रांची : शर्तें पूरी कर काम करना है, तो कल तक बतायें

Updated at : 28 Jan 2020 6:45 AM (IST)
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रांची : शर्तें पूरी कर काम करना है, तो कल तक बतायें

संजय स्वास्थ्य विभाग ने जांच एजेंसी मेडॉल को ई-मेल भेज कर उसका पक्ष मांगा रांची : स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी के निर्देश पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशक वित्त नरसिंह खलखो ने जांच एजेंसी मेडॉल हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड से कहा है कि यदि वह शर्तें पूरी कर आगे काम करना चाहती […]

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संजय
स्वास्थ्य विभाग ने जांच एजेंसी मेडॉल को ई-मेल भेज कर उसका पक्ष मांगा
रांची : स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी के निर्देश पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशक वित्त नरसिंह खलखो ने जांच एजेंसी मेडॉल हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड से कहा है कि यदि वह शर्तें पूरी कर आगे काम करना चाहती है, तो 29 जनवरी तक बतायें.
सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच का काम करने वाली चेन्नई की कंपनी मेडॉल से दो मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए उक्त तिथि तक जवाब देने को कहा गया है. इनमें एमअोयू की शर्त के मुताबिक रियल टाइम मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एमआइएस) यानी डैशबोर्ड तथा वेबसाइट बनाये जाने सहित जांच की वाजिब दर भी शामिल है.
मेडॉल को 18 जनवरी को भेजे गये ई-मेल में निदेशक वित्त ने आश्चर्य जताया है कि वह (मेडॉल) कैसे चार वर्षों बाद भी बगैर उक्त शर्तें पूरी किये काम कर रही है, जबकि ऐसा करना उसका उत्तरदायित्व व जिम्मेवारी दोनों है. दरअसल डैशबोर्ड कंपनी के काम व बिल चेक करने के लिए जरूरी है.
इधर, बगैर इस सिस्टम के मेडॉल को भुगतान होता रहा था. अब करीब 41 करोड़ का बिल रोका गया है. भेजे गये मेल में कहा गया है कि काफी बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज से संबंधित बिल मैनुअली चेक कर पाना मुश्किल है. इससे मरीजों के ब्योरा, उनकी जांच रिपोर्ट तथा इनवॉयस का निरीक्षण नहीं किया जा सकता.
गौरतलब है कि विभिन्न जिलों में ऐसे बिल बोरों में भर कर रखे गये हैं तथा इनकी संख्या में हर रोज इजाफा हो रहा है. कंपनी को स्पष्ट कर दिया गया है कि इन बिलों की न जांच हो सकती है और न ही भुगतान संभव है. वहीं कंपनी की वेबसाइट भी न होने से अाम लोग कंपनी व जांच से संबंधित कोई जानकारी हासिल नहीं कर सकते हैं.
इसलिए 29 जनवरी तक डैशबोर्ड व वेबसाइट तैयार कर सूचित करें. दूसरा मुद्दा जांच दर का है, जो समझौता शर्तों के अनुरूप नहीं है. मेडॉल को याद दिलाया गया है कि उसके लैब में बीपीएल मरीजों की बड़ी संख्या में जांच होती है. यह भी सूचित किया गया है कि भारत सरकार ने मेडॉल की जांच दर पर आपत्ति जतायी है तथा वर्तमान दर पर फंड उपलब्ध कराने से मना कर दिया है.
यही नहीं मेडॉल की तरह ही विभिन्न जिलों में पैथोलॉजी टेस्ट करने वाली एसअारएल कंपनी ने सभी तरह की जांच में 20 फीसदी तक छूट की घोषणा की है. मेडॉल को स्पष्ट कर दिया गया है कि ऐसी परिस्थिति में उसके साथ अागे काम करना कठिन होगा.
12 जिलों में कार्यरत है मेडॉल : चेन्नई की कंपनी मेडॉल को राज्य के 12 जिलों में पैथोलॉजी टेस्ट का काम मिला है. इनमें रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, पू सिंहभूम, प सिंहभूम व सरायकेला जिले शामिल हैं. शेष 12 जिलों में एसआरएल यह काम कर रही है. रांची व जमशेदपुर जैसे बड़े जिले मेडॉल के पास हैं तथा इसका बिल भी एसआरएल से अधिक होता है.
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