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झारखंड में एक दिन की बारिश ने जलाशयों पर बढ़ाया दबाव, इन 3 डैम के फाटक खोले गए, देखें VIDEO

Updated at : 03 Aug 2024 6:23 PM (IST)
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tenughat dam gates opened

तेनुघाट डैम के 10 में से 8 फाटक खोले गए. फोटो : प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड में हुई भारी बारिश से अधिकतर जलाशय लबालब हो गए हैं. रांची के गोंदा, गेतलसूद और बोकारो के तेनुघाट डैम के फाटक खोल दिए गए हैं.

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Jharkhand News: झारखंड में एक दिन की भारी बारिश ने जलाशयों पर दबाव बढ़ा दिया है. राज्य के डैम का जलस्तर बढ़ने की वजह से कम से कम 3 डैम के फाटक खोल दिए गए हैं. जिन जलाशयों का जलस्तर खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है या उसके करीब पहुंच गया है, उन डैमों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है.

तेनुघाट डैम के फाटक खोले जाने के बाद का नजारा देखने पहुंचे स्थानीय लोग. फोटो : प्रभात खबर

सुबह खोले गये गोंदा और तेनुघाट डैम के फाटक

शनिवार को सुबह रांची स्थित गोंदा डैम के फाटक खोले गए. बोकारो जिला में स्थित तेनुघाट डैम के भी फाटक को भी खोल दिया गया. तेनुघाट के 10 में से 8 गेट को 4-4 मीटर पर खोला गया. तेनुघाट का जलस्तर 861.50 फीट हो गया था. बांध पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए डैम के फाटक को खोला गया.

रांची के गोंदा डैम के फाटक खोले गए.

रांची के गेतलसूद डैम के स्लुइस गेट को खोला गया

रांची के एक और डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ने की वजह से उसके स्लुइस गेट को खोल दिया गया. अनगड़ा प्रखंड में स्थित गेतलसूद डैम में पानी का लेवल 1933 आरएल फीट के पार हो गया था. इसकी सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग के अधिकारी गेतलसूद डैम पहुंचे. विभाग के पदाधिकारियों और इंजीनियरों ने स्थिति का आकलन किया और उसके बाद रेडियल गेट की जगह स्लुइस गेट को खोलने का फैसला किया. कहा गया कि स्लुइस गेट खोले जाने से डैम में जमा गाद बाहर निकल जाएगा.

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स्लुइस गेट खोलकर बहाया जा रहा अतिरिक्त पानी

इसके पहले अधिकारियों ने कहा था कि पानी की आवक इसी तरह बनी रही, तो गेतलसूद डैम के रेडियल गेट खोले जा सकते हैं. अधिकारियों ने कहा कि डैम का गेट खोलकर अतिरिक्त पानी को बहाया जाएगा, ताकि बांध को किसी तरह का खतरा न हो. लेकिन, बाद में स्लुइस गेट खोलने का फैसला किया. दरअसल, सिकिदिरी हाइडल में मेंटेनेस कार्य की वजह से वहां पानी नहीं भेजा जा रहा है. इसलिए डैम में पानी का लेवल बढ़ गया है.

गेतलसूद डैम के स्लुइस गेट को खोला गया. फोटो : प्रभात खबर

गेतलसूद डैम का खतरे का लेवल है 1936 आरएल फीट

गेतलसूद डैम में खतरे का स्तर 1936 आरएल फीट है. पानी के इस स्तर तक पहुंचने से पहले ही रेडियल गेट को खोलकर पानी को स्वर्णरेखा नदी में छोड़ा जाएगा. यह पानी हुंडरू फॉल के रास्ते मूरी और फिर चांडिल डैम में चला जाएगा. स्वर्णरेखा नदी के तटवर्ती और निचले इलाके में रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है.

अनगड़ा प्रखंड के गेतलसूद डैम का स्लुइस गेट खोला गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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