बारिश ने खोली झारखंड की बिजली व्यवस्था की पोल, कई इलाके अंधेरे में, अब तक किसी सरकार ने नहीं किया वादा पूरा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Mar 2023 4:26 AM
झारखंड अलग राज्य गठन से लेकर अब तक हर सरकार ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करने का वादा किया, लेकिन किसी ने भी अपने वादे को पूरा नहीं किया. ग्रामीण इलाकों में तो मुश्किल से 12-15 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो पाती है
रांची, सुनील चौधरी:
मौसम के बदले मिजाज के कारण तीन दिन से हो रही बारिश ने झारखंड में बदहाल बिजली व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. हालत यह है कि राजधानी में ही अधिकांश इलाकों में कई घंटों से बिजली नहीं है. बिजली की किल्लत ऐसी है कि लोग घरों में सामान्य काम-काज भी नहीं निबटा पा रहे हैं.
झारखंड अलग राज्य गठन से लेकर अब तक हर सरकार ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करने का वादा किया, लेकिन राजधानी में ही कभी भी 24 घंटे लगातार बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी है. वहीं, ग्रामीण इलाकों को बमुश्किल 12 से 15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है.
झारखंड बिजली के मामले अब तक आत्मनिर्भर नहीं हो सका है. इसका कारण है कि राज्य के पास अपने केवल दो ही प्लांट – तेनुघाट (420 मेगावाट) और सिकिदिरी हाइडल (130 मेगावाट) हैं. राज्य में पीक आवर में बिजली की मांग 2200 मेगावाट से 2500 मेगावाट तक चली जाती है.
ऐसे में डीवीसी, एनटीपीसी, सेकी, एनएचपीसी और आधुनिक पावर जैसी कंपनियों से बिजली लेकर मांग पूरी की जाती है. यानी इनसे बिजली खरीद कर यहां आपूर्ति की जाती है. ऐसे में वित्तीय बोझ बढ़ने की वजह से झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) लगातार घाटे में चल रहा है. राज्य सरकार अपना कोई पावर प्लांट खड़ा नहीं कर सकी है. हालांकि, राज्य में एनटीपीसी, डीवीसी, टाटा पावर, आधुनिक और इनलैंड के पावर प्लांट हैं.
जेबीवीएनएल के एकाउंट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली बेचने से 5869.89 करोड़ रुपये मिले हैं. वहीं, सरकार से अनुदान के रूप में 1077.65 करोड़ रुपये मिले हैं. यानी कुल आय 6947.55 करोड़ है. जेबीवीएनएल द्वारा एक वर्ष में 6430.83 करोड़ की बिजली खरीदी गयी.
वहीं, आय से 2088.38 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए हैं. जेबीवीएनएल ने माना है कि एक साल में 2088.38 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. यानी बिजली खरीदने और बेचने में निगम को प्रतिदिन 5.72 करोड़ का नुकसान हो रहा है. जेबीवीएनएल का एटीएंडसी लॉस 33% है, जो राष्ट्रीय औसत 16.87% से दोगुना है.
तेनुघाट और चांडिल डैम में जल विद्युत (हाइडल पावर) प्लांट बनाया जायेगा. इसकी तैयारी जेरेडा द्वारा की जा रही है. तेनुघाट में एक मेगावाट का और चांडिल डैम में आठ मेगावाट का प्लांट बनाया जायेगा. चांडिल डैम में चार-चार मेगावाट की दो यूनिट होगी. दोनों ही जगहों पर पीपीपी मोड में प्लांट का निर्माण होगा. बताया गया कि अगले सप्ताह जेरेडा द्वारा आरएफक्यू निकाल दिया जायेगा.
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