सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएस रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए किसने किया मजबूर?

जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के साथ झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन.
Justice B Sudarshan Reddy News : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी ने बताया है कि उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मजबूर किया गया. आखिर किसने किया मजबूर. झारखंड की राजधानी रांची के दौरे पर शनिवार को आये जस्टिस बालकृष्ण सुदर्शन रेड्डी ने गुरुजी को श्रद्धांजलि देने के अलावा और किन-किन विषयों पर बात की, यहां पढ़ें.
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Justice B Sudarshan Reddy News: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने जा रहे हैं. उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. अलग-अलग राज्यों में जाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं. सभी राज्यों और सभी पार्टियों के लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से वोट देने की अपील कर रहे हैं. इसी सिलसिले में जस्टिस बीएस रेड्डी शनिवार (30 अगस्त) को झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे थे. यहां उन्होंने पत्रकारों को भी संबोधित किया. जस्टिस रेड्डी ने पत्रकारों को बताया कि आखिर उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए उन्हें किसने मजबूर किया.
दिशोम गुरु के आंदोलन और हेमंत सोरेन के जेल जाने की वजह पर भी की बात
जस्टिस बीएस रेड्डी ने पत्रकारों के सवाल लेने से पहले अपने बारे में, दिशोम गुरु शिबू सोरेन के बारे में, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरप्तारी के बारे में बात की. उन्होंने देश के संविधान की बात की. संविधान में केंद्र और राज्य सरकारों को मिले अधिकार की बात की. साथ ही यह भी बताया कि उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए किसने मजबूर किया.
Justice B Sudarshan Reddy News: 2007 से 2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे बीएस रेड्डी
वर्ष 2007 से वर्ष 2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे बुचीरेड्डी सुदर्शन रेड्डी को कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन इंडिया (इंडयन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) ने उन्हें अपना साझा उम्मीदवार बनाया है. इस गठबंधन के सभी दलों का समर्थन उन्हें प्राप्त है. जस्टिस बीएस रेड्डी कहते हैं कि वह सभी दलों के लोगों से अपील करेंगे कि वे उनके (जस्टिस रेड्डी के) पक्ष में मतदान करें. इसलिए वह झारखंड आये हैं.
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संविधान ने सबकी सीमा तय की है – जस्टिस रेड्डी
जस्टिस रेड्डी ने कहा कि भारत के जो आज हालात हैं सभी देख रहे हैं. अगर आपका पास बहुत है, तो आप कुछ भी करेंगे, ऐसा नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि संविधान ने सीमाएं भी बतायीं हैं. राज्यों की अलग सीमा है. केंद्र सरकार के काम करने की अपनी सीमा है. इसलिए कोई मनमानी नहीं कर सकता.
जस्टिस रेड्डी की अंतरात्मा ने किया चुनाव लड़ने को मजबूर
जस्टिस रेड्डी ने बताया कि संविधान के साथ उनकी यात्रा 1971 में शुरू हुई थी. यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए मजबूर हुए. किसी पार्टी ने उन्हें मजबूर नहीं किया. विपक्षी दलों ने जब उनके उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा, तो उनकी अंतरात्मा ने यह चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया. इसलिए वह चुनाव लड़ रहे हैं. सांसदों से वोट मांग रहे हैं.
झारखंड के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्ण से है रेड्डी का मुकाबला
सत्ताधारी गठबंधन एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) ने झारखंड के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है. उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा. इस दिन दक्षिण भारत के दिग्गज राजनेता सीपी राधाकृष्णन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बुचीरेड्डी सुदर्शन रेड्डी के बीच मुकाबला होने की उम्मीद है. उसी दिन शाम में फैसला आ जायेगा कि जगदीप धनखड़ की जगह उपराष्ट्रपति के पद पर कौन बैठेगा. सीपी राधाकृष्णन या जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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