सेवानिवृत्ति के बाद भी एचइसी के कई अधिकारियों के केस का निबटारा नहीं
Updated at : 11 Jan 2020 2:51 AM (IST)
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रांची : एचइसी के दर्जनों अधिकारी किसी न किसी मामले में फंसे हैं, लेकिन उनके केस का निष्पादन सीवीओ कार्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है. इसका असर एचइसी के उत्पादन पर भी पड़ रहा है. वहीं किसी कार्य में फंसने के डर से एचइसी के अधिकारी न तो जिम्मेवारी लेना चाह रहे हैं, न […]
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रांची : एचइसी के दर्जनों अधिकारी किसी न किसी मामले में फंसे हैं, लेकिन उनके केस का निष्पादन सीवीओ कार्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है. इसका असर एचइसी के उत्पादन पर भी पड़ रहा है. वहीं किसी कार्य में फंसने के डर से एचइसी के अधिकारी न तो जिम्मेवारी लेना चाह रहे हैं, न ही किसी तरह की कमेटी में शामिल होना चाहते हैं.
स्थिति यह है कि अधिकारी तो सेवानिवृत्त हो जा रहे हैं, लेकिन उनके केस का निष्पादन नहीं हो रहा है. इससे एक तरफ जहां उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर आंच आ रही है, वहीं दूसरी तरफ सेवानिवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा है. स्थिति यह है कि एचइसी के मुख्य सतर्कता पदाधिकारी द्वारा कई अधिकारियों को सेवानिवृत्त के दिन ही किसी न किसी पुराने मामले में संलिप्तता दिखा कर कार्रवाई का पत्र थमा दिया जाता है.
88 तकनीकी कामगारों का भी मामला लटका : एचइसी के 88 तकनीकी कामगारों को विजिलेंस क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. नियमत: एक वर्ष पूरा होने पर उन्हें एक हजार रुपये हर साल बढ़ोतरी होनी है, लेकिन विजिलेंस कार्यालय में करीब आठ माह से फाइल लंबित है.
एचइसी के दर्जनों अधिकारी किसी न किसी मामले में फंसे हैं
सेवानिवृत्ति के दिन जिन्हें नहीं मिला विजिलेंस क्लीयरेंस
एसी देवघरिया : महाप्रबंधक
जयंत कुमार : महाप्रबंधक
एके दास : महाप्रबंधक
एसएन शर्मा : सीनियर डीजीएम
रवींद्र चौधरी : सीनियर डीजीएम
पीके सिंह : सीनियर डीजीएम
कार्यरत कर्मी, जिन पर सीवीओ कार्यालय में केस लंबित है
आरके श्रीवास्तव : इंचार्ज फाइनेंस
राजेश गांधी : एचएमटीपी फाइनेंस इंचार्ज
साइबल गोस्वामी : सीआइइ इंचार्ज, मुख्यालय
एनके सिंह : डीजीएम
अमित श्रीवास्तव : सीनियर मैनेजर इंचार्ज
क्या है सीवीसी मैनुअल में
सीवीसी मैनुअल -2017 में स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख किया गया है कि कर्मियों व अधिकारियों के रिटायरमेंट के पहले केस का निष्पादन कर देना है, लेकिन एचइसी में सीवीओ कार्यालय द्वारा सीवीसी मैनुअल का पालन नहीं किया जा रहा है. यह स्थिति वर्ष 2017 से शुरू हुई है.
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