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झारखंड प्रशासनिक सेवा के 66 फीसदी अफसरों को नहीं मिला SDO रैंक में प्रोमोशन, जानें क्या इसकी बड़ी वजह

Updated at : 30 May 2023 6:45 AM (IST)
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झारखंड प्रशासनिक सेवा के 66 फीसदी अफसरों को नहीं मिला SDO रैंक में प्रोमोशन, जानें क्या इसकी बड़ी वजह

झारखंड प्रशासनिक सेवा के मूल कोटी से एसडीओ रैंक में प्रोन्नति के लिए 180 अधिकारियों की सूची प्रोन्नति समिति के पास विचार के लिए भेजी गयी थी. समिति ने निर्धारित मापदंड के आलोक में विचार करने के बाद प्रोन्नति के योग्य पाये गये अधिकारियों की सूची राज्य सरकार को भेजी

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संपत्ति का ब्योरा नहीं देने और अन्य कारणों से राज्य प्रशासनिक सेवा के मूल कोटि के 66 फीसदी अधिकारियों को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के रैंक में प्रोन्नति नहीं मिली. मापदंड पूरा करनेवाले सिर्फ 34 प्रतिशत अधिकारियों को ही प्रोन्नति मिल सकी. हालांकि, इसमें जेपीसीएससी नियुक्ति घोटाले की जांच के दायरे में शामिल अधिकारी भी शामिल हैं. इन अधिकारियों को न्यायालय के आदेश के आलोक में प्रोन्नति मिली है.

प्रशासनिक सेवा के मूल कोटी से एसडीओ रैंक में प्रोन्नति के लिए 180 अधिकारियों की सूची प्रोन्नति समिति के पास विचार के लिए भेजी गयी थी. समिति ने निर्धारित मापदंड के आलोक में विचार करने के बाद प्रोन्नति के योग्य पाये गये अधिकारियों की सूची राज्य सरकार को भेजी. समिति की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार से 60 अधिकारियों को एसडीओ रैंक में प्रोन्नति की अधिसूचना जारी की.

इसमें सात अधिकारी ऐसे हैं, जो जेपीएससी नियुक्ति घोटाले में जारी सीबीआइ जांच के दायरे में शामिल हैं. एसडीओ रैंक में प्रोन्नत हुए ऐसे अधिकारियों में मोहन लाल मरांडी, प्रशांत कुमार लायक, हरिशंकर बारिक, डॉ शिशिर कुमार सिंह, गोपी उरांव, बैद्यनाथ उरांव और राजीव कुमार का नाम शामिल है. न्यायालय के आदेश के आलोक में इन्हें प्रोन्नति मिली है.

सीबीआइ जांच के दायरे में शामिल इन अधिकारियों में से तीन अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें सेवा काल के दौरान बरती गयी अनियमितताओं के कारण दंडित किया जा चुका है. इनमें मोहनलाल मरांडी, गोपी उरांव और बैद्यनाथ उरांव का नाम शामिल है. इन्हें एक से पांच वेतन वृद्धि तक की रोक का दंड दिया जा चुका है.

78 अधिकारियों ने नहीं दिया संपत्ति का ब्योरा :

समिति ने 180 में से 120 अधिकारियों को विभिन्न कारणों से प्रोन्नति के योग्य नहीं पाया. इसमें संपत्ति का ब्योरा नहीं देने, सरकारी राशि का गबन करने, सेवा संपुष्ट नहीं होने, आरोपित होने और सरकार द्वारा दिये गये दंड का प्रभाव समाप्त नहीं होने जैसे कारण शामिल हैं. राजस्व पर्षद सदस्य अमरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा प्रोन्नति के अयोग्य करार दिये गये अधिकारियों में से 78 ने संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया था.

नियमानुसार राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा एक वर्ष में दाखिल किये गये संपत्ति के ब्योरे को अगले तीन वर्ष के लिए वैध माना जाता है. इसमें से तो कई अधिकारियों ने नौकरी में आने के बाद से ही अपनी संपत्ति का ब्योरा सरकार को नहीं दिया. हालांकि, संपत्ति का ब्योरा दाखिल नहीं करनेवालों के खिलाफ सरकार के स्तर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी है.

ब्योरा नहीं देनेवालों में महिला अधिकारी भी

संपत्ति ब्योरा नहीं देनेवालों में महिला अधिकारी भी शामिल हैं. इन महिला अधिकारियों की सूची में अनुराधा कुमारी, ब्रज लता, मेरी मड़की, जोसेफ कंडुलना, ज्योति कुजूर, मोनिया लता सहित अन्य का नाम शामिल है. संपत्ति का ब्योरा नहीं देनेवाला पुरुष अधिकारियों में संजय कुमार, डेविड बलिहार, सिद्धार्थ शंकर, जीतेंद्र मंडल, कानू राम, अनिल कुमार सिंह, देवेंद्र कुमार आदि का नाम शामिल है.

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