Ranchi News : कर्मचारी ईमानदारी से काम करें, उनके भविष्य व सुरक्षा की चिंता कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री

Published by : PRADEEP JAISWAL Updated At : 17 Apr 2025 6:05 PM

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राज्य कर्मियों के सैलेरी पैकेज को लेकर झारखंड सरकार और भारतीय स्टेट बैंक के बीच एमओयू किया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में वित्त विभाग की विशेष सचिव राजेश्वरी बी व एसबीआइ के डीजीएम देवेश मित्तल ने हस्ताक्षर किये.

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रांची (प्रमुख संवाददाता). राज्य कर्मियों के सैलेरी पैकेज को लेकर झारखंड सरकार और भारतीय स्टेट बैंक के बीच एमओयू किया गया. एमओयू के तहत एसबीआइ में वेतन खाता रखने वाले राज्य सरकार के प्रत्येक कर्मचारी को एक करोड़ रुपये का दुर्घटना बीमा, एक करोड़ रुपये का स्थायी अपंगता बीमा, 80 लाख रुपये का आंशिक अपंगता बीमा, 10 लाख रुपये का जीवन बीमा व परिवार के लिए 20 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा निशुल्क किया जायेगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में वित्त विभाग की विशेष सचिव राजेश्वरी बी व एसबीआइ के डीजीएम देवेश मित्तल ने हस्ताक्षर किये.

मौके पर मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कहा कि एसबीआइ ने झारखंड जैसे पिछड़े राज्य में बड़ा कदम उठाया है. एमओयू राज्य के लिए बड़ी सौगात है. राज्य सरकार के साथ अब एसबीआइ जैसे संस्था भी सरकारी कर्मचारियों की चिंता कर रही है. कर्मियों को अपने या परिवार के भविष्य की बहुत ज्यादा चिंता करने जरूरत नहीं है. राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के भविष्य व सुरक्षा की चिंता कर रही है. कर्मचारी राज्य के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ करें. समारोह में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना डाडेल, एसबीआइ के मुख्य महाप्रबंधक (झारखंड-बिहार) केबी बंगारराजू व महाप्रबंधक प्रभाष बोस मौजूद थे.

कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य प्राथमिकता : वित्त मंत्री

समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि एमओयू के बाद एसबीआइ राज्य सरकार के कर्मियों के साथ सहयोगी के रूप में खड़ी होगी. 589 शाखा और 1248 एटीएम वाला एसबीआइ राज्य के हर परिवार का हिस्सा बन गया है. राज्य सरकार अपने कर्मियों को न केवल सम्मान व सुरक्षा बल्कि सुविधाएं भी देना चाहती है. कर्मियों को एसबीआइ द्वारा दिये जाने वाले बीमा के लिए कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना होगा. कोई प्रीमियम या शुल्क नहीं है. केवल लाभांवित का वेतन खाता एसबीआइ में होना अनिवार्य है. यह समझौता राज्य सरकार का अपने कर्मियों प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है. कर्मचारी राज्य की रीढ़ होते हैं. राज्य सरकार अपने कर्मियों के सुरक्षा, सम्मान व भविष्य को प्राथमिकता में रखती है. अब एसबीआइ की विश्वसनीयता व सरकार की प्रतिबद्धता से हर कर्मी खुद को सुरक्षित व सम्मानित महसूस करेगा.

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