आधे-अधूरे भवनों से सीयूजे करेगा राष्ट्रपति का स्वागत, 500 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई थी भवन निर्माण की प्रक्रिया

Updated at : 20 Feb 2020 8:11 AM (IST)
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आधे-अधूरे भवनों से सीयूजे करेगा राष्ट्रपति का स्वागत, 500 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई थी भवन निर्माण की प्रक्रिया

रांची : झारखंड में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो तामझाम से शुरू तो होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे शिथिल हो जाते हैं. ऐसा ही एक मामला केंद्रीय विवि, झारखंड के नये परिसर का भी है. इस विवि की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी. यह राज्य का एकमात्र केंद्रीय विवि (सेंट्रल यूनिवर्सिटी अॉफ झारखंड या सीयूजे) […]

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रांची : झारखंड में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो तामझाम से शुरू तो होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे शिथिल हो जाते हैं. ऐसा ही एक मामला केंद्रीय विवि, झारखंड के नये परिसर का भी है.
इस विवि की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी. यह राज्य का एकमात्र केंद्रीय विवि (सेंट्रल यूनिवर्सिटी अॉफ झारखंड या सीयूजे) है, लेकिन इस विवि को अभी तक नया परिसर नहीं मिल पाया है. चेरी-मनातू में बन रहा नया परिसर 10 साल बाद भी अधूरा है. 2009 में 500 करोड़ की लागत से नये परिसर के निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू की गयी थी. 2009-10 में ही में सीयूजे के नये परिसर के लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच सहमति बनी थी.
इसके तहत 500 एकड़ जमीन विवि को उपलब्ध करानी थी. नये परिसर के लिए सरकार ने 360 एकड़ जमीन उपलब्ध तो करा दी, लेकिन शेष 140 एकड़ जमीन अब तक नहीं मिल पायी है. यह जमीन नये परिसर के बीच में है. इस रैयती जमीन पर कई परिवार घर बना कर रह रहे हैं.
हालांकि वर्ष 2013 में विधिवत रूप से केंद्रीय विवि के नये भवन की आधारशिला रखी गयी थी. सेंट्रल यूनिवर्सिटी अॉफ झारखंड के तत्कालीन कुलपति प्रो डॉ डीटी खटिंग ने 23 फरवरी 2013 को विवि परिसर की आधारशिला रखी थी. उसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया, जो आठ साल बीतने के बाद भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है. जमीन अधिग्रहण करने के लिए विवि ने कई बार सरकार से आग्रह किया, लेकिन जमीन विवि को नहीं मिल पायी. इस कारण चहारदीवारी भी नहीं हो पा रही है.
इस बीच विवि के नये परिसर के निर्माण में गड़बड़ी का मामला सीबीआइ को सौंप दिया गया. फलस्वरूप निर्माण कार्य रुक गया. उस वक्त विवि के कुलपति डॉ डीटी खटिंग थे. हालांकि सीबीआइ ने वर्ष 2018 में क्लीन चिट देते हुए विवि को नये परिसर का निर्माण शुरू करने की स्वीकृति प्रदान कर दी. इसके बाद पुन: निर्माण कार्य शुरू हुआ.
बन कर तैयार है अकादमी भवन और पुस्तकालय भवन का ढांचा
नये परिसर में निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं. कुछ जमीन अधिग्रहण करने का मामला लंबित है. इसको लेकर सरकार से अनुरोध किया गया है. जमीन मिल जाने पर कार्य में और तेजी आयेगी. लगभग 10 साल से भवन का निर्माण कार्य चल रहा है. विवि प्रयासरत है कि जल्द से जल्द नये परिसर में विवि शिफ्ट हो जाये. इसके लिए वर्तमान कुलपति भी काफी सक्रिय हैं. डॉ एसके पांडेय, अध्यक्ष, निर्माण कमेटी
निर्माण कार्य दो फेज में करने पर सहमति बनी
निर्माण कार्य दो फेज में करने पर सहमति बनी. पहले फेज में विवि के एकेडमिक, एडमिनिस्ट्रेटिव भवन, लाइब्रेरी व हॉस्टल निर्माण तथा सेंट्रल स्कूल बिल्डिंग का काम शुरू हुआ. अब तक एकेडमिक बिल्डिंग का काम लगभग 50 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है, जबकि एडमिनिस्ट्रेटिव भवन के दो भाग में एक भाग 95 प्रतिशत पूरा हुआ है, जबकि दूसरा भाग अभी शुरू नहीं हो पाया है.
इसी प्रकार लाइब्रेरी भवन का कार्य 50 प्रतिशत भी नहीं हो पाया है, जबकि 500-500 बेड के दो ब्यॉज हॉस्टल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. 500 बेड के एक गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण कार्य लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है. परिसर में ही एक सेंट्रल स्कूल (जी प्लस थ्री) भी बन रहा है.
इसमें विवि के कर्मियों व अधिकारियों के बच्चों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बच्चे भी पढ़ सकेंगे. नये परिसर में सेकेंड फेज में स्टाफ क्वार्टर, शिक्षक क्वार्टर, वीसी व प्रोवीसी कोठी आदि का निर्माण करना है. सरकार व विवि प्रशासन के दांव-पेंच में करोड़ों का यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है. ब्रांबे परिसर में देश व विदेश के विद्यार्थी किसी तरह अपनी पढ़ाई पूरी कर पा रहे हैं. नये परिसर की स्थिति यह है कि चार विशाल साइलेंट जेनरेटर खरीद कर कैंपस में खुले आसमान के नीचे रख दिया गया है. टेबल-बेंच भी खरीद लिया गया है. परिसर के बाहर स्थित पहाड़ से पत्थर काटे जा रहे हैं.
युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है स्कूल बिल्डिंग के अधूरे हिस्से का निर्माण
कैंपस में स्कूल अॉफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी बिल्डिंग (जी प्लस थ्री) का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. इसमें 82 कमरे हैं. क्लास रूम बन कर तैयार है.
इसमें लगाये गये सूचना पट्ट के अनुसार, स्कूल अॉफ नेचुरल साइंस, स्कूल अॉफ लैंग्वेजेज, हिंदी व अंग्रेजी विभाग आदि शुरू होगा. वहीं बिल्डिंग के दूसरे अधूरे हिस्से को युद्ध स्तर पर तैयार किया जा रहा है, ताकि उसका उदघाटन कराया जा सके. बताया गया कि संवेदक राज कंस्ट्रक्शन व जेसी इंटरप्राइजेज को बिल्डिंग का काम मिला था. उस बिल्डिंग के सामने खेल का मैदान बनाया गया है.
धीमी गति से हो रहा भवन का कार्य
सीयूजे का मुख्य प्रशासनिक भवन भी अधूरा है. कैंपस की सबसे ऊंची जगह पर बनाये जा रहे प्रशासनिक भवन के एक हिस्से में कुछ कमरे की फिनिशिंग कर दी गयी है. भवन में निर्माण कार्य की गति काफी धीमी है. एक हिस्से में काम नहीं हो रहा है. जिस गति से यहां कार्य किया जा रहा है, उससे लगता है अगले आठ साल में भी पूरा नहीं हो पायेगा. इस भवन के कमरे में टेबल-बेंच रखे गये हैं. दरवाजे पर ताला लगा हुआ है. वहीं एकेडमी बिल्डिंग, लाइब्रेरी अधूरा पड़ा है. लाइब्रेरी बिल्डिंग को पूरा करने के लिए मजदूर लगाये गये हैं.
पहला दीक्षांत समारोह नये परिसर में ही
नये परिसर में चहारदीवारी नहीं होने से ब्रांबे से विवि के विभाग को शिफ्ट करने में भी दिक्कत हो रही है. फरवरी माह में आठ विभाग को ब्रांबे से शिफ्ट करने का प्रस्ताव एक बार फिर टल गया है. अब इन विभाग को छह मार्च 2020 को शिफ्ट करने की योजना बनी है.
विवि प्रशासन ने नये परिसर में ही मार्च में पहला दीक्षांत समारोह मनाने का निर्णय लिया है. इस समारोह में भारत के राष्ट्रपति के आने की संभावना है. नये परिसर में एक हजार क्षमता वाले अत्याधुनिक सभागार का निर्माण नहीं हो पाया है. ऐसी स्थिति में दीक्षांत समारोह मैदान में ही करने की योजना बनायी गयी है.
दो छात्रावास बन कर हैं तैयार
नये परिसर में छात्रों के लिए अलग-अलग जगहों पर चार-चार फ्लोर का पांच छात्रावास बनाया जा रहा है. इसमें से दो छात्रावास पूरी तरह से बन कर तैयार हो गया है. कमरों में ताला लगा हुआ है. तीन छात्रावास का निर्माण कार्य अभी अधूरा है. वहीं बहुमंजिली गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग के निर्माण को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
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