Ranchi news : गरीब व मध्यमवर्ग को कुछ मिले, तो उच्च तबका तिलमिला जाता है : स्पीकर

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पुणे में 14वां छात्र संसद संपन्न, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ भी हुए शामिल. स्पीकर ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, सब्सिडी, डायरेक्ट कैश ट्रांसफर आर्थिक लोकतंत्र के साधन हैं.

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रांची. विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने कहा है कि सामाजिक सुरक्षा योजना सौगात या रेवड़ी नहीं है. सामाजिक सुरक्षा देश और राज्य के संयुक्त संसाधन कोष से नागरिकों को दी जाती है. नागरिकों का इस पर पूरा अधिकार है. सामाजिक सुरक्षा के प्रति नकारात्मक छवि बनाने में समाज के अभिजात्य वर्ग लगे हैं. उद्योगपतियों को जब औने–पौने भाव में जमीन, टैक्स हॉलिडे या सब्सिडी मिलती रहे, तो सब ठीक है. लेकिन, अगर गरीब और निचले तबके व मध्यवर्ग के लोगों को कुछ राहत मिल जाये, तो उच्च तबका तिलमिला जाता है. सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, सब्सिडी, डायरेक्ट कैश ट्रांसफर आर्थिक लोकतंत्र के महत्वपूर्ण साधन हैं. स्पीकर श्री महतो पुणे में एमआइटी पीस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित 14वें छात्र संसद में रेवड़ी संस्कृति : आर्थिक बोझ या आवश्यक सहारा विषय पर बोल रहे थे. छात्र संसद में रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ भी पहुंचे थे.

स्पीकर ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा मानव क्षमता और राष्ट्रीय विकास में एक रणनीतिक निवेश है. महामारी के दौरान अमेरिकी सरकार ने अपने नागरिकों को कई सौ अरब डॉलर का आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज दिया था. बाइडन प्रशासन ने आर्थिक राहत प्रदान करने के लिए प्रति पात्र व्यक्ति को 1400 डॉलर का प्रोत्साहन चेक जारी किया था. बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान सभा में 25 दिसंबर 1949 को कहा था कि बिना समानता के स्वतंत्रता का मतलब होगा ज्यादातर लोगों पर चंद लोगों का प्रभुत्व’. बिना स्वतंत्रता के समानता का मतलब होगा व्यक्तिगत पहल के लिए गुंजाइश का न होना और बिना बंधुता के स्वतंत्रता और समानता स्वभाव का हिस्सा नहीं बन सकते.

दृढ़ता के साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय को साथ में जोड़ें

स्पीकर ने कहा कि समय आ गया है कि हम दृढ़ता के साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय को साथ में जोड़ें. हमारी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं हाशिए पर मौजूद वर्गों पर खर्च योग्य आय प्रदान करके अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करती हैं. जब लोगों के पास बुनियादी आर्थिक सुरक्षा होती है, तब वे शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में निवेश करते हैं. श्री महतो ने कहा कि मैं ऐसे राज्य से आता हूं, जो खनिज संपदा व वन संपदा से ही परिपूर्ण नहीं है, बल्कि हम पूरे देश में मानव बल के सबसे बड़े आधार के रूप में जाने जाते हैं. इसके बाद भी हमारा राज्य गरीब है. हमारे राज्य में लगभग 70 प्रतिशत लोग ठीक ढंग से मूलभूत जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान पाने के लिए जद्दोजहद में लगे हैं. ऐसे में राज्य सरकार ने एक ऐसी योजना का निर्माण किया, जो सामाजिक और आर्थिक समानता के दृष्टिकोण से सराहनीय है. हमारे युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना लागू की. राज्य में रहने वाली सभी गरीब महिलाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये दिये जाते हैं. दूसरे राज्यों में भी इसे लागू किया जा रहा है और ऐसे ही चुनावी वादे हो रहे हैं.

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