रांची : कोल कंपनियों से बकाया 33424 करोड़ रुपये वसूलेगी सरकार
Updated at : 07 Feb 2020 8:57 AM (IST)
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सुनील चौधरी रांची : सुप्रीम कोर्ट के कॉमन कॉज आदेश के तहत कोयला, लोहा और अन्य खनिज पदार्थों से जुड़े 347 खदानों पर 43 हजार करोड़ से अधिक की राशि का पेनाल्टी खान विभाग की ओर से वर्ष 2017 में लगाया गया था. अब तक मात्र 1500 करोड़ रुपये की वसूली ही हो पायी है. […]
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सुनील चौधरी
रांची : सुप्रीम कोर्ट के कॉमन कॉज आदेश के तहत कोयला, लोहा और अन्य खनिज पदार्थों से जुड़े 347 खदानों पर 43 हजार करोड़ से अधिक की राशि का पेनाल्टी खान विभाग की ओर से वर्ष 2017 में लगाया गया था. अब तक मात्र 1500 करोड़ रुपये की वसूली ही हो पायी है. राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार अब इस राशि की वसूली की तैयारी कर रही है. राज्य की नयी सरकार भुगतान पर लगे स्टे को हटाने के लिए याचिका दायर करने की
तैयारी में है. विभागीय सूत्रों ने बताया कि जल्द ही ट्रिब्यूनल व हाइकोर्ट में याचिका दायर की जायेगी. खान विभाग की ओर से इन खदानों पर वर्ष 2001 से लेकर 2017 तक हुई खुदाई के आंकड़ों के आधार पर पेनाल्टी लगायी गयी थी. इसमें सीसीएल, बीसीसीएल, इसीएल के कोयला खदानों से लेकर बॉक्साइट खदान, चाईबासा स्थित लौह अयस्क खदानों व लाइम स्टोन के खदानों पर पेनाल्टी लगायी गयी थी.
कोल कंपनियों पर 33429 करोड़ रुपये बकाया : चाईबासा स्थित लौह अयस्क, मैंगनीज व लाइम स्टोन के खदानों की गणना कर 2706 करोड़ की पेनाल्टी लगायी गयी थी. जिसमें केवल सेल के चार माइंस पर ही लगभग 1406 करोड़ की पेनाल्टी लगायी गयी थी. इसमें सेल द्वारा केवल 200 करोड़ का भुगतान किया गया है.
इसी तरह कोयला कंपनियों पर 33424 करोड़ की पेनाल्टी लगायी गयी थी, जिसका भुगतान नहीं किया गया. मामला कोल ट्रिब्यूनल में चला गया और भुगतान पर स्टे लगा दिया गया. खान विभाग के सूत्रों ने बताया कि नोटिस में उल्लेख था कि 31 दिसंबर 2017 तक भुगतान नहीं करने पर 24 प्रतिशत की दर से ब्याज लगाया जायेगा. दो वर्ष का ब्याज जोड़ देने पर राशि लगभग दोगुनी हो जाती है. हालांकि मामला कोर्ट में है. सरकार ब्याज की राशि पर भी क्लेम करते हुए याचिका दायर करेगी.
क्या है मामला
दो अगस्त 2017 को कॉमन कॉज बनाम भारत सरकार तथा प्रफुल्ल सामांत्रा बनाम भारत के केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक आदेश जारी किया गया था. इसमें पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र (इसी) में स्वीकृत खनिज उत्पादन मात्रा से अधिक उत्पादन के मामले में एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा 21(5) के तहत उल्लंघन की स्थिति में क्षतिपूर्ति राशि वसूलने का निर्देश दिया गया है.
इसी आलोक में खान सचिव द्वारा 23.10.2017 को सभी जिला खनन पदाधिकारियों को पत्र भेज कर वर्ष 2000-01 से 2016-17 के खदानों निकाले गये खनिज की गणना करने और इसी से अधिक होने पर पेनाल्टी लगाते हुए नोटिस भेजने का निर्देश दिया था. इसी आदेश के तहत अलग-अलग जिलों में सभी खदानों के खनिजों की 17 वर्ष की गणना कर पेनाल्टी का नोटिस भेजा गया. कंपनियों को 31.12.2017 तक पेनाल्टी भुगतान करने का निर्देश दिया गया था. ऐसा नहीं करने पर 24 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से कुल राशि पर सूद की वसूली भी करने और विधि सम्मत कार्रवाई की चेतावनी दी गयी थी.
सीसीएल 13, 699 करोड़
बीसीसीएल 17,344 करोड़
इसीएल 1,691 करोड़
सेल (कोयला खदान) 330 करोड़
डीवीसी (कोयला खदान) 360 करोड़
सेल (लौह अयस्क) 1,206 करोड़
सरकार राशि वसूले : सरयू
पूर्व मंत्री सरयू राय ने कहा है कि केंद्र की कोयला-लोहा कंपनियों पर झारखंड का करीब 50 हजार करोड़ रुपये बकाया है. इसका निर्धारण कॉमन कॉज मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हुआ है. नोटिस देने के बाद भी झारखंड का यह बकाया कंपनियां नहीं चुका रही हैं. बीती सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया. हेमंत सरकार को इसकी वसूली करनी चाहिए.
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