Jharkhand: बाबूलाल मरांडी के दलबदल मामले पर आठ माह से फैसला सुरक्षित, प्रदीप-बंधु पर अब भी सुनवाई जारी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 May 2023 7:02 AM
वर्ष 2020 के फरवरी में बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी जेवीएम का भाजपा में विलय कर दिया था. भाजपा के राष्ट्रीय नेता अमित शाह की मौजूदगी में जेवीएम का विलय हुआ था.
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो के न्यायाधिकरण में अगस्त 2022 को बाबूलाल मरांडी के दलबदल मामले की सुनवाई पूरी हो गयी थी. इसके बाद पिछले आठ महीने से न्यायाधिकरण ने फैसला सुरक्षित रखा हुआ है. श्री मरांडी के खिलाफ वर्ष 2020 में दलबदल का मामला स्पीकर के न्यायाधिकरण में आया. कोरोना संक्रमण काल के दौरान स्पीकर ने इस मामले की सुनवाई की. इस मामले में आरोप के 10 बिंदुओं पर सुनवाई हुई थी. स्पीकर के न्यायाधिकरण में कई दौर की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. पिछले आठ महीने से इस मामले पर सुनवाई सुरक्षित है. श्री मरांडी के खिलाफ 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल करने का आरोप दिसंबर 2020 में लगा था.
विधानसभा अध्यक्ष ने दलबदलरोधी कानून के तहत स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी. इसके बाद इस मामले में माले के पूर्व विधायक राजकुमार यादव, कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह, झामुमो विधायक भूषण तिर्की, विधायक प्रदीप यादव व तत्कालीन विधायक बंधु तिर्की ने स्पीकर के पास बाबूलाल मरांडी के दलबदल करने का आरोप लगाते हुए मामला चलाने का आग्रह किया था.
फरवरी 2020 में बाबूलाल ने जेवीएम का भाजपा में किया था विलय : वर्ष 2020 के फरवरी में बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी जेवीएम का भाजपा में विलय कर दिया था. भाजपा के राष्ट्रीय नेता अमित शाह की मौजूदगी में जेवीएम का विलय हुआ था. उधर झाविमो से चुन कर आये विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी. इसके बाद श्री मरांडी ने श्री यादव व श्री तिर्की को पार्टी से निलंबित कर दिया था.
झाविमो से कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद स्पीकर के न्यायाधिकरण में विधायक प्रदीप यादव व तत्कालीन विधायक बंधु तिर्की के खिलाफ भी दलबदल की शिकायत की गयी. इन दोनों के खिलाफ भाजपा नेताओं ने स्पीकर से शिकायत की थी. हालांकि श्री तिर्की की सदस्यता कोर्ट द्वारा दो साल की सजा सुनायी जाने के बाद चली गयी. विधायक प्रदीप यादव के खिलाफ चल रहे दलबदल मामले की सुनवाई भी स्पीकर कर रहे हैं. इस मामले में सुनवाई अब तक पूरी नहीं हुई है.
भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष मुख्यमंत्री के इशारे पर मामला लटका कर बैठे हैं. भाजपा ने अपने विधायक दल का नेता चयन कर विधानसभा सचिवालय को विधिसम्मत सूचना दी है. जहां तक जेवीएम का भाजपा में विलय का सवाल है, चुनाव आयोग ने अपने निर्णय में सारी स्थिति स्पष्ट कर दी है.
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसने विलय को मान्यता देते हुए दो बार उन्हें राज्यसभा चुनाव में भाजपा विधायक के रूप में मत देने का अधिकार दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा नेता विधायक दल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं देना राज्य सरकार के इशारे पर एक राजनीतिक साजिश है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि नेता प्रतिपक्ष की अनुशंसा से लोकायुक्त का चयन हो, सूचना आयुक्त का चयन हो. इन संस्थाओं का गठन हो जायेगा, तो राज्य सरकार की नाकामी उजागर होगी. लोकायुक्त के माध्यम से भ्रष्टाचार की जांच होगी, इससे सरकार भाग रही है.
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