आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट : राजस्व के लिए केंद्र पर राज्य की निर्भरता बढ़ी

Author Pritish Sahay|Edited by Prabhat Khabar
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पिछले कुछ वर्षों में राजस्व के लिए केंद्र पर निर्भरता ज्यादा बढ़ी है. ऐसा 14वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-20 तक की अवधि में केंद्रीय करों में राज्य की भागीदारी बढ़ाने की वजह से हुआ है. इस अवधि में योजना खर्च में तेजी से वृद्धि हुई

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रांची : पिछले कुछ वर्षों में राजस्व के लिए केंद्र पर निर्भरता ज्यादा बढ़ी है. ऐसा 14वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-20 तक की अवधि में केंद्रीय करों में राज्य की भागीदारी बढ़ाने की वजह से हुआ है. इस अवधि में योजना खर्च में तेजी से वृद्धि हुई. योजना खर्च में 26.5 प्रतिशत की दर से औसत वार्षिक वृद्धि हुई. गैर योजना में यह वृद्धि केवल 9.1 प्रतिशत रही. टैक्स रेवेन्यू में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

लेेकिन, बजट में खर्च का आकलन अधिक किया गया. इससे बजट अनुमान और वास्तविक खर्च में भारी अंतर पैदा हो गया. वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच 15000 करोड़ का अंतर था. वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2017-18 के बीच राज्य ने निर्धारित सीमा से अधिक कर्ज लिया. इस कारण 2018-19 में राज्य का जीएसडीपी और कर्ज का अनुपात बढ़ कर 27.2 प्रतिशत हो गया. पिछले वर्षों के दौरान बैंकिंग क्षेत्र में प्रगति हुई, लेकिन सीडी रेश्यो कम हो गया.

राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के 68वें रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 की प्रथम तिमाही में निजी क्षेत्र के बैंकों का सीडी रेश्यो 78.65 प्रतिशत रहा. जबकि, सरकारी क्षेत्र के बैंकों का सीडी रेश्यो केवल 39.92 फीसदी रहा. इस अवधि में राज्य के सभी बैंकों का औसत सीडी रेश्यो 56.40 प्रतिशत रहा.

यह निर्धारित 60 प्रतिशत के सीडी रेश्यो से कम है. जून 2019 तक मुद्रा योजना के तहत 4,33,345 खातों में कुल 1713.93 करोड़ रुपये की अदायगी की गयी. 2019-20 के प्रथम तिमाही में 22 लाभार्थियों में 21 महिलाएं थीं. 2019 तक जन-धन योजना के तहत 1.25 करोड़ खाते खोले गये. जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 91 लाख और शहरी क्षेत्रों में 21 लाख खोले गये.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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