झारखंड शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, कस्तूरबा विद्यालयों में टेंडर प्रक्रिया की मांगी टाइमलाइन

Updated:
विज्ञापन

झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक की तस्वीर, Pic Credit- Facebook

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

JEPC Jharkhand: झारखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में सामानों की खरीद अब जांच के घेरे में है. नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद राज्य शिक्षा परियोजना ने सभी जिलों के DEO और DSE से पिछले दो सालों की टेंडर रिपोर्ट मांगी है. टेंडर क्यों रद्द हुए? पुराने सप्लायर्स से सामान क्यों लिया गया? इन सभी सवालों के जवाब अब जिलाधिकारियों को देने होंगे.

विज्ञापन

JEPC Jharkhand, रांची (सुनील झा की रिपोर्ट): झारखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और बालिका आवासीय विद्यालयों में खाद्य सामग्री व अन्य आवश्यक सामानों की खरीद प्रक्रिया को लेकर राज्य शिक्षा परियोजना ने सख्त रुख अपनाया है. परियोजना के निदेशक ने इस संबंध में सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को पत्र जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. विभाग का यह कदम उन शिकायतों के बाद आया है, जिनमें खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन की बात कही गई थी.

विज्ञापन

दो वित्तीय वर्षों की टेंडर प्रक्रिया का मांगा पूरा ब्योरा

शिक्षा परियोजना ने सभी जिलों को वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में आयोजित की गई टेंडर प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि टेंडर कब जारी किए गए और क्या उन्हें किसी स्तर पर रद्द किया गया था? यदि टेंडर रद्द हुए, तो नियमानुसार दोबारा टेंडर (री-टेंडर) की प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं, इसकी पूरी फाइल विभाग ने मांगी है.

Also Read: एमएमसीएच में शौचालय की नारकीय स्थिति, मरीजों को लेना पड़ रहा है बाहरी दवा

री-टेंडर की विफलता और पुराने सप्लायर्स पर सवाल

परियोजना निदेशक द्वारा जारी निर्देश में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु ‘री-टेंडर’ की विफलता से जुड़ा है. जिलों को यह बताना होगा कि यदि री-टेंडर सफल नहीं हुआ, तो उसके पीछे ठोस कारण क्या थे? साथ ही, ऐसी स्थिति में क्या पुराने आपूर्तिकर्ता (Suppliers) से ही सामग्री की आपूर्ति जारी रखी गई? यदि हां, तो क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकार (Competent Authority) से आवश्यक अनुमति ली गई थी? इस विवरण के माध्यम से विभाग यह जांचना चाहता है कि कहीं जानबूझकर तो पुराने सप्लायर्स को फायदा नहीं पहुंचाया जा रहा है.

पारदर्शिता के लिए टाइमलाइन अनिवार्य

अब सभी जिलों को टेंडर जारी करने की सटीक तारीख, टेक्निकल बीड (Technical Bid) और फाइनेंशियल बीड (Financial Bid) खोलने की तिथि के साथ-साथ वर्क ऑर्डर जारी करने की पूरी टाइमलाइन देनी होगी. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया में कहीं अनावश्यक देरी या जल्दबाजी तो नहीं की गई.

शिकायतों के बाद विभागीय सख्ती

यह पूरी कवायद उन शिकायतों के आधार पर शुरू हुई है, जिनमें कहा गया था कि कई जिलों में कस्तूरबा विद्यालयों के लिए सामानों की खरीद में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. झारखंड शिक्षा परियोजना ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि यदि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

Also Read: सांसद वीडी राम ने केंद्रीय मंत्री से पलामू में धान खरीद की तारीख बढ़ाने की मांग, सौंपा ज्ञापन

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola