Ranchi News : खतियान आधारित नीति से थमेगा पलायन

Published by : Uttam Kumar Mahato Updated At : 12 Nov 2025 6:26 PM

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राज्य गठन के आज 25 वर्ष पूरे होने को हैं. इन 25 वर्षों में झारखंड में कई विकास कार्य हुए हैं, लेकिन स्थानीय और नियोजन नीति नहीं होने का खामियाजा यहां के शिक्षित युवाओं को भुगतना पड़ रहा है.

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प्रभात खबर कार्यालय के सभागार में आदिवासी-मूलवासी समाज के बुद्धिजीवियों ने रखी अपनी बात

राज्य के विकास में झारखंडियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर

बुद्धिजीवियों का मत, राज्य की पहचान, नीति और रोजगार में हो झारखंडी दृष्टिकोण

तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियां हो आरक्षित

लाइफ रिपोर्टर @ रांची

राज्य गठन के आज 25 वर्ष पूरे होने को हैं. इन 25 वर्षों में झारखंड में कई विकास कार्य हुए हैं, लेकिन स्थानीय और नियोजन नीति नहीं होने का खामियाजा यहां के शिक्षित युवाओं को भुगतना पड़ रहा है. पढ़-लिखकर युवा रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं. ऐसे में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों को पूरी तरह से स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित करने की आवश्यकता है. यह बातें प्रभात खबर सभागार में आयोजित परिचर्चा में आदिवासी और मूलवासी समाज के गणमान्य लोगों ने कही. उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को झारखंड में ही रोजगार मिले, इसके लिए बिहार की तर्ज पर खतियान को आधार बनाकर स्थानीय और नियोजन नीति बनायी जानी चाहिए.

अलग राज्य निर्माण में सभी समाज का योगदान : राजेंद्र प्रसाद

राज्य निर्माण में सभी समाजों के लोगों का योगदान रहा है, लेकिन आज कुछ वर्गों को राज्य सरकार द्वारा भुला दिया गया है. पूरे राज्य में आदिवासी जमीनों की लूट मची है, जो नेताओं की अदूरदर्शिता और इच्छा शक्ति की कमी का परिणाम है. नतीजतन राज्य में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. आज भी राज्य में संयुक्त बिहार के नियम-कानून लागू हैं, तो फिर बिहार में तीन मार्च 1982 को बनी स्थानीय और नियोजन नीति को यहां क्यों लागू नहीं किया गया? राज्य में अंतिम सर्वे को आधार मानकर खतियान आधारित स्थानीय व नियोजन नीति बनायी जानी चाहिए. साथ ही राज्य में जातीय जनगणना शीघ्र करायी जाये. ओबीसी आयोग ने तमिलनाडु की तर्ज पर आरक्षण को 36% से बढ़ाकर 50% करने की जो अनुशंसा की है, उसे सरकार को तत्काल धरातल पर उतारना चाहिए.

रोजगार के अभाव में युवाओं का पलायन जारी : रोजलीन तिर्की

अलग झारखंड आंदोलन में हमने इस सोच के साथ भाग लिया था कि आने वाले समय में हमारे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा, लेकिन आज राज्य की दशा और दिशा देखकर मन टूट गया है. अपने ही राज्य में हम पराये हो गये हैं. अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन महापुरुषों की प्रतिमा लगाने तक की अनुमति नहीं देता. विस्थापन से अधिकांश लोग प्रभावित हैं. रोजगार के अभाव में शिक्षित युवा आज भी दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं.

आंदोलनकारियों के सम्मान में बने मेमोरियल : ज्ञानेश्वर सिंह

राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी आंदोलनकारियों को अब तक परिभाषित नहीं किया गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. आंदोलनकारियों के सम्मान में एक स्मारक (मेमोरियल) बनाया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके. अलग राज्य के आंदोलन के दौरान सौंपे गये मांग पत्रों का दस्तावेजीकरण सरकार को करना चाहिए. राज्य के युवा शिक्षित तो हो रहे हैं, लेकिन उनमें कौशल की कमी है. पढ़-लिखकर भी बेरोजगार रहना पड़ रहा है.

तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियां झारखंडियों को मिले : पुष्कर महतो

राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी झारखंडवासियों की आशाएं और उम्मीदें पूरी नहीं हो पायी है. सबसे अधिक खनिज संपदा वाला यह राज्य आज विकास के पायदान पर पीछे है. यह राज्य अपने खनिजों के लिए नहीं, बल्कि मजदूरी करने वाले लोगों के पलायन के लिए जाना जा रहा है. इसे रोकने का एकमात्र उपाय खतियान आधारित स्थानीय नीति बनाना है. तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियां शत-प्रतिशत झारखंडी युवाओं को दी जानी चाहिए.

अंतिम सर्वे को आधार बनाकर बने स्थानीय नीति : विद्यासागर केरकेट्टा

राज्य गठन के बाद कई कार्य हुए, लेकिन सबसे ज्वलंत मुद्दा स्थानीयता नीति अब तक अधर में है. इस कारण राज्य अपने उद्देश्यों से भटक गया है. सरकार को प्राथमिकता देते हुए खतियान आधारित स्थानीयता नीति बनानी चाहिए. इसके लिए अंतिम सर्वे को आधार बनाया जाये. आज पूरे राज्य में जमीनों की लूट मची है और आदिवासियों की धार्मिक व सामाजिक भूमि भी सुरक्षित नहीं रही है.

अपने मूल उद्देश्य से भटक गया झारखंड : रवि तिग्गा

राज्य तो बन गया, लेकिन अब तक किसी भी सरकार के पास ऐसा विकास मॉडल नहीं रहा जिसके केंद्र में आदिवासी और मूलवासी हों. नतीजा, झारखंड अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है. सत्ता में बैठे लोगों में झारखंडी सोच का अभाव है और जनता से उनका जुड़ाव कमजोर हो गया है. राज्य के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए खतियान आधारित स्थानीय और नियोजन नीति लागू करना आवश्यक है.

पलायन रोकने के लिए ठोस कदम उठाये सरकार : मोहम्मद जबी

हमने अलग झारखंड के लिए संघर्ष किया ताकि राज्य की अलग पहचान बने, लोगों को रोजगार मिले और वे खुशहाल रहे. लेकिन, आज भी लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं. रोजगार के अभाव में झारखंडवासी अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं. स्थानीय नीति नहीं होने के कारण झारखंड के युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही है. सरकार को पलायन रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

राज्य में विस्थापन आयोग की सख्त जरूरत : दिवाकर साहू

अलग राज्य के लिए जो सपना देखा गया था, वह सपना ही रह गया. आंदोलन में शामिल लोगों को न तो सम्मान मिला, न ही कोई लाभ. उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए. राज्य में पलायन और विस्थापन बड़े मुद्दे हैं. इसलिए विस्थापन आयोग की आवश्यकता है और लोगों के लिए आजीविका के साधन उपलब्ध कराये जाने चाहिए.

कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा मिले : रवि नंदी

अलग राज्य के आंदोलन का उद्देश्य समतामूलक समाज का निर्माण था. लेकिन, आज भी झारखंडवासी शोषण झेल रहे हैं. झारखंड को घरेलू कामगारों के हब के रूप में जाना जाने लगा है. मानव तस्करी की समस्या गंभीर है. विस्थापन बढ़ रहा है और बाहरी लोग स्थापित हो रहे हैं. पलायन को रोकने के लिए कुटीर उद्योग और कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा देना चाहिए. प्रारंभिक शिक्षा में स्थानीय भाषाओं को शामिल किया जाये और खिलाड़ियों के लिए बेहतर व्यवस्था की जाये.

प्राकृतिक संसाधनों से रोजगार सृजन की जरूरत : आरपी रंजन

राज्य में अब भी कुपोषण की समस्या गंभीर है. इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. स्थानीय नीति के अभाव में पलायन बढ़ रहा है. युवाओं के लिए रोजगार सृजन अत्यावश्यक है. राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर रोजगार के अवसर पैदा किये जा सकते हैं. ग्रामीण विकास, सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और परंपरा-संस्कृति के संरक्षण की दिशा में कार्य करना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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