झारखंड को बचाना है, तो आदिवासियों-मूलवासियों को बचाना होगा : डॉ उरांव

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 Jan 2024 5:06 AM

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Babulal Marandi

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में अच्छा हो, इसके लिए बेचैनी का होना जरूरी है. संतुष्ट होने से आगे काम करने की प्रेरणा समाप्त हो जाती है. अविभाजित बिहार की तुलना करने पर राज्य बेहतर स्थिति में है.

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रांची : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक श्याम किशोर चौबे की पुस्तक ‘झारखंड एक बेचैन राज्य का सुख’ का लोकार्पण वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने प्रेस क्लब में किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी थे. मौके पर डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि वह इस बात के गवाह हैं कि झारखंड कैसे बना. झारखंड अलग राज्य का उद्देश्य बिहार के शोषण से मुक्ति थी. प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के समय से यहां विकास शुरू हुआ. शासन, प्रशासन और सरकार में बेईमानी नहीं के बराबर थी. वर्तमान समय में हम काफी आगे बढ़े हैं, लेकिन उतना नहीं, जितना होना चाहिए था. अगर इस राज्य को बचाना है, तो यहां के आदिवासियों और मूलवासियों को बचाना होगा.

सिर्फ कृषि के आधार पर रोजगार नहीं दे सकते: इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में अच्छा हो, इसके लिए बेचैनी का होना जरूरी है. संतुष्ट होने से आगे काम करने की प्रेरणा समाप्त हो जाती है. अविभाजित बिहार की तुलना करने पर राज्य बेहतर स्थिति में है. विकास के लिए सड़क, बिजली, पानी, सुरक्षा, दक्षता निर्माण और रोड कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देना जरूरी है. सिर्फ कृषि के आधार पर रोजगार नहीं दे सकते.

झारखंड में आदिवासी-गैर आदिवासी की भावना ज्यादा

अध्यक्षीय संबोधन में पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि आज की दुनिया काफी बदल चुकी है. झारखंड में आदिवासी-गैर आदिवासी की भावना कुछ ज्यादा ही है, जबकि छत्तीसगढ़ में झारखंड से छह प्रतिशत अधिक आदिवासी आबादी है, लेकिन वहां ऐसी बात नहीं है.

बाहरी को गाली देना बंद करें : इस मौके पर विशिष्ट अतिथि सह कार्यक्रम के संचालनकर्ता बैजनाथ मिश्र ने कहा कि बाहरी को गाली देना बंद करें. कृष्ण की जन्मभूमि का दर्शन जिन मंत्रियों ने किया है, उनमें से एक का किसी एक का नाम बताइये, जो बाहरी है. राजनीति की रेखा खींच कर बात करना ठीक नहीं है. इस मौके पर लेखक श्याम किशोर चौबे, हिमांशु शेखर चौधरी, प्रो रमेश शरण और नीरज नाथ पाठक ने भी अपनी बात रखी.

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