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नियोजन नीति पर हाइकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

Updated at : 22 Aug 2020 2:09 AM (IST)
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नियोजन नीति पर हाइकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य सरकार की नियोजन नीति व संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति के विज्ञापन को चुनाैती देनेवाली याचिकाअों पर सुनवाई हुई.

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रांची : हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य सरकार की नियोजन नीति व संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति के विज्ञापन को चुनाैती देनेवाली याचिकाअों पर सुनवाई हुई. जस्टिस हरीश चंद्र मिश्र, जस्टिस एस चंद्रशेखर व जस्टिस दीपक राेशन की तीन सदस्यीय लार्जर बेंच ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया.

प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता ललित कुमार सिंह व राजस्थान हाइकोर्ट के अधिवक्ता विज्ञान शाह ने पीठ को बताया कि इसी तरह के समान मामले (आंध्र प्रदेश से संबंधित) में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. उन्होंने बताया कि पांचवीं अनुसूची के तहत आंध्र प्रदेश के राज्यपाल द्वारा अनुसूचित जनजाति की शत प्रतिशत सीट आरक्षित करने संबंधी अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया है.

झारखंड में भी राज्यपाल ने पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित जिलों में स्थानीय के लिए शत प्रतिशत सीट रिजर्व कर दिया है. जाति, क्षेत्र या स्थान आदि के नाम पर नियुक्ति में शत प्रतिशत सीट आरक्षित नहीं की जा सकती है. यह अधिकार राज्यपाल को भी नहीं है. यह संविधान के अनुच्छेद -14, 16, 19(1जी), 21 व 35ए का उल्लंघन है. नियुक्ति का मामला पार्ट-थ्री का है, जिस पर संसद कानून बनाती है.

वहीं महाधिवक्ता राजीव रंजन ने प्रार्थियों की दलील का विरोध करते हुए बेंच को बताया कि आंध्र प्रदेश का मामला अलग था. झारखंड का अलग है. राज्यपाल को पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचना जारी करने का अधिकार है. राज्य सरकार को पॉलिसी बनाने का अधिकार है. स्थान व शिड्यूल पांच के तहत पॉलिसी बनायी गयी है, जो विधिसम्मत है. किसी को शत प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया गया है. उन्होंने बताया कि इस नीति के अनुसार हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति के अलावा भी अन्य विभागों में नियुक्तियां की गयी है.

उन्होंने सरकार की पॉलिसी को संवैधानिक बताया. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की अोर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने बताया कि सरकार की अधियाचना के अनुसार संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया चलायी जा रही है. उल्लेखनीय है कि संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन 21/2016 व राज्य सरकार की अधिसूचना 14-01/2015/स्थानीयता नीति-5938, दिनांक 14.7.2016 (नियोजन नीति) व मेमो नंबर 5939/14.7.2016 को निरस्त करने की मांग की गयी है.

एक साल पहले लगा दी गयी थी क्रियान्वयन पर रोक : सरकार की नियोजन नीति के आलोक में हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति के प्रकाशित विज्ञापन (21/2016, 28.12.2016) में कहा गया है कि राज्य के 11 गैर अनुसूचित जिले के अभ्यर्थी 13 अनुसूचित जिलों में नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं. 13 अनुसूचित जिलों के स्थानीय अभ्यर्थी अपने मूल जिले में ही आवेदन कर सकेंगे.

जस्टिस एस चंद्रशेखर की एकल पीठ ने 12 दिसंबर 2018 को मामले में संवैधानिक पहलुअों को देखते हुए उसे खंडपीठ में स्थानांतरित कर दिया था. 18 सितंबर 2019 को खंडपीठ ने राज्य सरकार की अधिसूचना 5393, दिनांक 14 जुलाई 2016 के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी थी.

Post by : Pritish Sahay

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