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साहिबगंज और पाकुड़ में बाढ़, 35,000 से ज्यादा जिंदगियां प्रभावित, अंधेरे में कट रहीं रातें और कैद में जिंदगी

Updated at : 12 Aug 2025 8:53 PM (IST)
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बाढ़ में छोटे नाव से जाते बच्चे. फोटो : प्रभात खबर

Jharkhand Flood: झारखंड के साहिबगंज जिले और पाकुड़ में बाढ़ से लोग परेशान हैं. साहिबगंज जिले में 35 हजार से अधिक लोग पूरी तरह से आम जन जीवन से कट गये हैं. रातें अंधेरे में कट रही है. बाढ़ में कैद हो गयी है जिंदगी. वहीं, पाकुड़ में 25 परिवारों को दूसरों के घर में शरण लेनी पड़ी है.

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Jharkhand Flood: झारखंड के साहिबगंज और पाकुड़ जिले में बाढ़ आ गयी है. गंगा नदी के रौद्र रूप ने गंगा नदी के रौद्र रूप ने साहिबगंज जिले में भारी तबाही मचायी है. सदर, राजमहल, उधवा, तालझारी और मंडरो के दियारा क्षेत्रों में 35,000 से ज्यादा लोग पूरी तरह से आमजीवन से कट गये हैं. टापुओं पर शरण लेने को मजबूर हैं. उनकी जिंदगी अब पूरी तरह से राहत और बचाव कार्यों पर निर्भर हो गयी है. वहीं, पाकुड़ में लगातार बारिश से बांसलोई (मसना नदी) का जलस्तर बढ़ गया है. इससे झीकरहाटी पूर्व पंचायत के जामतला और चंडीतला गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है. दोनों गांवों के 25 परिवार दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं.

साहिबगंज के 11 वार्डों में घुसा बाढ़ का पानी. फोटो : प्रभात खबर

नगर परिषद क्षेत्र के 11 वार्डों में घुसा बाढ़ का पानी

साहिबगंज शहर का हाल भी कुछ ऐसा ही है. नगर परिषद क्षेत्र के 11 वार्डों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे भरतिया कॉलोनी, रसूलपुर दहला, नया टोला, हरीपुर, और हबीबपुर जैसे मुहल्लों में सैकड़ों घर जलमग्न हो गये हैं. मंगलवार को बनिया पट्टी दहला, मास्टर कॉलोनी, और सकरोगढ़ नया टोला जैसे नए इलाकों में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गयीं. भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री बजरंगी यादव के घर तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है.

साहिबगंज नगर परिषद के इलाकों में भी घुस गया बाढ़ का पानी. फोटो : प्रभात खबर

बाढ़ के कारण अंधेरे में कट रहीं रातें और कैद में जिंदगी

बाढ़ ने लोगों की जिंदगी को चौतरफा मुश्किल बना दिया है. कई मुहल्लों में बिजली काट दी गयी है, जिससे हजारों लोग रातें अंधेरे में गुजारने को मजबूर हैं. लोगों का घरों से निकलना लगभग नामुमकिन हो गया है. जरूरी कामों के लिए छोटी नाव (डेंगी) ही एकमात्र सहारा है. मासूम बच्चे भी अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से सफर कर रहे हैं. जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गंगा किनारे के स्कूलों को बंद रखने का निर्देश दिया है, जबकि नगर परिषद टैंकरों के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है.

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Jharkhand Flood: राहत की खबर, पर खतरा बरकरार

मामूली राहत की खबर केंद्रीय जल आयोग से आयी है. इसमें कहा गया है कि मंगलवार को गंगा नदी खतरे के निशान से 1.37 मीटर ऊपर थी, अब उसका जलस्तर स्थिर हो गया है. अगले 24 घंटों में इसमें 14 सेंटीमीटर की कमी आने की संभावना है. हालांकि, खतरा अभी टला नहीं है. चानन में सीवरेज प्लांट के पास गंगा नदी से हो रहे कटाव ने एक नयी चिंता खड़ी कर दी है. कटाव के कारण प्लांट की चहारदीवारी गिरने की कगार पर है, जो एक और आपदा को न्योता दे सकता है. लोग अपने मवेशियों के साथ गंगा तट पर डेरा डाले हुए हैं. उनकी आंखों में आने वाले कल को लेकर अनिश्चितता और भय साफ दिख रहा है.

गंगा की बाढ़ को देखते हुए सदर, राजमहल, उधवा में राहत सामग्री वितरित की जा रही है. मानव व पशु कैंप में पदाधिकारी नजर बनाये हुए हैं. प्रशासन सर्वे कर राहत सामग्री और बांटेगा.

गौतम भगत, एसी, साहिबगंज

पाकुड़ के जामतला और चंडीतला गांव में घुसा बाढ़ का पानी

पाकुड़ में लगातार बारिश से बांसलोई (मसना नदी) का जलस्तर बढ़ गया है. इससे झीकरहाटी पूर्व पंचायत के जामतला और चंडीतला गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है. पानी भर जाने के कारण दोनों गांवों के करीब 25 परिवार अपने घर छोड़कर दूसरे के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं. ग्रामीण अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए चंडीतला ब्रिज के ऊपर बांधकर उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं. स्थिति की जानकारी मिलते ही पंचायत की मुखिया नरगिस सुलताना ने गांव का दौरा किया और बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया.

पाकुड़ जिले में टापू बना गांव. फोटो : प्रभात खबर

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जलस्तर बढ़ा तो 5 और गांव आ सकते हैं बाढ़ की चपेट में

उन्होंने कहा कि जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है. मुखिया के अनुसार, अगर पानी का स्तर बढ़ता रहा तो सकरघाट, सितारामपुर, इस्लामपुर, कंकड़बोना पिल्लीपुर और उदयनारायणपुर समेत 5 और गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं. मुखिया ने कहा कि बांध का निर्माण होना जरूरी है. स्थायी समाधान के बिना हर साल ग्रामीणों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है. उन्होंने जिला प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत व पुनर्वास की व्यवस्था करने की अपील की.

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गांव में पानी भरने से लोग परेशान

गांव में पानी भरने से लोगों को आवगमन में भी परेशानी हो रही है. लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कठिनाई हो रही है. वहीं, पंचायत के अतिउर रहमान ने बताया कि मसना नदी पर बना बांध करीब पांच साल पहले टूट गया था. इसके बाद से हर बरसात में यह क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ जाता है. बारिश के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है. रहमान ने कहा कि बांध की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. इस संबंध में पाकुड़ सीओ अरविंद कुमार बेदिया ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं थी. जानकारी प्राप्त कर राहत कार्य जल्द शुरू कर दिया जायेगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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