बेघर मनोरोगियों के लिए झारखंड में घर की व्यवस्था नहीं, यूं ही सड़कों पर घूमते आ जाते हैं नजर, पढ़ें खास रिपोर्ट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jan 2020 8:14 AM
मनोज सिंह रांची : झारखंड में दो सरकारी मनोचिकित्सा संस्थान हैं. एक केंद्र सरकार का (सीअाइपी) और एक राज्य सरकार का (रिनपास). वहीं, एक निजी आवासीय मनोचिकित्सा संस्थान भी संचालित है. इसके अतिरिक्त कोई भी ऐसा संस्थान नहीं है, जहां बेघर मनोरोगियों को रखा जा सके. ऐसे लोग सड़कों पर घूमते नजर आ जाते हैं. […]
मनोज सिंह
झारखंड के प्रतिनिधि ने कहा है कि झारखंड में ऐसे मरीजों के पुनर्वास के लिए कोई संस्थान नहीं है. यह भी बताया कि कुछ समय के लिए ऐसे मरीजों को रखने का काम कुछ एनजीओ कर रहे हैं, लेकिन इनकी स्थायी व्यवस्था नहीं है. अस्पतालों में भर्ती मरीजों की व्यवस्था भी कुछ दिनों के लिए होती है. ऐसे में वे अस्पताल से निकलकर फिर सड़कों पर आ जाते हैं. समाज की भागीदारी भी बहुत कम है. वे बहुत अधिक पुलिस को खबर कर सकते हैं.
आज भी कम नहीं है मनोरोग को लेकर भ्रांतियां : रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि मनोरोग को लेकर समाज की भ्रांतियां अभी भी कम नहीं wहैं. कई दशक से मेंटल हेल्थ प्रोग्राम चल रहे हैं, लेकिन इसका असर समाज पर बहुत कम हुआ है. पुलिस भी ऐसे मरीजों के साथ कैसे व्यवहार करे, इसकी समझ कम है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










