रांची: झारखंड जनजातीय सहकारी विकास निगम (जेटीसीडीसी) के कर्जदारों ने निगम से कहा है कि यदि उनका ब्याज माफ कर दिया जाये, तो वह निगम से ली गयी पूंजी लौटाने को तैयार हैं. रांची में निगम के सौ से अधिक कर्जदारों ने जिला शाखा में बकायदा आवेदन देकर यह कहा है. अब उस मुद्दे पर फैसला निगम का बोर्ड करेगा.
इससे पहले भी यह मुद्दा उठा था तथा निगम के अधिकारियों ने यह तर्क दिया था कि इससे डूब चुके पैसे में से कम से कम मूलधन की वापसी हो जायेगी. इस पर कल्याण विभाग के वरीय अधिकारियों ने इस संबंध में व्यावसायिक बैंकों के नियम व शर्तों का अध्ययन कर रिपोर्ट देने को कहा था. दरअसल राज्य गठन से लेकर अब तक निगम ने छह फीसदी ब्याज दर से 22.45 करोड़ रुपये का ऋण विभिन्न समुदायों के युवा बेरोजगारों को बांटा है. वहीं इसके विरुद्ध अब तक इसका आधा करीब 11.04 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है.
इस तरह निगम का करीब 11 करोड़ रुपये सिर्फ मूलधन फंसा हुआ है. जेटीसीडीसी पहले एसटी, एससी, ओबीसी, विकलांग तथा अल्पसंख्यक समुदाय के बेरोजगार युवाओं को ऋण देता था. पर 2008 में अनुसूचित जाति विकास निगम तथा 2012 में अल्पसंख्यकों के लिए वित्तीय विकास निगम के गठन के बाद एससी व अल्पसंख्यकों को ऋण देना बंद कर दिया गया है. इसलिए ऋण व वसूली के आंकड़े में एससी व अल्पसंख्यकों को पहले दिये गये ऋण या इसकी वसूली शामिल नहीं हैं.

