विधानसभा के सामने 11 अगस्त को वित्तरहित शिक्षकों का महाधरना, संस्कृत स्कूल और मदरसा कर्मी भी होंगे शामिल

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झारखंड विधानसभा की फाइल फोटो.

झारखंड में वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 11 अगस्त को विधानसभा के समक्ष महाधरना देंगे. अनुदान बढ़ोतरी और जैक में खाली पदों को भरने की प्रमुख मांगें हैं.

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Jharkhand Non-Government Teachers Protest: झारखंड में संचालित वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड विधानसभा के समक्ष महाधरना देंगे. वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में होने वाले इस आंदोलन में राज्यभर के इंटर कॉलेज, हाइस्कूल, संस्कृत स्कूल और मदरसा के शिक्षाकर्मी शामिल होंगे. मोर्चा ने बताया कि महाधरना में राज्य के सभी जिलों से शिक्षक और कर्मचारी पहुंचेंगे. आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जायेगा.

75% अनुदान बढ़ोतरी कैबिनेट में भेजने की मांग

मोर्चा की प्रमुख मांगों में वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को मिलने वाले अनुदान में 75 प्रतिशत बढ़ोतरी के संलेख को जल्द से जल्द कैबिनेट की बैठक में रखने की मांग शामिल है. मोर्चा का कहना है कि विधि विभाग और वित्त विभाग से अनुमोदन मिलने के बावजूद पिछले छह माह से अधिक समय से अनुदान वृद्धि का मामला कैबिनेट में भेजे जाने की प्रक्रिया अटकी हुई है. मोर्चा के अनुसार, बजट सत्र के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया था कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में 75 प्रतिशत बढ़ोतरी की राशि संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध करा दी जायेगी. इसके बावजूद अब तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. शिक्षाकर्मियों का कहना है कि सरकार के आश्वासन के बाद भी मामला लंबित रहना उनकी परेशानी बढ़ा रहा है.

600 अनुदानित संस्थानों की जांच में भी देरी

अनुदान वृद्धि की प्रक्रिया के लिए विभाग ने 9 फरवरी 2026 और 16 जून 2026 को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) को पत्र भेजकर राज्य के 600 अनुदानित संस्थानों की जांच कर रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. मोर्चा का आरोप है कि अब तक केवल 10-12 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने जांच पूरी कर रिपोर्ट भेजी है. मोर्चा ने कहा कि जैक स्तर पर जांच प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है. ऐसे में अनुदान वृद्धि से जुड़े मामले को आगे बढ़ाने में लगातार विलंब हो रहा है. शिक्षाकर्मियों ने जांच प्रक्रिया में तेजी लाने और निर्धारित प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है.

जैक में 18 महीने से उपाध्यक्ष का पद खाली

वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने जैक में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है. मोर्चा के अनुसार, जैक में पिछले 18 महीने से उपाध्यक्ष का पद रिक्त है. इसके अलावा 15 मई 2026 से 13 सदस्यों के पद भी खाली हो गये हैं. मोर्चा का कहना है कि जैक में महत्वपूर्ण पदों के रिक्त रहने से नीतिगत निर्णय प्रभावित हो रहे हैं. मान्यता समिति, पाठ्यक्रम समिति, वित्त समिति और प्रस्वीकृति समिति की बैठकें भी नहीं हो पा रही हैं. इससे शिक्षण संस्थानों से जुड़े कई मामलों के निस्तारण में परेशानी हो रही है.

अधिकारियों को जैक से हटाने और नियुक्ति की मांग

मोर्चा ने संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी जैक में कार्यरत वित्त पदाधिकारी, एकेडमिक ऑफिसर और विशेष कार्य पदाधिकारी को हटाने की मांग की है. इसके अलावा जैक में उपाध्यक्ष सहित 13 अन्य सदस्यों की नियुक्ति जल्द करने की मांग की गयी है. मोर्चा ने कार्मिक विभाग की ओर से जारी पत्र पर भी अविलंब कार्रवाई करने की मांग की है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जैक में रिक्त पदों को भरने और प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने से ही संस्थानों से जुड़े लंबित मामलों का समय पर समाधान संभव होगा.

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अध्यक्षमंडल की बैठक में तैयारियों की समीक्षा

महाधरना की तैयारियों को लेकर सोमवार को वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्षमंडल की बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता चंदेश्वर पाठक ने की. बैठक में आंदोलन की तैयारियों और विभिन्न जिलों से शिक्षकों-कर्मचारियों की भागीदारी की समीक्षा की गयी. बैठक में रघुनाथ सिंह, संजय कुमार, फजलुल कदीर अहमद, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, अरविंद सिंह, गणेश महतो, मनोज तिर्की, मनीष कुमार, देवनाथ सिंह, विनय उरांव, अली अल अराफात, मुरारी सिंह, अनिल तिवारी, अर्जुन पांडेय, बिरसो उरांव और रेशमा बेक समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे. मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि 11 अगस्त को विधानसभा के समक्ष होने वाला महाधरना अनुदान वृद्धि से लेकर जैक में रिक्त पदों पर नियुक्ति और प्रशासनिक सुधार तक कई मुद्दों को लेकर होगा. आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया जायेगा.

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राणा प्रताप सिंह

लेखक के बारे में

By राणा प्रताप सिंह

राणा प्रताप सिंह पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता जगत से जुड़े हैं. प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल में भी दस वर्ष का अनुभव है. जन सरोकार से जुड़ी खबरों में विशेष रूचि है.

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