रांची : अनुसंधान के लिए लंबित मामलों को लेकर हाइकोर्ट गंभीर, मांगा जवाब

Updated at : 08 Feb 2020 9:30 AM (IST)
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रांची : अनुसंधान के लिए लंबित मामलों को लेकर हाइकोर्ट गंभीर, मांगा जवाब

रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में शुक्रवार को क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका पर सुनवाई हुई. इस दाैरान अदालत ने प्रार्थी के मामले का अनुसंधान 10 साल के बाद भी पूरा नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जतायी. मामले को गंभीरता से लेतेे हुए अदालत ने गृह सचिव से पूछा कि राज्य में […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में शुक्रवार को क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका पर सुनवाई हुई. इस दाैरान अदालत ने प्रार्थी के मामले का अनुसंधान 10 साल के बाद भी पूरा नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जतायी.
मामले को गंभीरता से लेतेे हुए अदालत ने गृह सचिव से पूछा कि राज्य में तीन साल से अधिक समय से कितने मामले अनुसंधान के लिए लंबित हैं. कितने मामलों का अनुसंधान नहीं हो रहा है. संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक से पूरी जानकारी लेकर जिलावार रिपोर्ट दायर की जाये. अदालत ने गृह विभाग के सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए विस्तृत जवाब दायर करने का निर्देश दिया है. शपथ पत्र के माध्यम से जवाब देने को कहा गया.
मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने तीन सप्ताह के बाद की तिथि निर्धारित की. सुनवाई के दाैरान चाईबासा के एसपी, डीएसपी व अनुसंधानकर्ता सशरीर उपस्थित थे. अगली सुनवाई के दाैरान भी उक्त अधिकारियों को सशरीर उपस्थित रहने को कहा गया है.
इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि वर्ष 2009 में चाईबासा पुलिस ने ट्रकों में फर्जी कंपनी का नाम लगाकर आयरन अोर खनिज की ढुलाई मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. ट्रक ड्राइवर से चुटका मिला था. बाद में प्रार्थी के नाम पुलिस ने वारंट निकलवाया, जो बाद में हाइकोर्ट से निरस्त हो गया था. अग्रिम जमानत मिल गयी थी. इसी मामले में अन्य आरोपियों के मामले की पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दायर की थी. निचली अदालत ने ट्रायल पूरी होने के बाद आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन प्रार्थी से संबंधित मामले में अनुसंधान लंबित रहा. वह आज भी लंबित है.
अधिवक्ता श्री सिंह ने कहा कि पुलिस द्वारा उन पर लगाया गया आरोप सही नहीं है. नामजद आरोपी बरी हो चुके हैं, जबकि उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है. उन्होंने मामले को निरस्त करने का आग्रह किया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी दुधानी कोक यूनिट प्रालि के निदेशक शैलेश अग्रवाल ने क्वैशिंग याचिका दायर कर प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की है.
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