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हेमंत सोरेन सरकार से झारखंड जनाधिकार महासभा की मांग, इस रूप में लागू हो PESA

Updated at : 17 Mar 2025 6:14 PM (IST)
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Jharkhand Janadhikar Mahasabha

रांची प्रेस क्लब में पत्रकारों को संबोधित करते झारखंड जनाधिकार महासभा के पदाधिकारी

झारखंड जनाधिकार महासभा ने PESA को लेकर सोमवार को पत्रकारों से बातचीत की. महासभा के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि अबुआ राज की भावना के अनुरूप झारखंड में पूर्ण रूप से PESA लागू किया जाए.

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रांची: झारखंड जनाधिकार महासभा ने रांची के प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार से मांग की कि अबुआ राज की भावना के साथ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) को पूर्ण रूप से लागू किया जाए. इसके लिए झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 (JPRA) में संशोधन कर PESA के सभी प्रावधानों को जोड़ने की जरूरत है. इसके साथ PESA राज्य नियमवाली के ड्राफ्ट में सुधार की भी जरूरत है. महासभा ने JPRA में प्रस्तावित संशोधनों और नियमावली में सुधार के लिए संलग्न ड्राफ्ट जारी किया. प्रेस वार्ता को अलोका कुजूर, दिनेश मुर्मू, डेमका सोय, एलिना होरो, जॉर्ज मोनिपल्ली और रिया तुलिका पिंगुआ ने संबोधित किया.

आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान पर हो रहे लगातार हमले


झारखंड में दशकों से आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक स्वायत्तता और संसाधनों पर लगातार हमले होते रहे हैं. जैसे निजी और सामुदायिक भूमि का अतिक्रमण करना, बिना ग्राम सभा की सहमति के धार्मिक निर्माण करना, पुलिस कैंप स्थापित करना, वन विभाग द्वारा फर्जी मामला दर्ज करना, संस्कृति, भाषा और सामुदायिक प्रबंधन को पर्याप्त संरक्षण न मिलना आदि. हालांकि इन्हें रोकने के लिए संविधान के कई प्रावधान हैं एवं कई स्थानीय कानून भी हैं, लेकिन हमले भी तेज होते गए हैं. ऐसी परिस्थिति में इनके खिलाफ सामूहिक संघर्ष में PESA भी कुछ हद तक मदद कर सकता है.

JPRA को संशोधित करने की जरूरत


PESA के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के प्रावधानों का विस्तार होगा, लेकिन आदिवासी सामुदायिकता, स्वायत्तता और पारम्परिक स्वशासन इस पंचायत व्यवस्था का मुख्य केंद्र बिंदु होगा एवं ग्राम सभा स्वायत्त और स्वशासी होगा. PESA के प्रावधान राज्य के पंचायत राज कानून से ही लागू हो सकते हैं, लेकिन JPRA में PESA के अधिकांश प्रावधान सम्मिलित नहीं है. PESA के अनुसार, राज्य के पंचायत अधिनियम को अनुसूचित क्षेत्र के लिए रूढ़ि विधि, सामाजिक-धार्मिक परम्पराएं और सामुदायिक संसाधनों के पारम्परिक प्रबंधन व्यवस्था अनुरूप बननी है, लेकिन JPRA में यह मूल भावना सम्मिलित नहीं है. इसलिए सबसे पहले JPRA को संशोधित करने की जरूरत है.

कानूनों में नियमावली के अनुसार हो संशोधन


PESA के तहत ग्राम सभा के कुछ प्रमुख अधिकार जो JPRA में सम्मिलित नहीं हैं निम्न हैं – 1) भूमि अर्जन से पहले और पुनर्वास के पहले ग्राम सभा से सहमति, 2) गौण खनिजों पर नियंत्रण, 3) गौण वन उपजों पर मालिकाना, 4) गैर कानूनी तरीके से ली हुई जमीन वापसी करवाने की शक्ति, 5) सामुदायिक संसाधनों का पारंपरिक प्रबंधन व्यवस्था आदि. इसके अलावा JPRA में अनुसूचित क्षेत्र के लिए ऐसे कई धाराएं व प्रावधान हैं जो PESA की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं. उदहारण के लिए, ग्राम सभा के लिए कुल सदस्यों के महज 1/3 की उपस्थिति का कोरम रखा गया है. इससे सामूहिकता कमजोर होती है. पंचायत सचिव को ही ग्राम सभा का सचिव बनाया गया है, जबकि अनुसूचित क्षेत्र में प्रशासन व बाहरी तत्वों द्वारा ग्राम सभाओं को नियंत्रित करने की कोशिश लगातार रहती है. साथ ही, JPRA में ग्राम पंचायतों, पंचायत समिति व जिला परिषद् को कई अधिकार हैं जो PESA के तहत ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र पर हस्तक्षेप करते हैं. महासभा द्वारा JPRA में प्रस्तावित संशोधनों में PESA के सभी अधिकारों को जोड़ा गया है और इन कमियों को सुधारा गया है. राज्य के सभी सम्बंधित कानूनों में नियमावली के अनुसार संशोधन हो.

नियमावली में कमियों में सुधार


महासभा मानती है कि बिना मूल कानून (JPRA) में PESA के सभी प्रावधानों को जोड़े नियमावली बनाना उचित नहीं है क्योंकि प्रावधानों को कानून का बल नहीं मिलेगा. पंचायत राज विभाग द्वारा बनाए गए नियमावली में अनेक गंभीर खामियां हैं. PESA का प्रमुख प्रावधान है कि परम्पराओं और रूढ़ि के अनुसार समाज समाविष्ट टोला/टोलों के समूह से एक गाँव का गठन करना. लेकिन नियमावाली में ग्राम गठन के बदले ग्राम सभा गठन का वर्णन है. PESA के अनुसार ग्राम सभा आदिवासी भूमि का गलत तरीके के हस्तांतरण को रोकने और ऐसी भूमि वापिस करवाने के लिए सक्षम है. लेकिन नियमावली में निर्णायक भूमिका उपायुक्त को दिया गया है. वर्तमान नियमावली में सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक स्वायत्तता पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए प्रक्रियाओं को नहीं जोड़ा गया है. महासभा द्वारा नियमावली में ऐसे कमियों को सुधारा गया है.

PESA पर शुरू हुई है व्यापक चर्चा


विभिन्न संगठनों के लगातार संघर्ष से राज्य में PESA पर व्यापक चर्चा शुरू हुई है. लेकिन विभिन्न समूहों में PESA लागू करने की प्रक्रिया पर अलग-अलग सोच होने के कारण सरकार पर इसे लागू करने के सामूहिक दबाव नहीं पड़ रहा है. ऐसी एक गलत अवधारणा भी फैल रही है कि PESA लागू होने से पंचायत ख़तम हो जायेंगे एवं PESA सीधा, बिना राज्य पंचायत कानून के, लागू हो सकते हैं. महासभा ने इस सम्बन्ध में कई पर्चे जारी किए हैं ताकि सभी PESA अधिकारों और इसके लागू करने की प्रक्रिया से अवगत हो. साथ ही, पंचायत राज मंत्री को भी JPRA व नियमावली के खामियों से अवगत कराया गया है.

गठबंधन दलों का था चुनावी वादा


गठबंधन दलों ने PESA को पूर्ण रूप से लागू करने का चुनावी वादा किया था. विधानसभा सत्र में झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू समेत कई विधायकों ने भी इन मुद्दों को उठाया है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने इस पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखायी है. महासभा राज्य सरकार से मांग करती है कि तुरंत JPRA में संशोधन कर PESA के सभी प्रावधान जोड़े जाएं एवं उसके अनुसार नियमावली बनाई जाए. प्रशासन और पुलिस को ग्राम सभा के अधिकारों के विषय में जागरूक किया जाए एवं यह सुनिश्चित किया जाये कि वे ग्राम सभा के अधिकारों का उल्लंघन न करें.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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