आज शीतला अष्टमी बसोड़ा पर्व, ठंडा भोजन परंपरा का धार्मिक रहस्य जानें

Updated at : 11 Mar 2026 8:04 AM (IST)
विज्ञापन
Sheetala Ashtami 2026

शीतला अष्टमी पर बासी खाने का महत्व

Sheetala Ashtami 2026: आज शीतला अष्टमी और बसोड़ा पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन माता शीतला को ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा है, जिससे परिवार को रोगों से रक्षा और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

विज्ञापन

Sheetala Ashtami 2026: आज बुधवार, 11 मार्च 2026 को देश के कई हिस्सों में शीतला अष्टमी यानी बसोड़ा पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और यह दिन मां शीतला को समर्पित होता है. मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से चेचक, त्वचा रोग, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा होती है.

इस दिन भक्तजन माता शीतला से पूरे परिवार के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और रोगमुक्त जीवन की कामना करते हैं. कई स्थानों पर इसे बसोड़ा या बसियौड़ा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “बासी भोजन का पर्व”.

शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शीतला को शीतलता और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है. पुराणों में वर्णन मिलता है कि माता अपने भक्तों को रोगों और महामारी से बचाती हैं. पहले के समय में जब चेचक जैसी बीमारियां फैलती थीं, तब लोग मां शीतला की विशेष पूजा करते थे और उनसे रोगों से रक्षा की प्रार्थना करते थे.

इस दिन मंदिरों में माता की पूजा-अर्चना की जाती है, उन्हें ठंडा जल, दही, बासी भोजन और मीठे पकवान का भोग लगाया जाता है. कई जगहों पर महिलाएं व्रत रखकर माता की कथा भी सुनती हैं.

बसोड़ा क्यों कहा जाता है यह पर्व

शीतला अष्टमी को बसोड़ा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता. परंपरा के अनुसार एक दिन पहले यानी सप्तमी को ही भोजन बना लिया जाता है. अगले दिन उसी ठंडे या बासी भोजन को माता शीतला को भोग लगाकर परिवार के लोग ग्रहण करते हैं.

इसमें आमतौर पर पूरी, पुआ, कढ़ी, चावल, मीठे पकवान, दही और गुड़ जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं. यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि माता शीतला को शीतलता प्रिय है और उन्हें ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है.

ठंडा भोजन करने के पीछे धार्मिक रहस्य

शास्त्रों के अनुसार इस दिन आग या गर्म चीजों से दूरी बनाए रखने का विशेष महत्व है. माना जाता है कि माता शीतला का स्वरूप शीतल और शांत है, इसलिए उन्हें ठंडे भोजन का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं.

इसके पीछे एक सामाजिक और वैज्ञानिक कारण भी माना जाता है. प्राचीन समय में गर्मी के मौसम में संक्रमण और बीमारियां ज्यादा फैलती थीं. ऐसे में एक दिन चूल्हा बंद रखने और सादा भोजन करने की परंपरा से लोगों को विश्राम और स्वच्छता का संदेश दिया जाता था.

शीतला अष्टमी पर किन बातों का रखें ध्यान

शीतला अष्टमी के दिन कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाना चाहिए और ताजा भोजन बनाने से बचना चाहिए. पूजा के दौरान साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

मान्यता है कि यदि श्रद्धा और नियमों के साथ मां शीतला की पूजा की जाए, तो वे अपने भक्तों को रोगों से रक्षा, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं. इसलिए यह पर्व केवल आस्था ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और अनुशासन का भी संदेश देता है.

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola