JTET भाषा विवाद: मंत्रियों की कमेटी में नहीं बनी बात, 6 में से 4 का विरोध, अब CM करेंगे फैसला

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Jharkhand JTET Dispute

बैठक करते कमेटी के सदस्य

Jharkhand JTET Dispute: झारखंड जेटेट (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने पर बनी मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक बेनतीजा रही. शिल्पी नेहा तिर्की और हफिजुल हसन सहित 4 मंत्रियों के विरोध के बाद अब अंतिम फैसले के लिए रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजी जा रही है.

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रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट

Jharkhand JTET Dispute, रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की जिलावार सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का मामला पूरी तरह उलझ गया है. इस विवाद को सुलझाने के लिए गठित मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी की बुधवार को हुई अहम बैठक बेनतीजा रही. पूर्व की पांच सदस्यीय कमेटी के विस्तार के बाद यह पहली बैठक थी, जिसमें मंत्रियों के बीच आपसी सहमति नहीं बन सकी. अब कमेटी अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपेगी, जिनका फैसला इस विषय पर अंतिम होगा.

कमेटी में अल्पमत में आए समर्थक, विरोध में 4 मंत्री

बैठक में कमेटी के भीतर भाषाई प्राथमिकताओं को लेकर मंत्रियों के बीच स्पष्ट विभाजन देखने को मिला. कमेटी में शामिल दो नए मंत्रियों- शिल्पी नेहा तिर्की और हफिजुल हसन अंसारी ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने पर कड़ी असहमति जताई. पहले से कमेटी में शामिल मंत्री सुदिव्य सोनू और योगेंद्र महतो पहले से ही इसके विरोध में थे. इसके साथ ही विरोध करने वाले मंत्रियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. कमेटी के संयोजक व वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और मंत्री संजय सिंह यादव इन तीनों भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में डटे रहे.

संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने चला नया दांव

बैठक के दौरान सहमति न बनते देख कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने एक नया प्रस्ताव सामने रखा. उनका कहना था कि यदि ये तीन भाषाएं शामिल नहीं की जाती हैं, तो हिंदी को पेपर टू (Paper 2) में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. उन्होंने दलील देते हुए कहा कि पलामू और गढ़वा में नागपुरी भाषा को सूची में शामिल किया गया है, जबकि वहां दो प्रतिशत आबादी भी इस भाषा को नहीं बोलती. उन्होंने जोर दिया कि राज्य का गठन जनजातीय भावना के साथ-साथ यहां के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए सभी वर्गों को ध्यान में रखकर हुआ था. हालांकि, इस प्रस्ताव पर बाकी मंत्रियों ने साफ कहा कि पेपर वन (Paper 1) में हिंदी पहले से ही मौजूद है.

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जानिए बैठक में किस मंत्री ने क्या तर्क दिया

कमेटी की नई सदस्य और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य में अभी स्पष्ट स्थानीय नीति नहीं है, ऐसे में भाषा से ही स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा और बाहरी तत्वों पर नियंत्रण संभव है. शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) राज्य अपनी जरूरत और योग्य शिक्षकों की तलाश के लिए लेता है, वरना सीटेट (CTET) ही काफी था. जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाएं हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक हितों से जुड़ी हैं. जब स्कूलों में मगही, भोजपुरी और अंगिका की पढ़ाई ही नहीं होती, तो इन्हें परीक्षा में कैसे शामिल किया जा सकता है.”

हफिजुल हसन अंसारी ने क्या कहा

कमेटी के एक और नए सदस्य हफिजुल हसन अंसारी ने कहा कि मगही, भोजपुरी और अंगिका बिहार की मूल भाषाएं हैं. जब खुद बिहार ने अपनी प्रशासनिक सेवा (BPSC) की परीक्षाओं में इन भाषाओं को शामिल नहीं किया है, तो झारखंड इन्हें अपनी परीक्षा में क्यों शामिल करें? इन्हें किसी भी हाल में शामिल नहीं किया जा सकता.”

मंत्री इस सुदिव्य सोनू ने क्या कहा

मंत्री इस सुदिव्य सोनू ने इस विवाद पर तर्क देते हुए झारखंड राज्य का गठन जिन मूल भावनाओं और उद्देश्यों के लिए हुआ था, उसका हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं, हेमंत कैबिनेट के एक और मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने दलील दी कि मगही, भोजपुरी और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है.”

दीपिका पांडेय सिंह और राधाकृष्ण किशोर समर्थन में

हालांकि, दीपिका पांडेय सिंह इन 3 भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में दिखाई पड़ीं. उन्होंने कहा कि अंगिका, भोजपुरी और मगही को परीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए. हर भाषा का अपना सम्मान होना चाहिए.” मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कमेटी की सदस्य और मंत्री दीपिका की बात का समर्थन किया. उन्होंने दलील दी कि राज्य में किसी भी क्षेत्र के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, परीक्षा में सबको समान अवसर मिलना चाहिए.”

मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी रिपोर्ट, दो दिन का समय

कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह इस संबंध में आखिरी बैठक थी. उन्होंने कमेटी के सभी सदस्यों से कहा है कि यदि वे चाहें तो अपनी बातें लिखित रूप में एक-दो दिन के भीतर दे सकते हैं. इसके बाद मंत्रियों की इस भावना और लिखित दलीलों से अवगत कराते हुए पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेज दी जाएगी, जिसके बाद इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से ही लिया जाएगा.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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