Ranchi news : मंत्री-विधायकों की नहीं, किसानों के हितों की चिंता करें बैंक : वित्त मंत्री

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Feb 2025 8:10 PM

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राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 90वीं बैठक में दिसंबर तिमाही के नतीजों की हुई समीक्षा. वित्त मंत्री ने कहा कि नीति तैयार करने से पहले बैंकों को सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए.

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रांची. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की बैंकिंग नीति पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि नीति तैयार करने से पहले बैंकों को सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए, लेकिन मौजूदा दौर में राज्य में अन्नदाताओं से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जुड़े खातों पर सात प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जाता है. जबकि, मंत्री-विधायकों को जो वाहन ऋण दिया जाता है, उसकी ब्याज दर चार प्रतिशत है. यह कितना न्यायसंगत है, इस पर बैंकों को गहनता से विचार करना चाहिए.

मंत्री ने जतायी चिंता

उन्होंने नीति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब हम किसानों की बेहतरी की बात करते हैं और उनके लिए सरकार विकास संबंधी योजना बनाती है, तो ऐसे में बैंकों का भी यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह किसानों को राहत देने के लिए योजना तैयार करने में सरकार की मदद करें. वित्त मंत्री ने उक्त बातें राज्य के वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों से कही. वे शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन स्थित सभागार में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 90वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे.

किसी भी राज्य के विकास में बैंकों का अहम योगदान

वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में बैंकों का अहम योगदान है. राज्य गठन के बाद बैंकों की विकास में कैसी भूमिका रही है, इसकी ईमानदारी के साथ समीक्षा होनी चाहिए. साथ ही आगे कैसे बेहतर हो, इसकी कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए. इस मौके पर एसएलबीसी की पुस्तिका के साथ ही नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया गया. इस दौरान दिसंबर तिमाही के नतीजों की भी समीक्षा की गयी, जिसमें सीडी रेशियो में मामूली वृद्धि देखी गयी.

कृषि मंत्री ने कोलैटरल फ्री लोन देने पर दिया जोर

बैठक में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बिना बंधक के (कोलैटरल फ्री) लोन देने पर जोर दिया. उन्होंने बैंकों को अड़चनें दूर करने के लिए लैंड रेवेन्यू विभाग से समाधान दिलाने का भरोसा दिया. उन्होंने बैंक प्रमुखों से लैम्पस-पैक्स को वित्तीय संसाधन मुहैया कराने और कृषि क्षेत्र को जागरूक करते हुए ऋण प्रवाह बढ़ाने की जरूरत बतायी. बैठक में भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के निदेशक अंजनी कुमार ठाकुर, बैंक ऑफ इंडिया, प्रधान कार्यालय के कार्यपालक निदेशक सह राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति झारखंड के अध्यक्ष पीआर राजगोपाल, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन प्रसाद सिंह, नाबार्ड क्षेत्रीय निदेशक सुनील कृष्ण जहांगीरदार, बैंक ऑफ इंडिया प्रधान कार्यालय से मुख्य महाप्रबंधक अशोक कुमार पाठक, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, झारखंड के महाप्रबंधक मनोज कुमार सहित सभी बैंकों और राज्य सरकार के पदाधिकारी मौजूद थे.

बैंकों का ऋण-जमा अनुपात 1.80 प्रतिशत बढ़ा

राज्य में सितंबर तिमाही की तुलना में बैंकों का ऋण-जमा अनुपात 1.80 प्रतिशत बढ़ गया है. यानी राज्य के लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा कर्ज मिला. सितंबर तिमाही के दौरान यह 50.22% था, जो दिसंबर तिमाही के दौरान बढ़कर 51.13% हो गया है. हालांकि, इस पर भी वित्त मंत्री संतुष्ट नहीं दिखे और दक्षिण भारत के राज्याें (जहां ऋण-जमा अनुपात 120% के आसपास है) का उदाहरण देते हुए इसे यहां 80% के पार ले जाने की सलाह दी.

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