नयी शिक्षा नीति 2020 पर बोलीं राज्यपाल : वर्तमान समय में गुणात्मक एवं शोधपरक शिक्षा की है जरूरत
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Aug 2020 6:54 PM
Jharkhand news, Ranchi news : झारखंड की राज्यपाल सह राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) द्रौपदी मुर्मू राज्य के विभिन्न यूनिवर्सिटी के कुलपति/प्रतिकुलपति के शुक्रवार को समीक्षा बैठक की. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में नयी शिक्षा नीति पर चर्चा की. इस दौरान श्रीमती मुर्मू ने कहा कि अधिक से अधिक लोग उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकें. इसके लिए गुणात्मक एवं शोधपरक शिक्षा जरूरी है. इसी को ध्यान में रख कर नयी शिक्षा नीति- 2020 पंचायत से संसद तक विचार- विमर्श के बाद हमारे सामने आयी है.
Jharkhand news, Ranchi news : रांची : झारखंड की राज्यपाल सह राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) द्रौपदी मुर्मू राज्य के विभिन्न यूनिवर्सिटी के कुलपति/प्रतिकुलपति के शुक्रवार को समीक्षा बैठक की. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में नयी शिक्षा नीति पर चर्चा की. इस दौरान श्रीमती मुर्मू ने कहा कि अधिक से अधिक लोग उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकें. इसके लिए गुणात्मक एवं शोधपरक शिक्षा जरूरी है. इसी को ध्यान में रख कर नयी शिक्षा नीति- 2020 पंचायत से संसद तक विचार- विमर्श के बाद हमारे सामने आयी है.
मालूम हो कि नयी शिक्षा नीति- उच्च शिक्षा में परिवर्तन विषय पर आगामी 7 सितंबर, 2020 को राष्ट्रपति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा करेंगे. इस चर्चा में विभिन्न राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल/उप राज्यपाल/प्रशासक शामिल होंगे. इसी के तहत श्रीमती मुर्मू राज्य के विभिन्न यूनिवर्सिटी के कुलपति/प्रतिकुलपति से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राय एवं प्रतिक्रिया ले रही थी.
इसमें विद्यार्थियों की जरूरतों एवं रूचि का ख्याल रखा गया है. इसमें पढ़ाई, शोध के साथ अन्य गतिविधियां जैसे- कला, संस्कृति एवं खेलकूद का भी ध्यान रखा गया है. इस शिक्षा नीति के माध्यम से सभी वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया गया है. इस शिक्षा नीति के माध्यम से व्यवसायिक/रोजगारपरक शिक्षा की दिशा में भी ध्यान दिया गया है. इस शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा जगत में कई व्यापक पहल किये गये हैं, जिसे सकारात्मक मूर्त रूप प्रदान करना शिक्षण संस्थानों का अहम दायित्व है.
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राज्यपाल श्रीमती मुर्मू ने कहा कि नयी शिक्षा नीति सभी वर्गों समेत नारी शिक्षा पर बल देने के साथ समावेशी शिक्षा की ओर ध्यान दिया गया है. इसमें मातृभाषा का ध्यान रखा गया है. साथ ही डिजिटल एजुकेशन पर भी जोर दिया गया है. इस प्रतिस्पर्धा के युग में हमारे विद्यार्थी विश्व में अपना स्थान कैसे अहम बना पायें इसका प्रयास किया गया है. भारत को दोबारा विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना है. यह हम सभी का सपना है. राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस ओर गंभीरता से ध्यान देते हुए एेसी अनुकूल शिक्षा नीति की पहल की है. इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एवं आयोग के अध्यक्ष कस्तूरीरंगन बधाई के पात्र हैं.
इस अवसर पर रांची यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडे ने कहा कि नयी शिक्षा नीति 21वीं सदी की प्रथम नीति है, जो शिक्षा के क्षेत्र में हमारी जरूरतों की पूर्ति करता है. यह मैकाले के प्रभाव से मुक्त ग्राम पंचायत तक के सुझावों से प्राप्त कर बनाया गया है. नयी शिक्षा नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति सहित सभी वर्गों की शिक्षा पर ध्यान दिया गया है. इसमें नवीन अनुसंधान पर बल देने के साथ सकल घरेलू उत्पाद 6 फीसदी व्यय करने का लक्ष्य रखा गया है. यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने में भी सहायक होगा. ऐसी शिक्षा नीति झारखंड की कला- संस्कृति को समृद्ध करेगा.
विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ मुकुल नारायण देव ने कहा कि वर्तमान में हमारी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और अन्य विकसित देशों जैसी नहीं है. अनुसंधान कार्य उत्तम नहीं है. ऐसे में यह शिक्षा नीति अहम हो सकता है. हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों को सकारात्मक कदम उठाने होंगे.
बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नयी शिक्षा नीति भारत की मिट्टी से जुड़ा है. नयी शिक्षा नीति में महाविद्यालय की आॅटोनॉमी पर ध्यान दिया गया है. यूनिवर्सिटी को भी 3 श्रेणी में बांटा गया है. आईआईटी और आईआईएम जैसे शिक्षण संस्थान और खुलेंगे. मिशन नालंदा और मिशन तक्षशीला की बात कही गयी है.
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डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो डॉ एसएन मुंडा ने कहा कि यह शिक्षा नीति पारंपरिक भारत में शोध पर आधारित है. हमारा देश विविधताओं का प्रदेश है. यहां भौगोलिक, भाषायी, रीति-रिवाज में भिन्नता है. इसके अंतर्गत मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करना सराहनीय है. व्यवसायिक शिक्षा पर भी बल दिया गया है. इस नयी शिक्षा नीति के माध्यम से अनुसंधान के द्वारा लोकल से ग्लोबल और लोकल के वोकल पर भी जोर दिया गया है.
कोल्हान यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ गंगाधर पांडा ने विभिन्न शिक्षा आयोगों और नीतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत UGC और AICTE को एकीकृत किया गया है. कौशल विकास पर भी ध्यान दिया गया है. इसमें सभी कलाओं जैसे- होटल मैनेजमेंट से लेकर ब्यूटी पार्लर तक अन्य सभी कलाओं का भी ध्यान रखा गया है. 4 वर्षीय डिग्री के मध्य बच्चे यदि किसी कारणवश बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं, तो उन्हें उनकी अवधि के मुताबिक कोई न कोई डिग्री अवश्य मिलेगी, ताकि वे रोजगार हासिल कर सकें. शिक्षण में सिद्धांत और प्रायोगिक पर बल दिया गया है.
नीलाम्बर- पीताम्बर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ रामलखन सिंह ने कहा कि इस शिक्षा नीति में प्राचीन और नवीन शिक्षा पर जोर दिया गया है. नये शिक्षण संस्थान खुलेंगे. ये शिक्षा नीति हमारे राज्य के लिए वरदान होंगे, जहाँ विद्यार्थी मातृभाषा में शोध कर सकेंगे. इस शिक्षा नीति के माध्यम से सभी भारतीय भाषाओं के उत्थान पर बल दिया गया है.
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सिदो- कान्हु मुर्मू यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ सोनाझरिया मिंज ने कहा कि यह शिक्षा नीति समय की मांग है. इसमें उच्च शिक्षा में परिवर्तन और गुणात्मक बनाने की बात कही गयी है. इसके अंतर्गत सीखने वाले की इच्छा का ध्यान रखा गया है. व्यवसायिक एवं वाणिज्यिक शिक्षा और बहुआयामी बनेगा. इसके माध्यम से अन्वेषणात्मक (Investigative) विचार एवं शोध को विकसित करने पर बल दिया गया है. सीखने वाले की इच्छा के अनुसार पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों जैसे- खेलकूद, कला-संस्कृति आदि की बात कही गयी है. यूनिवर्सिटी भी सबल बनेगा, ताकि इसका कार्यान्वयन किया जा सके.
झारखंड राज्य तकनीकी यूनिवर्सिटी के कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य अच्छा इंसान बनाना है. जिसके पास नेक सोच हो, सामाजिक, सैद्धांतिक एवं नैतिक मूल्य हो. छात्र- शिक्षक के मध्य संवादहीनता को दूर करना होगा. शिक्षक समाज का निर्माण करता है. वे बच्चों को अच्छी शिक्षा दें तथा समर्पित भाव से पढ़ाएं. उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति भारत में प्रासंगिक नहीं थी. यह शिक्षा नीति देश को नयी ऊंचाइयों को छूयेगा. उन्होंने कहा कि हम सभी को आज भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय को अपना आदर्श एवं प्रेरणास्रोत बनाना होगा, जिन्होंने अपनी लगन और निष्ठा से बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी को समर्पित भाव से एक आदर्श यूनिवर्सिटी के रूप में खड़ा कर दिया.
Posted By : Samir Ranjan.
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