रांची.
श्री हेसल हनुमान मंदिर के सामने गली नंबर तीन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को आचार्य अतुल द्विवेदी ने कहा कि कथा ही वह ग्रंथ है, जिसे श्रद्धापूर्वक सुनने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. भागवत कथा सुनने, सुनाने और आत्मसात करने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है. भागवत कथा के श्रवण से ही गोकर्ण के भाई प्रेतात्मा धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिली थी. आचार्य अतुल द्विवेदी ने कहा कि पितृ व प्रेतों की मुक्ति का भागवत ही सशक्त माध्यम है. भगवान सूर्य नारायण ने भी कलयुग में इसे असीम कृपा प्राप्त करने वाला ग्रंथ बताया है. उन्होंने कहा कि यह अचेतन में चेतन जागृत करने वाला मार्ग है. हमें भागवत कथा सुनने के साथ उसके माध्यम से दी गयी शिक्षा को भी आत्मसात करना चाहिए. कलयुग में भगवान के नाम का जाप करने मात्र से ही कष्ट मिट जाते हैं. उन्होंने कहा कि बड़े भाग्य से हमें मानव तन मिलता है. इस मानव शरीर को मानव व अन्य सभी जीवों के कल्याण में समर्पित करना चाहिए. कथा के अंत में बांके बिहारी जी की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गयी. आयोजक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि कथा का समापन 21 मई को भंडारे के साथ होगा. कार्यक्रम प्रभारी अमृतेश पाठक व बिरेंद्र प्रसाद ने कहा कि प्रत्येक दिन दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक कथा वाचन होगा. मौके पर सुनील सिंह, बंटी यादव, मोहित जायसवाल, राजा, मनमोहन पांडेय, नीतू सिंह, सत्यप्रकाश मिश्रा सहित काफी संख्या में भक्त उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

