रांची के विकास के लिए बनी पिछली सरकार की योजनाएं नहीं उतरी धरातल पर, डूबे कंसल्टेंसी फीस के 10 करोड़ रुपये

रांची के विकास के लिए बनी कुछ योजनाओं को फिर से धरातल पर उतारने की तैयारी है. लेकिन, इस बार नगर विकास विभाग की जगह पथ निर्माण विभाग उन योजनाओं को लागू कर रहा है
झारखंड में पिछली सरकार में राजधानी के विकास को लेकर बनायी गयी आधा दर्जन से अधिक योजनाएं कागज पर ही बनी. लगभग एक हजार करोड़ रुपये की इन योजनाओं का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए जुडको द्वारा कंसलटेंसी फीस के रूप में अदा किये गये करीब 10 करोड़ रुपये डूब गये हैं. जुडको द्वारा तैयार की गयी हरमू, करमटोली, अरगोड़ा व हरमू फ्लाइओवर के अलावा तीन पूर्व प्रस्तावित स्मार्ट सड़क निर्माण की योजनाओं को बंद कर दिया गया है.
इन सभी का डीपीआर तैयार कर लिया गया था. हालांकि, इनमें से कुछ योजनाओं को फिर से धरातल पर उतारने की तैयारी है. लेकिन, इस बार नगर विकास विभाग की जगह पथ निर्माण विभाग उन योजनाओं को लागू कर रहा है. इसके लिए नये सिरे से फिर डीपीआर बनाया जा रहा है.
राज्य सरकार के विभागों में समन्वय नहीं होने की वजह से कंसलटेंसी फीस के रूप में परामर्शी कंपनियों को चुकायी गयी राशि डूबी है. पूर्ववर्ती सरकार में जुडको ने हरमू फ्लाइओवर का डीपीआर बनाया था. परंतु, योजना धरातल पर नहीं उतारी जा सकी. अब पथ निर्माण विभाग ने हरमू फ्लाइओवर का डीपीआर नये सिरे से तैयार किया है. इसके लिए पुराने डीपीआर में संशोधन की कोई जरूरत नहीं समझी गयी.
इसी तरह डीपीआर बनाने के बाद रांची में प्रस्तावित तीन स्मार्ट सड़क निर्माण की योजना भी बंद कर दी गयी. तीनों सड़कों को नगर विकास से पथ निर्माण को हस्तांतरित कर दिया गया. उन सड़कों के विकास के लिए भी पुराने डीपीआर को संशोधित करने की जगह नया डीपीआर तैयार किया गया है. ऐसी स्थिति में एक ही काम के लिए दो बार भुगतान किया गया है.
हरमू फ्लाइओवर 220 2.20
करमटोली फ्लाइओवर 191 1.90
लालपुर फ्लाइओवर 140 1.40
अरगोड़ा फ्लाइओवर 36 0.36
योजना कुल लागत डीपीआर पर खर्च
राजभवन से बूटी मोड़ स्मार्ट रोड 188 1.80
बिरसा चौक से राजभवन स्मार्ट रोड 162 1.60
एयरपोर्ट से बिरसा चौक स्मार्ट रोड 42 0.42
आंकड़े करोड़ रुपये में
(नोट : योजना की कुल लागत का औसतन एक प्रतिशत डीपीआर बनाने पर खर्च होता है)
डीपीआर योजना की विस्तृत रूपरेखा होती है. किसी प्रोजेक्ट की पूरी सामग्री, डिजाइनिंग, लागत समेत तकनीकी जरूरतों का पूरा ब्योरा डीपीआर में संकलित किया जाता है. डीपीआर में प्रोजेक्ट से संबंधित पूरी विवरण होती है. समय पर और कुशल तरीके से मूल्यांकन व अनुमोदन के बाद परियोजना का कार्यांवयन डीपीआर के माध्यम से ही किया जाता है. डीपीआर तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की पूरी टीम काम करती है. संसाधन और विशेषज्ञों की कमी की वजह से राज्य सरकार की ज्यादातर योजनाओं के लिए परामर्शी कंपनियों की सहायता लेकर डीपीआर तैयार कराया जाता है. इसके लिए औसतन योजना की कुल लागत का एक प्रतिशत परामर्शी कंपनी को भुगतान किया जाता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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