मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के लाभुकों का बनेगा स्मार्ट कार्ड, मुफ्त में कर सकेंगे यात्रा, जानें आवेदन का तरीका

Published by : Sameer Oraon Updated At : 28 Jun 2024 4:42 PM

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स्मार्ट कार्ड लाभुकों की पूरे राज्य में अनुमानित संख्या 80 से 82 लाख होगी. इस योजना के तहत बस संचालकों को वाहन खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है.

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रांची : मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने रांची के मोरहाबादी मैदान में ग्राम गाड़ी योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत ग्रामीण चलने वाली बसों को सरकार की तरफ से सब्सिडी मिलेगी. अब खबर आ रही है कि इस योजना का मुफ्त लाभ उठाने के लिए तय लाभुकों का स्मार्ट कार्ड बनेगा. इसके लिए योजना प्राधिकार समिति ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है. अब राज्य परिवहन विभाग प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजेगा. मंजूरी के बाद स्मार्ट कार्ड बना कर विभाग लाभुकों को देगा. विभाग का उद्देश्य है कि मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के तहत वाहनों पर यात्रा के दौरान लाभुको को कोई परेशानी नहीं हो.

इन लोगों को मिलेगा लाभ

परिवहन विभाग के अनुसार योजना के तहत छात्र-छात्राओं, झारखंड आंदोलनकारी, दिव्यांग, 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को लाभ मिलेगा. विभाग के अनुसार ऐसे लाभुकों की पूरे राज्य में अनुमानित संख्या 80 से 82 लाख होगी. इस योजना के तहत बस संचालकों को वाहन खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है. योजना के तहत चलनेवाले वाहनों को रोड टैक्स से 100 प्रतिशत छूट है.

पहले चरण में पांच वर्षों के लिए होगा प्रभावी

इसके अलावा 33 से 42 सीट वाले वाहनों के लिए 18 रुपये/किमी, 25 से 32 सीट के लिए 14.50 रुपये/ किमी, 13 से 25 सीट के लिए 10.50 रुपये/ किमी और सात से 12 सीट के लिए 7.50 रुपये/किमी सब्सिडी दी मिलेगी. प्रथम चरण में मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना पांच वर्षों के लिए प्रभावी होगा. योजना के तहत 250 वाहनों के संचालन पर वित्तीय वर्ष (2023-24) में विभाग पर 24 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा. अभी तक योजना के तहत 88 वाहन चल रहे हैं. वाहनों के परिचालन में अनियमितता पाये जाने पर विभाग कार्रवाई भी करेगा. सभी वाहन जीपीएस से लैस है. इसके जरिए वाहनों के परिचालन पर विभाग नजर रखता है.

क्या है मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना

ग्राम गाड़ी योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन कुछ माह पहले किया था. सरकार का इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य पंचायतों को अनुमंडल से और अनुमंडल को जिला मुख्यालय से जोड़ने की थी, ताकि गांव के बच्चे-बच्चियां उच्च शिक्षा के लिए गांव से निकल कर मुख्यालय तक नि:शुल्क आसानी से पहुंच सकें. इसके अलावा दिव्यांग, आंदोलनकारी, बुजुर्गों आदि को भी मुफ्त में बस सुविधा मिले. खर्च का वहन विभाग द्वारा किया जाएगा.

कितने वर्षों के लिए वाहनों के परमिट दिया गया है

ग्राम गाड़ी के तहत चलने वाले वाहनों के लिए अधिकतम 5 वर्षों के परमिट जारी किया गया है. वाहनों को परमिट मिलने के बाद उनके संतोषजनक परिचालन पर उनका परमिट फिर से 5 वर्षों के लिए बहाल किया जाएगा. परमिट शुल्क एक रुपया है. जबकि आवेदन करने पर अतिरिक्त 1 रुपया लगेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले इन वाहनों को सरकारी बस स्टैंड में प्राथमिकता दी जाएगी. वाहनों के पचिचालन में अगर वाहन मालिकों द्वारा किसी प्रकार की अनियमित्तता बरती जाती है तो उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी.

कैसे किया जा सकता है आवेदन

ग्राम गाड़ी योजना के तहत वाहनों के परिचालन के लिए आवेदन जिला परिवहन पदाधिकारी को देना होगा. जरूरी कागजात के अलावा 10 हजार रुपये की बैंक गारंटी भी देना होगा. आवेदन के निष्पादन के बाद तत्काल बैंक गारंटी आवेदक को लौटा दिया जायेगा. आवेदन में ग्रामीण मार्गों का उल्लेख करना आवश्यक होगा. उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी आवेदनों पर अंतिम निर्णय लेगी. उप परिवहन आयुक्त सह सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार सदस्य, जिला परिवहन पदाधिकारी सदस्य सचिव, उपायुक्त द्वारा नामित अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित जाति के पदाधिकारी सदस्य होंगे. साथ ही संबंधित बैंक, वित्तीय संस्थान के एलडीएम सदस्य होंगे.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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