झारखंड में प्रेम विवाह में तलाक के मामले अधिक, जानें क्या है इसकी बड़ी वजह

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love marriage vs arranged marriage debate

सिविल कोर्ट में डालसा (जिला विधिक सेवा प्राधिकार) शादी के बाद पति-पत्नी के होनेवाले विवाद व तलाक के मामलों को सुलझाने का प्रयास करता है. मध्यस्थता केंद्र में ऐसे मामलों को सुलझाने की कोशिश की जाती है.

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रांची : शादी के बाद विवाद और तलाक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. जिला अदालतों में किये गये मुकदमे इस बात की गवाही देते हैं कि हर साल दहेज प्रताड़ना, पति-पत्नी का छोटा-मोटा विवाद, ससुराल में बहू के आचरण व अन्य कारणों को लेकर कोर्ट में मुकदमा किया जा रहा है. कोर्ट में दर्ज पिछले ढाई साल के आंकड़े बताते हैं कि प्रेम विवाह (Prem Vivah) में तलाक के सबसे अधिक मामले देखने को मिले हैं. छोटे-मोटे पारिवारिक विवाद का मामला तलाक तक पहुंच जाता है. कई बार तो ऐसा देखा गया है कि शादी के 30-35 साल बाद पत्नी अपने पति से तलाक चाहती है और इसके लिए उसने कोर्ट में केस दायर कर दिया है.

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लव मैरिज में तलाक के मामले अधिक

सिविल कोर्ट में डालसा (जिला विधिक सेवा प्राधिकार) शादी के बाद पति-पत्नी के होनेवाले विवाद व तलाक के मामलों को सुलझाने का प्रयास करता है. मध्यस्थता केंद्र में ऐसे मामलों को सुलझाने की कोशिश की जाती है. मध्यस्थ पीएन सिंह बताते हैं कि लव मैरिज (love marriage) में तलाक (divorce) के मामले अधिक आते हैं. इसका सबसे मुख्य कारण इगो प्रॉब्लम (अहंकार) है. अहंकार के कारण सबसे अधिक परिवार टूट रहे हैं. लड़की का सुंदर और लड़के का बदसूरत होना भी कई बार तलाक का कारण बनता है.

पसंद-नापसंद तलाक का सबसे बड़ा कारण

शादी के बाद एक-दूसरे की इज्जत नहीं करना, ज्ञान व व्यवहार का अभाव, पसंद-नापसंद तलाक का सबसे बड़ा कारण है. कई मामलों में सास का हस्तक्षेप भी तलाक का कारण बन जाता है. मध्यस्थ पीएन सिंह का कहना है कि तलाक व शादी के बाद पारिवारिक विवाद को रोकने के लिए एक सलाह केंद्र बनाया जाना चाहिए, जहां लड़का-लड़की के साथ ससुराल व मायकेवालों की भी काउंसलिंग की जानी चाहिए. इससे लड़का-लड़की शादी का महत्व समझ पायेंगे. मध्यस्थ कुंदन प्रकाश का कहना है कि शादी के बाद पारिवारिक विवाद के कई मामलों में गुजारा भत्ता लेने के लिए भी केस कर दिया जाता है. मध्यस्थता के समय लड़कियां मोल-भाव करती हैं.

साल-दर-साल बढ़ रही मुकदमों की संख्या

रांची सिविल कोर्ट में वर्ष 2022 में तलाक व पारिवारिक विवाद के 643, वर्ष 2023 में 773 तथा वर्ष 2024 में 309 (जून माह तक) मामलों में मुकदमा किया गया है. डालसा के मध्यस्थता केंद्र में ऐसे मामलों को सुलझाने की कोशिश की जाती है. वर्ष 2022 में 643 मामलों में 307, वर्ष 2023 में 773 में 374 तथा वर्ष 2024 में 390 में 294 मामले सुलझाये गये हैं.

शादी के 30 साल बाद पति को तलाक के लिए आया आवेदन

शादी के 30 साल बाद अपने 55 साल के पति से तलाक लेने के लिए 48 साल की महिला ने फैमिली कोर्ट में मुकदमा किया गया है. उन दोनों के बच्चे भी शादी के लायक हो गये हैं. इस मुकदमे को मध्यस्थता केंद्र में भेजा गया है. वर्तमान में इस मामले में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता चल रही है.

पति बच्चा चाहता ���ै, पत्नी नहीं, कर दिया तलाक का मुकदमा

एक इंजीनियर युवक की शादी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनेवाली युवती से हुई. पति और ससुरालवाले उससे बच्चा चाहते हैं, लेकिन पत्नी का कहना है कि उसे अभी कैरियर बनाना है, इसलिए वह बच्चा नहीं चाहती. इसी को लेकर पति-पत्नी में विवाद हुआ और मामला तलाक तक पहुंच गया. कोर्ट में तलाक के लिए मुकदमा किया गया है.

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