झारखंड हाईकोर्ट में JSSC स्नातक परीक्षा नियमावली को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई, सरकार से मांगा जवाब

Updated at : 06 Apr 2022 8:01 PM (IST)
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झारखंड हाईकोर्ट में JSSC स्नातक परीक्षा नियमावली को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई, सरकार से मांगा जवाब

jharkhand news: झारखंड हाईकोर्ट में JSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन संशोधन नियमावली 2021 को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से कई प्रश्नों का जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 27 अप्रैल को होगी.

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Jharkhand news: झारखंड हाइकोर्ट में JSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन संशोधन नियमावली 2021 को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए नियमावली से संबंधित फाइल को देखने के बाद बाद राज्य सरकार से कई सवालों का जवाब मांगा है.

खंडपीठ ने सरकार से जानना चाहा

खंडपीठ ने सरकार से जानना चाहा कि किस आधार पर राज्य सरकार ने अनारक्षित वर्ग के लिए झारखंड के मान्यता प्राप्त संस्थानों से 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास करने की अनिवार्य शर्त लगायी है तथा आरक्षित वर्ग के मामले में नियमावली के इस प्रावधान को शिथिल किया गया है. साथ ही भाषा श्रेणी से हिंदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया है.

विधि विभाग एवं महाधिवक्ता की अलग-अलग राय

खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि फाइल काे देखा गया है. उसमें विधि विभाग एवं महाधिवक्ता की अगल-अलग राय है. विधि विभाग ने फाइल में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उदाहरण देते हुए इस तरह की नियमावली बनाने के प्रति असहमति व्यक्त की थी, जबकि महाधिवक्ता ने नियमावली बनाने के पक्ष में अपना विचार दिया है. आखिर इस तरह की नियमावली बनाने का आधार क्या है.

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जवाब देने के लिए कोर्ट से मांगा समय

राज्य सरकार की अोर से महाधिवक्ता राजीव रंजन, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी एवं सीनियर एडवोकेट सुनील कुमार ने पक्ष रखते हुए कहा कि वो खुद इस मामले से संबंधित दस्तावेज को देखना चाहेंगे. साथ ही अधिकारियों के साथ बैठक कर उचित सलाह लेंगे, उसके बाद ही कोर्ट में जवाब देंगे. इसके लिए श्री रोहतगी ने समय देने का आग्रह किया, जिसे खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया.

27 अप्रैल को अगली सुनवाई

खंडपीठ ने कहा कि यह गंभीर मामला है. मामले को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता है. राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तिथि निर्धारित की. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अोर से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया और एडवोकेट संजय पिपरावाल ने पक्ष रखा.

क्या है मामला

वहीं, प्रार्थी की ओर से सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार और एडवोकेट कुमार हर्ष ने खंडपीठ को बताया कि जेएसएससी के संशोधित नियमावली के कारण अभ्यर्थियों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. अनारक्षित वर्ग के वैसे अभ्यर्थी, जो मैट्रिक एवं इंटर की पढ़ाई दूसरे राज्यों से की है, वह प्रतियोगिता परीक्षा में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. इससे चयन प्रक्रिया से ही वह बाहर हो गये हैं. राज्य सरकार की दलील का विरोध करते हुए बताया गया कि याचिका सुनवाई योग्य है. सरकार की दलील सही नहीं है. एडवोकेट अजीत कुमार ने खंडपीठ को बताया कि विगत सुनवाई के दाैरान हाइकोर्ट ने नियमावली से संबंधित मूल फाइल मंगायी थी. स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन नियमावली संविधान की भावना के विरुद्ध है. नियमावली के प्रावधान असंवैधानिक है. इसे निरस्त किया जाना चाहिए.

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नियमावली निरस्त करने की मांग

मालूम हो कि प्रार्थी रमेश हांसदा और विकास कुमार चाैबे की ओर से याचिका दायर की गयी है. प्रार्थी ने जेएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन नियमावली 2021 को चुनौती दी है. इसमें सामान्य केटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए मैट्रिक एवं इंटर परीक्षा राज्य के संस्थान से उत्तीर्ण होने संबंधी प्रावधान को असंवैधानिक बताया गया है. यह भी कहा गया है कि भाषा से हिंदी और अंग्रेजी को हटाना गलत है. प्रार्थियों ने उक्त नियमावली को निरस्त करने की मांग की है.

रिपोर्ट : राणा प्रताप, रांची.

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