससे बचाव का टीका यानी वैक्सीन. इसलिए एडीज एजिप्टी मच्छर को पनपने से रोकना और डेंगू के लक्षण दिखते ही इलाज कराना ही इस बीमारी की वजह से होने वाली मृत्यु दर को कम करने का एकमात्र उपाय है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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