ट्रायल हुआ नहीं, बना दी फुटबॉल टीम, देश के बड़े टूर्नामेंट में खेलने भेजा

Updated at : 20 Feb 2020 7:12 AM (IST)
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ट्रायल हुआ नहीं, बना दी फुटबॉल टीम, देश के बड़े टूर्नामेंट में खेलने भेजा

सुनील कुमार रांची : झारखंड में खेल विभाग की इकाई स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ झारखंड (साझा) अपने नये कारनामे को लेकर चर्चा में है. साझा ने देश के बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट (अंडर-18 यूथ फुटबॉल लीग, जिसका आयोजन अकादमी या क्लब के खिलाड़ियों के प्रोमोशन के लिए होता है) में अपनी टीम भेजी है. चौंकानेवाली बात यह […]

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सुनील कुमार
रांची : झारखंड में खेल विभाग की इकाई स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ झारखंड (साझा) अपने नये कारनामे को लेकर चर्चा में है. साझा ने देश के बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट (अंडर-18 यूथ फुटबॉल लीग, जिसका आयोजन अकादमी या क्लब के खिलाड़ियों के प्रोमोशन के लिए होता है) में अपनी टीम भेजी है.
चौंकानेवाली बात यह है कि साझा की यह टीम भी बगैर किसी ट्रायल के तैयार की गयी है. इस टीम ने अब तक दो मैच भी खेले हैं, जिसमें उन्हें हार मिली है. 15 फरवरी को खेले गये पहले मैच में साझा की टीम को कटक (ओड़िशा) की एफएओ अकादमी ने 1-0 से, जबकि बुधवार (19 फरवरी) को दूसरे मैच में धनबाद फुटबॉल अकादमी ने 2-0 से पराजित किया.
आनन-फानन में सीआरएस भी करा लिया : ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआइएफएफ) की ओर से आयोजित अंडर-18 यूथ फुटबॉल लीग में भेजी गयी साझा की यह टीम आनन-फानन में तैयार की गयी. 30 खिलाड़ियों का सीआरएस (सेंट्रलाइज्ड रजिस्ट्रेशन सिस्टम) भी करा लिया गया. इसके लिए साझा की ओर से ट्रायल भी नहीं लिया गया. इससे राज्य के फुटबॉलरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिला.
किसी जिले में नहीं हुआ ट्रायल : साझा ने किसी भी जिले में ट्रायल नहीं कराया. सूत्रों की मानें, तो झारखंड में खुलनेवाले फुटबॉल के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए हुए ट्रायल में जिन खिलाड़ियों का चयन हुआ था, साझा ने उन्हीं से टीम बना दी.
नियमत: इतने बड़े टूर्नामेंट में खेलने के लिए साझा को हर जिला में ओपन ट्रायल का आयोजन करना चाहिए था, ताकि डिस्ट्रिक्ट, स्टेट के अलावा अन्य प्रतिभावान खिलाड़ी ट्रायल में भाग लेकर टीम में जगह बनाते.
साझा को उठाना होगा टीम का खर्च : टूर्नामेंट में खेलने के लिए सारा खर्च साझा को ही वहन करना है. जैसे खिलाड़ियों के लिए जर्सी, कोच, फिजियो, डॉक्टर की फीस के अलावा खिलाड़ियों के रहने, खाने, मैच खेलने को लेकर ग्राउंड तक आने-जाने, होटल व अन्य खर्च. टूर्नामेंट में सरकार के लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान है, क्योंकि एआइएफएफ सिर्फ टेक्निकल ऑफिशियल और रेफरी का भुगतान करता है. शेष सारा खर्च टीमों को खुद उठाना पड़ता है.
एक ही जोन में है झारखंड और ओड़िशा की टीमें
टूर्नामेंट में शामिल टीमों को सात जोन में बांटा गया है. झारखंड और ओड़िशा की टीमों को एक ही जोन में जगह दी गयी है. इस जोन में धनबाद फुटबॉल अकादमी, स्पोर्ट्स हॉस्टल ओड़िशा, एफएओ अकादमी कटक ओड़िशा, सेल फुटबॉल अकादमी बोकारो, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ झारखंड (साझा) और जमशेदपुर एफसी को जगह दी गयी है.
क्या है एलीट फुटबॉल टूर्नामेंट
ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआइएफएफ) राज्यों में जूनियर स्तर के खिलाड़ियों के प्रमोशन के लिए अंडर-18 एलीट यूथ लीग, अंडर-15 जूनियर लीग आैर अंडर-13 सब जूनियर लीग का आयोजन करता है. इन लीग में खिलाड़ियों को ज्यादा-से-ज्यादा मैच खेलने का मौका मिलता है. एआइएफएफ इन खिलाड़ियों का डाटा भी रखता है, ताकि प्रदर्शन के आधार पर सीनियर लेवल पर उन्हें मौका मिल सके.
खेल में खेल
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ झारखंड (साझा) का कारनामा
अभी मैं रांची से बाहर हूं. इस संबंध में कुछ नहीं बता सकता. हालांकि, जब टीम का चयन किया गया था, तब रणेंद्र कुमार और वेद रत्न प्रभार में थे. इस बारे में वही बेहतर बता सकते हैं.
अनिल कुमार सिंह, खेल निदेशक
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