रांची : झाड़-झंखाड़ में गुम हो गया 100 करोड़ का झारखंड मेगा फूड पार्क
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Feb 2020 6:25 AM
11 वर्ष पहले गेतलसूद में किया गया था शिलान्यास 15 फरवरी 2016 को पार्क का किया गया था उदघाटन रांची : गेतलसूद में 100 करोड़ से बने झारखंड मेगा फूड पार्क अब झाड़ियों में डूब गया है. खुलने के पहले ही यह बदहाल हो गया है. 11 वर्ष पहले इस मेगा फूड पार्क का शिलान्यास […]
11 वर्ष पहले गेतलसूद में किया गया था शिलान्यास
15 फरवरी 2016 को पार्क का किया गया था उदघाटन
रांची : गेतलसूद में 100 करोड़ से बने झारखंड मेगा फूड पार्क अब झाड़ियों में डूब गया है. खुलने के पहले ही यह बदहाल हो गया है. 11 वर्ष पहले इस मेगा फूड पार्क का शिलान्यास किया गया था. शिलान्यास के सात वर्ष बाद वर्ष 2016 में इसका उदघाटन किया गया, पर उदघाटन के कुछ दिनों बाद ही मेगा फूड पार्क बंद हो गया. अब वहां घास और झाड़ियों का मैदान बनता जा रहा है. मशीनें सड़ रही हैं. कोल्ड स्टोरेज बर्बाद हो गया है. जगह-जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आयी हैं. मेगा फूड पार्क के बैंकरप्ट होने के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने इसे अपने कब्जे में ले लिया हैं.
झारखंड मेगा फूड पार्क के बोर्ड अॉफ डायरेक्टर्स के सारे अधिकार जब्त कर लिये गये हैं. एनसीएलटी द्वारा कोलकाता के नीरज अग्रवाल को इंटरिम रिज्यूलेशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया गया है. वही अब दिवालिया समाधान की प्रक्रिया शुरू करेंगे. उनके द्वारा मेगा फूड पार्क में नोटिस भी चिपका दिया गया है.
25 हजार किसानों को होता लाभ
मेगा फूड पार्क का जब प्रस्ताव तैयार किया गया था, तब कहा गया था कि 5700 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेंगे. 10 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे. साथ ही 25 हजार किसानों को इससे लाभ होगा. मेगा फूड पार्क द्वारा 646 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर का का अनुमान लगाया गया था.
निदेशक मंडल में के रविकुमार और दीपंकर पांडा भी थे : मेगा फूड पार्क का प्रमोटर झारखंड मेगा फूड पार्क लिमिटेड है. इसके निदेशकों में अलिरजा अफजल थावर (कार्यकारी निदेशक), निश्छल नवल मेहता, अभिजाग घाग, दीपंकर पंडा व तत्कालीन उद्योग सचिव के रवि कुमार भी शामिल हैं. एनसीएलटी ने निदेशकों के सारे अधिकार जब्त कर लिये हैं.
खंडहर हो रहे हैं दो वेयर हाउस
मेगा फूड पार्क के अंदर दो वेयर हाउस है, जो खंडहर में तब्दील हो रहे हैं.जहां-तहां प्लास्टर उखड़ रहा है. वर्कर हॉस्टल भी खंडहर हो चुका है. प्रशासनिक भवन वीरान पड़ा है. वे ब्रिज भी बना हुआ है. चार कोल्ड स्टोरेज भी हैं, जो जहां-तहां से टूट रहे हैं. इसमें एसी भी लगा हुआ है, पर कभी चालू नहीं हुआ. एक फूड टेस्टिंग लैब भी बना हुआ है, पर इसमें उपकरण नहीं लगाये गये हैं. वहीं एक पंप हाउस और वाटर स्टोरेज का भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
गार्ड को 13 माह से वेतन नहीं
मेगा फूड पार्क में दो फ्रीजर वैन समेत 10 ट्रक भी गोदाम में पड़े हुए हैं. कई मशीनें और लोडर भी बेकार पड़े हुए हैं. आठ गार्ड इसकी निगरानी में हैं. गार्ड बताते हैं कि पिछले 13 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है. केवल इस उम्मीद से काम कर रहे हैं कि जब यह खुलेगा, तो सबकुछ सामान्य हो जायेगा. बैंक ने वेतन का
आठ करोड़ से बना पावर सब स्टेशन बेकार
मेगा फूड पार्क की यूनिट और आसपास के गांवों में बिजली आपूर्ति के लिए आठ करोड़ की लागत से पावर सब स्टेशन बनाया गया था. इससे पहले कि पावर सब स्टेशन बिजली वितरण निगम को हस्तांतरित होता और चालू होता, फूड पार्क ही बंद हो गया. पावर सब स्टेशन के ट्रांसफॉर्मर बर्बाद हो रहे हैं. सड़कों पर लगीं स्ट्रीट लाइटें भी बर्बाद हो रही हैं.
सड़कों पर घास व बड़ी-बड़ी झाड़ियां
मेगा फूड पार्क परिसर में 15 फरवरी 2016 को उदघाटन के पूर्व रातों-रात सड़क बनायी गयी थी. अभी सड़क पर घास और बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आयी हैं. जहां-तहां से सड़क टूट रही है.
क्या-क्या है मेगा फूड पार्क में
मेगा फूड पार्क में 21 बड़े खाद्य प्रसंस्करण व 12 छोटे खाद प्रसंस्करण की यूनिट लगाने का प्लॉट तैयार है. एक 10 एमवीए क्षमता के 33/11 केवी का पावर सब स्टेशन भी बना हुआ है. एक पंप हाउस बना हुआ है. वहीं एक प्रशासनिक भवन, गार्ड रूम, वर्कर हॉस्टल, वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, दो फ्रीजर वैन व 10 ट्रक हैं.
उद्योग विभाग ने स्पेशल पर्पस व्हीकल बनवाया था
वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्र की यूपीए सरकार ने रांची में मेगा फूड पार्क की स्वीकृति दी थी. इसके लिए रियाडा ने 56 एकड़ जमीन दी थी. मेगा फूड पार्क के निर्माण के लिए उद्योग विभाग ने स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) बनवा दिया था. एसपीवी का नाम झारखंड मेगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड है. इसके निदेशक नितिन शिनोई थे. कंपनी द्वारा रांची के इलाहाबाद बैंक हरमू ब्रांच से 33.95 करोड़ रुपये का लोन लिया गया.
इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा 43 करोड़ अनुदान स्वरूप दिये गये थे. फरवरी 2009 में तत्कालीन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोधकांत सहाय, बाबा रामदेव और तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने इसका शिलान्यास किया था. धीरे-धीरे काम बढ़ता गया. निर्माण होता रहा. 15 फरवरी 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, साध्वी निरंजन ज्योति और पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने इसका उदघाटन किया था, जबकि वहां कोई यूनिट नहीं लगी थी.
इधर, वर्ष 2017 में झारखंड मेगा फूड पार्क के निदेशक नितिन शिनोई का दुबई में निधन हो गया. इसके बाद ही पूरा प्रबंधन फेल हो गया और इसे आगे चलाने में नियंत्रण नहीं रहा. इधर, बैंक के लोन पर ब्याज बढ़ता रहा. इस पर बैंक का 39 करोड़ 21 लाख 83 हजार 559 रुपये 26 फरवरी 2018 से बकाया हो गया. फिर इलाहालाबद बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत इसे अपने कब्जे में ले लिया. इस दौरान केंद्र सरकार से भी बात की गयी, पर कोई सफलता नहीं मिली. केंद्र सरकार ने मेगा फूड पार्क को ही रद्द कर दिया. 24.9.2019 को इससे संबंधित आदेश केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्रालय ने जारी कर दिया. इसके बाद बैंक द्वारा इसे एनसीएलटी को सौंप दिया गया.
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