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माइनिंग लीज मामले में बसंत सोरेन ने चुनाव आयोग को भेजा जवाब, कहा- भाजपा का आरोप तथ्यहीन

माइनिंग लीज मामले में बसंत सोरेन ने चुनाव आयोग को 138 पन्नों का जवाब सौंपा, जिसमें उन्होंने कहा है कि ऑफिस ऑफ प्रोफिट का कोई मामला नहीं बनता है. भाजपा जिस लीज की बात कर रहे हैं उसका लीज साल 2018 में ही खत्म हो गया था.

By Prabhat Khabar Print Desk
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माइनिंग लीज मामला: बसंत सोरेन ने चुनाव आयोग को भेजा जवाब
माइनिंग लीज मामला: बसंत सोरेन ने चुनाव आयोग को भेजा जवाब
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रांची: माइंस प्रकरण में चुनाव आयोग (इसी) को विधायक बसंत सोरेन ने शुक्रवार को दिन के 3.02 बजे 138 पन्नों का जवाब सौंपा. अपने वकील के माध्यम से चुनाव आयोग के कार्यालय में जवाब को रिसीव कराया. वहीं शुक्रवार को दिन के 11.30 बजे इसी जवाब की एक प्रति प्रदेश भाजपा कार्यालय में भी विशेष दूत भेजकर जवाब रिसीव कराया गया है.

चुनाव आयोग ने पांच मई को नोटिस भेजकर 13 मई तक जवाब दाखिल करने का समय दिया था. जवाब में बसंत ने कहा है कि उनके ऊपर ऑफिस अॉफ प्रोफिट का कोई मामला नहीं बनता है. वह जिन कंपनियों में पार्टनर रहे हैं, उन्हें चुनावी शपथ पत्र में दाखिल किया है. इनकम टैक्स रिटर्न में भी इसका जिक्र है. चुनाव जीतने के बाद से अब उनके पार्टनर ही काम देखते हैं. माइनिंग लीज की जो बात कही जा रही है, वह पहले से है और उस पर 9(ए) का मामला नहीं बनता है. श्री सोरेन ने ग्रैंड माइनिंग कंपनी में पार्टनर होने की बात स्वीकारी है.

भाजपा का आरोप तथ्यहीन :

जवाब में कहा गया है कि भाजपा जिस चंद्रा स्टोन कंपनी की माइनिंग लीज की बात कर रही है, उसका लीज वर्ष 2018 में ही खत्म हो गया है. उसको आधार बनाकर शिकायत की गयी है.

जबकि यह लीज उनके चुनाव लड़ने के पूर्व ही समाप्त हो गया था. श्री सोरेन ने पंजाब के एक केस का हवाला देते हुए कहा है कि माइनिंग लीज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑफिस ऑफ प्रोफिट नहीं माना था और मामले को रद्द कर दिया था. इसलिए उन पर भी 9(ए) का मामला नहीं बनता है.

क्या है भाजपा का आरोप :

भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के माध्यम से विधायक बसंत सोरेन को अयोग्य घोषित करने की मांग चुनाव आयोग से की थी. राज्यपाल को सौंपे गये शिकायती पत्र में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल की कंपनी चंद्रा स्टोन के मालिक दिनेश कुमार सिंह के बसंत सोरेन बिजनेस पार्टनर हैं. वहीं दूसरी ओर बसंत सोरेन पार्टनरशिप में मेसर्स ग्रैंड माइनिंग नामक कंपनी भी चलाते हैं. विधायक रहते हुए काम करते हैं, इसलिए 9(ए) के तहत अॉफिस अॉफ प्रोफिट मामला बनता है और उनकी सदस्यता रद्द की जाये.

22 अप्रैल को भी मिला था नोटिस, 26 अप्रैल को जवाब दिया था :

बसंत सोरेन पर अॉफिस अॉफ प्रोफिट के मामले में चुनाव आयोग द्वारा 22 अप्रैल को भी नोटिस भेजी गयी थी. जिसका जवाब श्री सोरेन ने 26 अप्रैल को दे दिया था. इस जवाब में भी उन्होंने कहा था कि उनके ऊपर अॉफिस अॉफ प्रोफिट का कोई मामला नहीं बनता. चुनाव आयोग ने यह नोटिस आरटीआइ कार्यकर्ता सुनील महतो द्वारा की गयी शिकायत के आधार पर की थी. पांच मई को नोटिस भाजपा की शिकायत पर भेजी गयी थी.

Posted by: Sameer Oraon

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Published Date

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