Ranchi News : मार्गशीर्ष माह में है श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्व

Updated at : 06 Nov 2025 8:57 PM (IST)
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Ranchi News : मार्गशीर्ष माह में है श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्व

कार्तिक महीना बीत जाने के बाद अब मार्गशीर्ष, जिसे अगहन का महीना कहते हैं वह शुरू हो चुका है. हिंदू धर्म में अगहन के महीने को बहुत ही अच्छा माना जाता है.

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रांची. कार्तिक महीना बीत जाने के बाद अब मार्गशीर्ष, जिसे अगहन का महीना कहते हैं वह शुरू हो चुका है. हिंदू धर्म में अगहन के महीने को बहुत ही अच्छा माना जाता है. भगवान कृष्ण को मार्गशीर्ष का महीना बहुत ही प्रिय होता है. यह नौवां महीना है. भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं ही गीता में कहा है ”मासानां मार्गशीर्षोस्हम” यानी महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं. सतयुग में देवों ने मार्गशीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारंभ किया था. मार्गशीर्ष माह में स्नान करते समय ‘ओम नमो नारायण’ या गायत्री मंत्र का उच्चारण करना फलदायी होता है. वहीं, स्नान-दान, दीपदान और तुलसी पूजा का विशेष महत्व है. इस मास को जप, तप और ध्यान के लिए भी अच्छा माना गया है. इसके अलावा गंगा समेत अन्य सहायक नदियों में स्नान करने और विष्णुसहस्त्रनाम और भागवत गीता के पाठ करने का महत्व है. वहीं, जरूरतमंदों के बीच अन्न, ऊनी वस्त्र, कंबल, द्रव्य समेत अन्य कुछ दान करने का महत्व है. यह पक्ष 15 दिनों का है. इस पक्ष का समापन 20 नवंबर को होगा. इस दिन स्नान-दान की अमावस्या है. वहीं, 19 को श्राद्ध की अमावस्या है. 21 नवंबर से शुक्ल पक्ष शुरू हो जायेगा. इस पक्ष में पूर्णिमा तिथि की हानि होने के कारण यह पक्ष 14 दिनों का है. चार दिसंबर को इस पक्ष का समापन हो जायेगा. इस दिन स्नान-दान और व्रत की पूर्णिमा है.

मार्गशीर्ष महीने के मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय. ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्. ॐ नमः शिवाय. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः. ॐ पार्थाय प्रतिष्ठितं भगवता नारायणेन स्वयं.

ॐ नमो नारायण’ या गायत्री मंत्र

दीपदान से प्रसन्न होती हैं मां लक्ष्मी

मार्गशीर्ष के दौरान दीपदान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि सही स्थान पर दीप प्रज्वलित करने से घर के वास्तु दोष, नकारात्मकता और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. तुलसी को हरिप्रिया कहा जाता है. पूरे मार्गशीर्ष महीने में विशेषकर शाम के समय तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जरूर जलायें. इस उपाय को करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती है. मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाने से जीवन में शुभता आती है. इस दौरान पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जरूर जलाना चाहिए. पीपल में सभी देवी-देवताओं और पितरों का वास माना गया है. पितृ दोष शांत होता है और भाग्य मजबूत होता है. मंदिर में दीपदान करना मोक्षदायी माना जाता है. भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के मंदिर में दीपक जलाने से बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है.

इस माह घर में तुलसी उगने का महत्व

इस माह घर में बिना लगाये ही तुलसी का पौधा उग आये तो यह समझना चाहिए कि बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की कृपा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह संकेत होता है कि घर में जल्द ही सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होने वाला है. तुलसी के उगने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.

तुलसी पर मंजरी आने का अर्थ

जब तुलसी पर मौसम से पहले या अप्रत्याशित रूप से मंजरी (फूल) आने लगते हैं तो यह भी शुभ लक्षण माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि तुलसी की मंजरी धन वृद्धि, व्यापार में प्रगति और नौकरी में सफलता के संकेत देती है. यह समय घर-परिवार के लिए उन्नति का प्रतीक होता है.

इस महीने का पर्व-त्योहार

आठ नवंबर को संकष्ठी गणेश चतुर्थी, कालभैरव जयंती का पर्व 12 नवंबर, 15 को उत्पन्ना एकादशी व्रत सबका, 17 को सोमप्रदोष व्रत, 18 को मास शिवरात्रि व्रत, 24 को वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत, 25 को श्री रामविवाहोत्सव, 29 को महानंदा नवमी, एक दिसंबर को मोक्षदा एकादशी व्रत सबका और गीता जयंती, दो को भौम प्रदोष व्रत, चार को स्नान-दान और व्रत की पूर्णिमा है. इस दिन दत्तात्रेय जयंती मनायी जायेगी.

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