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सिर्फ पाइपलाइन बिछाने से नहीं होगा काम, पानी कहां से लायेंगे, यह अधिक जरूरी है : हाइकोर्ट

Updated at : 27 Jun 2024 1:08 AM (IST)
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मामला जल स्रोतों और नदियों के अतिक्रमण तथा साफ-सफाई का. हाइकोर्ट ने कहा कि जल को संरक्षित रखना तथा जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाना जरूरी है.

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रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में नदियों और जल स्रोतों के अतिक्रमण तथा साफ-सफाई को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान माैखिक रूप से कहा कि राजधानी रांची में सिर्फ पाइपलाइन बिछा देने से कुछ नहीं होगा. पानी कहां से लायेंगे, यह अधिक जरूरी है. जल को संरक्षित रखना तथा डैमों के कैचमेंट एरिया के साथ-साथ शहर के जल स्रोतों जैसे कांके डैम, हटिया डैम, गेतलसूद डैम, हिनू नदी के आसपास से अतिक्रमण हटाना आवश्यक है.

खंडपीठ ने कहा कि बार-बार निर्देश देने के बाद भी कांके डैम में नाली का गंदा पानी जा रहा है. लगातार गंदा पानी व गंदगी डाले जाने व अतिक्रमण से हरमू नदी नाला में तब्दील हो चुकी है. खंडपीठ ने निर्देश दिया कि नगर विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में समिति बनायी जाये, जो एक सप्ताह में शहर के डैमों के अतिक्रमण व जल स्रोतों में पानी संरक्षित रखने, कैचमेंट एरिया को सुरक्षित करने आदि विषयों पर बैठक करेगी. साथ ही तीन सप्ताह के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. शहर में गंदे जल की आपूर्ति की समस्या दूर कर शुद्ध पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने रांची नगर निगम के प्रशासक से कहा कि माॅनसून आनेवाला है. राजधानी में वर्षा होने पर सड़कों पर नाले का गंदा पानी व कचरा आ जाता है. वैसी स्थिति में सभी नाले की सफाई कर उसे दुरुस्त करें. खंडपीठ ने शहर की 648 बहुमंजिली इमारतों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच करनेवाली अधिवक्ताओं की समिति की ओर से प्रस्तुत अंतरिम रिपोर्ट का अध्ययन कर रांची नगर निगम को कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी.

वर्ष 2026 तक दो लाख लोगों को पानी का कनेक्शन दिया जायेगा

मामले की सुनवाई के दाैरान पेयजल स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग के सचिव व रांची नगर निगम के प्रशासक सशरीर उपस्थित थे. उनकी ओर से खंडपीठ को बताया गया कि शहर में पेयजलापूर्ति को लेकर पाइपलाइन बिछायी जा रही है. इसके माध्यम से वर्ष 2026 तक दो लाख लोगों को पानी का कनेक्शन दिया जायेगा तथा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा. इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा कर गंदे पानी की सफाई की जायेगी. वहीं, रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने खंडपीठ को बताया कि बड़ा तालाब की स्थायी सफाई को लेकर कई एजेंसियों से बात हो रही है. तकनीक का उपयोग कर बड़ा तालाब की सफाई की जायेगी.

निचले इलाके में भर जाता है पानी

हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारूका व शुभम कटारूका ने बताया कि रांची शहर के कई इलाके जैसे हरमू का निचला क्षेत्र, सेवा सदन अस्पताल के आसपास, मेन रोड, थड़पखना आदि जगहों में एक-दो घंटे की वर्षा के बाद नाले का पानी सड़कों पर आ जाता है. इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है. उल्लेखनीय है कि नदियों और जल स्रोतों के अतिक्रमण व साफ-सफाई के मामले को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए वर्ष 2011 में उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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