गुमला में कृषि वैज्ञानिक की हत्या करनेवाले तीन को उम्रकैद की सजा

Updated at : 02 Jul 2024 1:00 AM (IST)
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गुमला में कृषि वैज्ञानिक की हत्या करनेवाले तीन को उम्रकैद की सजा

कृषि वैज्ञानिक लोकेश पुत्तास्वामी (कर्नाटक के मैसूर निवासी) और मत्स्य विशेषज्ञ मददिला देवदासु (आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम निवासी) हत्याकांड में एडीजे-4 संजीव भाटिया की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया. अदालत ने इस हत्याकांड के तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी.

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प्रतिनिधि (गुमला).

कृषि वैज्ञानिक लोकेश पुत्तास्वामी (कर्नाटक के मैसूर निवासी) और मत्स्य विशेषज्ञ मददिला देवदासु (आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम निवासी) हत्याकांड में एडीजे-4 संजीव भाटिया की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया. अदालत ने इस हत्याकांड के तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. अदालत ने अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाते हुए लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया है. हत्याकांड के अभियुक्तों में घाघरा जगबगीचा निवासी आनंद उरांव उर्फ आनंद तिग्गा, तेंदार नवाटोली निवासी अर्पण उरांव उर्फ तेतरू उरांव और बसंत उरांव शामिल हैं. इस मामले में अपर लोक अभियोजक मो जावेद हुसैन ने पैरवी की. गौरतलब है कि कृषि वैज्ञानिक लोकेश पुत्तास्वामी घाघरा प्रखंड मुख्यालय स्थित महदनिया केला बगान में किसानों को केला, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, मशरूम आदि की खेती का प्रशिक्षण देते थे. वहीं, मत्स्य विशेषज्ञ मददिला देवदासु उनके सहयोगी के रूप में कार्यरत थे. 23 अगस्त 2021 की रात तीनों अभियुक्त कृषि वैज्ञानिक और उनके सहयोगी से रंगदारी मांगने पहुंचे थे. लोकेश ने बाद में पैसा देने की बात कही, तो अभियुक्त उनकी पॉकेट से पैसा लूटने की कोशिश करने लगे. लोकेश ने विरोध किया, तो अभियुक्तों ने चाकू से गला रेत कर उनकी हत्या कर दी. बाद में धारदार हथियार से मददिला की भी हत्या कर दी गयी. हत्या के बाद अभियुक्त लोकेश की बाइक लेकर भाग गये. बाद में भंडरा के समीप उस बाइक को जला दिया. इस दोहरे हत्याकांड से इलाके में सनसनी फैल गयी थी. वहीं, पुलिस पर भी दबाव बढ़ गया था. घटना के करीब एक सप्ताह बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए हत्याकांड का खुलासा किया था.

तीनों अभियुक्तों को इन धाराओं में सुनायी गयी सजा

आइपीसी की धारा-302, 34 के तहत उम्रकैद और पांच–पांच लाख रुपये जुर्माना. जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन साल की अतिरिक्त सजा.

आइपीसी की धारा-394, 34 के तहत उम्रकैद और एक-एक लाख रुपये जुर्माना. जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन साल की अतिरिक्त सजा.

आइपीसी की धारा-460, 34 के तहत उम्रकैद और एक-एक लाख जुर्माना. जुर्माना न देने पर तीन-तीन साल की अतिरिक्त सजा.

आइपीसी की धारा-435 के तहत सात साल कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना.

आइपीसी की धारा-411 के तहत तीन साल कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना.

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