रांची: पूर्व विधायक और भाजपा नेता सरयू राय ने आरोप लगाया है कि चारा घोटाले के अभियुक्त बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद एक सोची समझी साजिश के तहत न्याय प्रक्रिया को लंबा खींचने का प्रयास कर रहे हैं. इसके लिए वह प्रावधानों का दुरुपयोग कर रहे हैं. श्री राय गुरुवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश की अदालत में चारा घोटाले से संबंधित आठ मामलों में ट्रायल चल रहा है. इसमें से पांच मामलों में लालू प्रसाद अभियुक्त हैं.
चारा घोटाले की कांड संख्या आरसी 20 ए/ 1996 में अदालत ने फैसले के लिए 15 जुलाई की तिथि तय कर दी है. इस दिन लालू प्रसाद समेत अन्य अभियुक्तों को हाजिर होने को कहा गया है. श्री राय ने कहा कि जब से डॉ आरके राणा और ध्रुव भगत को सजा हुई है, तब से श्री प्रसाद विचलित हो गये हैं. वह कोशिश कर रहे हैं कि आरसी 20 ए/1996 के फैसले में जितना विलंब कराया जा सके, उतना कराया जाये. यही वजह है कि दो दिन पूर्व उन्होंने झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर की है. साथ ही सीबीआइ के संबंधित विशेष न्यायालय के न्यायाधीश की निष्पक्षता पर उन्होंने सवाल खड़ा किया है. वह चाहते हैं कि उनका मुकदमा दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित हो जाये, ताकि मुकदमे की सुनवाई नये सिरे से हो और फैसला आने में साल-दो साल की देरी हो जाये.
चार बार फैसले में देरी कराने का किया है प्रयास : श्री राय ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है, जब लालू प्रसाद ने फैसले में देरी के लिए सुनियोजित साजिश की हो. इससे पहले भी उन्होंने चार बार इस मुकदमे की सुनवाई में देरी करने की सफल-असफल कोशिश की और हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. पहली बार उन्होंने सीबीआइ के कनीय अधिकारियों डीएन विश्वास और विमल कुमार की गवाही और बहस पूरी हो जाने के बाद फिर से उनका परीक्षण कराने के लिए हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस कारण मुकदमों की सुनवाई में कुछ विलंब हुआ, पर श्री प्रसाद अपनी साजिश में सफल नहीं हो पाये.
इसके बाद उन्होंने तीन बार अलग-अलग मामलों में याचिका दायर की. अगर इस मामले में विलंब नहीं हुआ होता, तो अप्रैल 2012 में ही फैसला हो जाता.
सीबीआइ और इनकम टैक्स ने भी दिया है साथ : सरयू राय ने कहा कि लालू प्रसाद पटना हाइकोर्ट में भी मामले को बाधित और विलंबित करने का प्रयास कर चुके हैं. आय से अधिक संपत्ति मामले में एक न्यायाधीश योगेंद्र प्रसाद को हटवाने में सफल हो चुके हैं. इस मुकदमे में सीबीआइ ने लालू के पक्ष में फैसला आने के खिलाफ अब तक अपील नहीं की है. उन्होंने आरोप लगाया कि आय से अधिक संपत्ति मामले में भी श्री प्रसाद मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार को समर्थन देने के एवज में आयकर विभाग के फैसले को पलटवा चुके हैं.
रेल मंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने दक्षिण भारत के एक ऐसे अधिकारी को पटना में अपील कमिश्नर के पद पर नियुक्त करा दिया, जो 15 दिन बाद रिटायर हो रहा था. उक्त अधिकारी ने रिटायर होने से पहले सैकड़ों लंबित मामले को छोड़ कर लालू प्रसाद के मामले की सुनवाई की और उनके पक्ष में फैसला देकर रिटायर हो गये. आयकर विभाग ने भी इस फैसले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. इससे साबित होता है कि सीबीआइ और आयकर विभाग भी लालू को मदद की थी.
सीबीआइ जज को स्थानांतरित कराने का भी हो रहा है प्रयास : श्री राय ने कहा कि लालू प्रसाद प्रयास कर रहे हैं कि उनके मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश का तबादला हो जाये. हाल ही में 22 अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय ने अंतिम निर्णय आने तक झारखंड में पदस्थापित करने का निर्देश दिया था.
श्री प्रसाद इन 22 न्यायाधीशों की पदस्थापना के निर्णय का उपयोग एक अवसर के रूप में कराना चाह रहे हैं. श्री राय ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद ने झारखंड सरकार के दो वरीय अधिकारियों को फोन कर दवाब डाला है कि इन 22 जजों की पुन: नियुक्ति की अधिसूचना शीघ्र कार्मिक विभाग से जारी करा दें ताकि इनकी पदस्थापना के बहाने सीबीआइ कोर्ट में विशेष न्यायाधीश को बदलने का अवसर मिल जाये.

