टूट गयी तृणमूल कांग्रेस, रीतब्रत 58 बागी विधायकों के समर्थन से बने विपक्ष के नेता, बोले- ममता मंजूर, अभिषेक नहीं

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 03 Jun 2026 10:48 PM

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रीतब्रत बनर्जी, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी.

TMC Splits: तृणमूल कांग्रेस के 28 साल के इतिहास में पहली बार बड़ी फूट हुई है. 58 बागी विधायकों ने रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुनकर विधायक दल पर कब्जा कर लिया है. स्पीकर की मंजूरी के बाद ममता बनर्जी ने बंगाल की सभी कमेटियां भंग कर दी हैं.

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TMC Splits: तृणमूल कांग्रेस को बुधवार को अपने 28 साल के इतिहास में पहली फूट का सामना करना पड़ा. पार्टी के 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुनकर विधायक दल पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया. इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी प्राप्त कर ली, जिससे ममता बनर्जी की पार्टी अपने गठन के बाद से अब तक के सबसे गंभीर आंतरिक संकट में घिर गयी है.

टीएमसी ने सभी समितियों को किया भंग

कुछ ही घंटों के भीतर, घबराये हुए तृणमूल नेतृत्व ने पूरे पश्चिम बंगाल में पार्टी की सभी समितियों और अग्रिम मोर्चों को भंग कर दिया. यह कदम तेजी से बढ़ते सत्ता संघर्ष के बीच राजनीतिक नियंत्रण वापस पाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

विधायकों में गहरी दरार उजागर

विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी की करारी हार के दो महीने के भीतर ही हुई इस नाटकीय बगावत ने संगठन और इसके निर्वाचित विधायकों के बीच एक गहरी दरार को उजागर कर दिया है. इसने नेतृत्व, उत्तराधिकार और उस पार्टी की भविष्य की दिशा पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं, जिसका एक दशक से अधिक समय से बंगाल की राजनीति पर दबदबा रहा है.

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स्पीकर को सौंपा 58 विधायकों का समर्थन पत्र

रीतब्रत बनर्जी और उनके साथी एवं निष्कासित विधायक संदीपन साहा के नेतृत्व वाले विद्रोही खेमे ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को 58 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे. यह संख्या दलबदल रोधी कानून के तहत एक अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की सीमा को आसानी से पार कर लेती है.

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विधानसभा में हम हैं असली तृणमूल : रीतब्रत

विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद रीतब्रत ने पत्रकारों से कहा- विधानसभा अध्यक्ष ने हमारे दावे को स्वीकार कर लिया है. संख्याबल के माध्यम से अपनी वैधता का दावा करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि टीएमसी विधायक दल 58 विधायकों की एक टीम है, जिन्होंने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता है. अब विधानसभा में असली तृणमूल हम ही हैं.

स्पीकर ने बागी गुट के दावे को दी मंजूरी

विधानसभा अध्यक्ष की स्वीकृति ने प्रभावी रूप से उस पार्टी में पहली संगठनात्मक दरार को औपचारिक रूप दे दिया, जिसकी स्थापना ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होने के बाद की थी. बागी खेमे ने एक नयी नेतृत्व संरचना प्रस्तुत की, जिसमें रीतब्रत को नेता प्रतिपक्ष और अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक नामित किया गया. वरिष्ठ विधायकों और पार्टी के पुराने सदस्यों जावेद अहमद खान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा को उपनेता नियुक्त किया गया.

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टीएमसी के दिग्गज नेता भी विद्रोही गुट में शामिल

तृणमूल कांग्रेस के तमाम दिग्गज विधायक भी इस विद्रोह में शामिल हो गये हैं, जिनमें समर मुखोपाध्याय, अरूप रॉय, रथीन घोष, जावेद खान और प्रसून बनर्जी जैसे नाम शामिल हैं. हालांकि, बागियों ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती नहीं दी.

ममता बनर्जी मंजूर, अभिषेक बनर्जी नहीं : बागी विधायक

विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गये अपने पत्र में, बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में मान्यता देना जारी रखा. साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे विधायक दल के कामकाज में उनके भतीजे तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के अधिकार को अब और स्वीकार नहीं करेंगे.

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ममता बनर्जी से की मार्गदर्शन करने की अपील

विपक्ष के नेता रीतब्रत ने पूर्व मुख्यमंत्री से विधायक दल का मार्गदर्शन करने की अपील भी की. उन्होंने कहा- हम ममता बनर्जी से अनुरोध करेंगे कि वह विधायक दल के मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाएं.

ममता ने कहा- बागियों के कदम अवैध

ममता खेमे ने बागियों के कदम की वैधता पर सवाल उठाये हैं. उनका दावा है कि विधानसभा अध्यक्ष को दी गयी जानकारी पार्टी के आधिकारिक लेटरहेड की बजाय सादा कागज पर जमा की गयी. पार्टी ने कहा कि विधानसभा को इस तरह के किसी भी निर्णय की जानकारी देने का अधिकार केवल पार्टी अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पास ही है.

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संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप उठाया कदम – रीतब्रत

रीतब्रत ने जोर देकर कहा कि हर कदम संसदीय परंपराओं और विधायी नियमों के अनुरूप उठाया गया है. विद्रोह के तात्कालिक कारणों के तार चुनाव बाद नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर पैदा हुए विवाद से जुड़े हैं.

TMC Splits: क्या है टीएमसी का पूरा विवाद?

  • विवाद तब शुरू हुआ, जब विधानसभा अध्यक्ष को वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को मान्यता देने के लिए भेजे गये एक प्रस्ताव में कथित तौर पर कई विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर पाये गये. इन आरोपों के कारण इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी और सीआईडी जांच शुरू हुई.
  • खतरे की गंभीरता को भांपते हुए, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संगठनात्मक मोर्चे पर तेजी से कदम उठाये और सभी संगठनात्मक इकाइयों के पुनर्गठन से पहले उनकी संरचना और कामकाज की व्यापक समीक्षा करने की घोषणा की.
  • रीतब्रत तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष थे और अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव. राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इस कदम को इस स्वीकारोक्ति के रूप में देखा कि यह संकट सामान्य गुटबाजी से कहीं आगे निकल गया है. अब पार्टी पर नियंत्रण के संघर्ष के रूप में बदल चुका है.

महाराष्ट्र में शिवसेना में टूट की दिलायी याद

वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को दोफाड़ किया था और वर्ष 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विभाजन हुआ था. बंगाल की यह बगावत भी मूल संगठन पर नियंत्रण की बजाय विधायक दल के भीतर संख्या बल के इर्द-गिर्द बुनी गयी है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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