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Karma Puja: जावा जगाने की खास परंपरा, 7 दिनों तक कई चीजों का परहेज करती हैं युवतियां

Updated at : 30 Aug 2025 11:25 AM (IST)
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Karma Puja

जावा के साथ बच्चियां (फाइल फोटो)

Karma Puja: आगामी कुछ ही दिनों में झारखंड में करम पर्व की धूम देखने को मिलेगी. करमा पूजा से 7 दिन पहले ही जावा उठ चुका है. मालूम हो जावा उठाने के बाद लगातार 7 दिनों तक जावा जगाने की खास परंपरा होती है. इस लेख में जानिए करम पर्व से जुड़ी पारंपरिक रीति-रिवाज और मान्यताएं.

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Karma Puja: झारखंड के प्रमुख त्योहारों में से एक करमा पूजा का जावा उठ चुका है. 3 सितंबर को करमा पूजा मनाया जायेगा. उल्लेखनीय है कि करमा पूजा से 7 दिन पहले ही जावा उठाया जाता है. जावा उठाने के बाद लगातार 7 दिनों तक जावा जगाने की खास परंपरा होती है. इन 7 दिनों के दौरान करमयतीन (करमा पूजा करने वाली युवतियां) को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कई तरह की चीजों का परहेज भी करना होता है.

नदियों से बालू लाती है करमयतीन

करमा पूजा से 7 दिन पूर्व करमयतीन (करमा पूजा करने वाली युवतियां) पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार जावा उठाती है. जावा उठाने के लिए युवतियां सबसे पहले नदी में स्नान करने के बाद नदी से बांस की डलिया या टोकरी में बालू उठाती है. इसके बाद पारंपरिक विधि-विधान के साथ बालू में 5 या 7 प्रकार के अन्न के बीजों जैसे- गेहूं, मकई ,जौ ,चना, धान इत्यादि को डालती है. इस प्रक्रिया को ही जावा उठाना कहते हैं.

जावा जगाने की खास परंपरा

जावा उठाने के बाद 7 दिनों तक इस डलिया को करमयतीन अपने घर में साफ-सुथरे स्थान पर रखती है. लगातार 7 दिनों तक इस डलिया की पूजा की जाती है. समय-समय पर डलिया में पानी डाला जाता है और कुछ समय के लिए धूप में भी रखा जाता है. इसके अलावा रोजाना शाम को एक बार जावा वाले डलिया को अखड़ा या आंगन में निकाला जाता है. इसके बाद करमयतीन उसके चारों ओर पारंपरिक गीत गाते हुए गोल-गोल घूमती है और नृत्य करती है. इस दौरान जावा वाले डलिया की धूप-अगरबत्ती दिखाकर पूजा की जाती है. इस प्रक्रिया को जावा जगाना कहते हैं.

कई चीजों का परहेज करती हैं करमयतीन

करमा पूजा के लिए जावा उठाने के साथ ही करमयतीन को कई चीजों का परहेज करना होता है. जावा उठाने के दिन से ही करमयतीन बहुत ही पवित्रता और संयम के साथ करम देव की आरधना करती हैं. जावा उठाने वाले दिन से लेकर युवतियां शुद्ध शाकाहारी और पवित्रता के साथ भोजन ग्रहण करती हैं. मान्यताओं के अनुसार इस दौरान करमयतीन चना, जौ, मकई, समेत उन सभी अनाज का सेवन नहीं कर सकती है, जो जावा में बोए गये हैं, नहीं तो जावा खराब हो जाता है. इसके अलावा करमयतीन अपने बालों में खुजली भी नहीं करती.

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Dipali Kumari

लेखक के बारे में

By Dipali Kumari

नमस्कार! मैं दीपाली कुमारी, एक समर्पित पत्रकार हूं और पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं, जहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पूर्व दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी कार्य करने का अनुभव है.

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