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Monsoon 2020: झारखंड के 17 जिलों में हुई है सामान्य से कम बारिश, जानें, आपके जिला में कितना बरसा मानसून 2020

Updated at : 12 Aug 2020 6:24 PM (IST)
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Monsoon 2020: झारखंड के 17 जिलों में हुई है सामान्य से कम बारिश, जानें, आपके जिला में कितना बरसा मानसून 2020

Jharkhand News, Monsoon 2020, Rain in Jharkhand: झारखंड में लगातार हो रही वर्षा के बावजूद कम से कम 17 जिले ऐसे हैं, जहां पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. तीन जिलों (गुमला, देवघर और खूंटी) में 40 से 52 फीसदी तक कम वर्षा हुई है. गुमला जिला में आमतौर पर 1 जून, 2020 से 12 अगस्त, 2020 की सुबह 8 बजे तक 703 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस वर्ष इस अवधि में मात्र 339.1 फीसदी बारिश हुई. यह सामान्य वर्षापात से 52 फीसदी कम है. राज्य में इस वक्त तक सबसे कम वर्षा गुमला में ही हुई है.

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रांची : झारखंड में लगातार हो रही वर्षा के बावजूद कम से कम 17 जिले ऐसे हैं, जहां पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. तीन जिलों (गुमला, देवघर और खूंटी) में 40 से 52 फीसदी तक कम वर्षा हुई है. गुमला जिला में आमतौर पर 1 जून, 2020 से 12 अगस्त, 2020 की सुबह 8 बजे तक 703 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस वर्ष इस अवधि में मात्र 339.1 फीसदी बारिश हुई. यह सामान्य वर्षापात से 52 फीसदी कम है. राज्य में इस वक्त तक सबसे कम वर्षा गुमला में ही हुई है.

बाबा नगरी देवघर में इस वर्ष सामान्य से 47 फीसदी कम वर्षा हुई है, तो राजधानी रांची से सटे उग्रवाद प्रभावित जिला खूंटी में 40 फीसदी कम बरसा है मानसून. तीन जिलों (पाकुड़, साहिबगंज और सरायकेला-खरसावां) में 30 फीसदी से कम वर्षा हुई है. पाकुड़ में 12 अगस्त तक आमतौर पर 713 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि हुई है मात्र 456.3 मिलीमीटर. यह सामान्य से 36 फीसदी कम वर्षा है.

साहिबगंज में सामान्य से सामान्य वर्षा 756 मिमी की तुलना में 502.2 मिमी वर्षा हुई है. यह सामान्य से 34 फीसदी कम है. कोल्हान प्रमंडल के सरायकेला-खरसावां जिला में 662.5 मिमी के मुकाबले इस वर्ष सिर्फ 452.6 मिमी वर्षा अब तक हुई है. यह सामान्य से 32 फीसदी कम है.

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राज्य के 5 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 20 फीसदी और उससे कम वर्षा हुई है. बोकारो जिला में सामान्य से 23 फीसदी कम वर्षा हुई है, तो चतरा में 24 और पश्चिमी सिंहभूम में 23 फीसदी कम बारिश हुई है. इसी तरह, 5 जिलों में मानसून के दौरान अब तक 20 फीसदी से कम वर्षा हुई है. ऐसे जिलों में सिमडेगा, रांची, गोड्डा, गिरिडीह और धनबाद जिला शामिल हैं.

रांची में मानसून के दौरान 12 अगस्त तक 664.8 मिमी वर्षा होती है, जबकि इस वर्ष 575.3 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 13 फीसदी कम है. सिमडेगा में 816.5 मिमी के मुकाबले वास्तविक वर्मा 658.1 मिमी मापी गयी है, जो मानसून के दौरान होने वाली सामान्य वर्षा से 19 फीसदी कम है. गोड्डा में अब तक 17 फीसदी कम बरसा है मानसून. यहां 12 अगस्त तक 566.1 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि वास्तविक वर्षा 472.1 मिमी मापी गयी है.

कोयला नगरी धनबाद की बात करें, तो यहां 14 फीसदी कम वर्षा इस साल हुई है. यहां 661.9 मिमी वर्षा को सामान्य वर्षापात माना जाता है. इस वर्ष यहां 569.1 मिमी वर्षा हुई है, जो बारिश में 14 फीसदी कमी दर्शाता है. इसी तरह, गिरिडीह में भी 14 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गयी है. यहां मानसून में 12 मार्च तक आमतौर पर 605.3 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि वास्तविक वर्षा 522.5 मिमी ही हुई है.

झारखंड के तीन जिले ऐसे भी हैं, जहां 10 फीसदी से कम वर्षा हुई है. इन जिलों में गढ़वा, हजारीबाग एवं जामताड़ा जिला शामिल हैं. गढ़वा में सामान्य से 5 फीसदी कम वर्षा हुई है, तो हजारीबाग में 4 और जामताड़ा में 8 फीसदी कम वर्षा हुई है. हालांकि, 10 फीसदी की कमी-बेसी को सामान्य मानसून ही माना जाता है.

उधर, 7 ऐसे जिले हैं, जहां मानसून मेहरबान रहा. इन जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हुई है. ऐसे जिलों में दुमका, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, लोहरदगा, लातेहार, पलामू एवं रामगढ़ शामिल हैं. इन जिलों में 2 फीसदी से लेकर 32 फीसदी तक अधिक वर्षा हुई है. मानसून के दौरान सामान्य से सबसे अधिक वर्षा पलामू जिला में हुई. यहां मानसून की बारिश सामान्य से 32 फीसदी अधिक रही.

पलामू जिला में मानसून के दौरान 12 अगस्त तक आमतौर पर 512.2 मिमी वर्षा को सामान्य मानसून माना जाता है. वर्ष 2020 में इस जिला में अब तक 681.6 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य से 32 फीसदी अधिक है. इसी तरह लातेहार जिला पर भी इस बार मानसून मेहरबान है. यहां सामान्य वर्षापात 639.4 मिमी के मुकाबले 789.9 मिमी वर्षा हुई है, जो 24 फीसदी अधिक है.

अब बात करें, रामगढ़ जिला की, तो यहां 622.1 मिमी वर्षा को सामान्य मानसून माना जाता है. लेकिन, इस वर्ष यहां 755.3 मिमी वर्षा अब तक हो चुकी है, जो सामान्य से 21 फीसदी ज्यादा है. झारखंड की उप-राजधानी दुमका में भी इस साल ठीक-ठाक बारिश अब तक हुई है. यहां 692.8 मिमी वर्षा दर्ज की गयी है, जो सामान्य वर्षापात 643.7 मिमी के मुकाबले 8 फीसदी अधिक है.

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पूर्वी सिंहभूम में अब तक 5 फीसदी अधिक वर्षा हुई है. यहां 684.9 मिमी को सामान्य वर्षापात माना जाता है, लेकिन इस साल 716.8 मिमी वर्षा दर्ज की गयी है. कोडरमा और लोहरदगा में 2-2 फीसदी अधिक वर्षा हुई है. कोडरमा में सामान्य वर्षापात 517.6 मिमी के मुकाबले 527.7 मिमी वर्षा हुई है, तो लोहरदगा में 614.5 मिमी के मुकाबले 625.6 मिमी वर्षा हुई है.

इस तरह, राज्य के 24 में से 9 जिलों में सामान्य की तुलना में कम वर्षा हुई है. 7 जिलों में सामान्य वर्षा हुई है और यदि बाकी जिलों में आने वाले दिनों में अच्छी-खासी बारिश नहीं हुई, तो कई और जिले अल्पवृष्टि वाले जिलों में शामिल हो जायेंगे. कोडरमा, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और हजारीबाग ऐसे ही जिले हैं. कुल मिलाकर पूरे झारखंड में अब तक 14 फीसदी कम वर्षा हुई है.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि अप्रैल, 2020 में झारखंड सरकार ने सूबे के 7 जिलों (बोकारो, चतरा, पाकुड़, देवघर, गिरिडीह, गोड्डा और हजारीबाग) के 55 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया था. यदि मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो इस साल भी कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की नौबत आ जायेगी.

Posted By : Mithilesh Jha

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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