बिना पूर्वाग्रह थानों का निरीक्षण करें
Updated at : 10 Jan 2020 9:04 AM (IST)
विज्ञापन

रांची : पुलिस महकमे को निचले स्तर पर दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो गयी है. डीजीपी कमल नयन चौबे के स्तर पर जिलों के एसपी व अन्य अफसरों को दिशा-निर्देश जारी किया गया है. इसमें थाना और अनुमंडल स्तर पर पुलिसिंग की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है. इंस्पेक्टर व उनके […]
विज्ञापन
रांची : पुलिस महकमे को निचले स्तर पर दुरुस्त करने की कवायद शुरू हो गयी है. डीजीपी कमल नयन चौबे के स्तर पर जिलों के एसपी व अन्य अफसरों को दिशा-निर्देश जारी किया गया है. इसमें थाना और अनुमंडल स्तर पर पुलिसिंग की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है.
इंस्पेक्टर व उनके ऊपर के अधिकारी नियमित अंतराल पर थानों का निरीक्षण करेंगे, ताकि थानों की कार्यशैली में गुणात्मक सुधार हो सके. अधिकारी निरीक्षण के दौरान अपनी टिप्पणी भी अंकित करेंगे. इसके अतिरिक्त यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि निरीक्षण का उद्देश्य थाना पर पदस्थापित पुलिसकर्मियों को दंडित करने का नहीं है.
बल्कि उनको दिशा-निर्देश देकर उनकी कार्यशैली में सुधार लाना है. इसलिए यह आवश्यक है कि थानों का निरीक्षण बिना किसी पूर्वाग्रह के अधिकारी करें. डीजीपी ने पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े हर बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किया है. डीजीपी जब जिलों के दौरे पर निकलेंगे तब दिशा-निर्देश के अनुरूप थाना और अनुमंडल स्तर पर कार्य हुआ या नहीं इसकी समीक्षा करेंगे.
डीएसपी की भूमिका महत्वपूर्ण : थाना, इंस्पेक्टर कार्यालय और चौकियों पर प्रभावकारी नियंत्रण के लिए डीएसपी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसके लिए जरूरी है कि डीएसपी खुद के कार्यों के प्रति सजग रहें. अपने कार्यालय के अभिलेखों को अद्यतन रखें. डीएसपी कार्यालय का नियमित निरीक्षण होने से कमियों एवं त्रुटियों को सुधारने में आवश्यक मदद मिलती है. इससे उनकी कार्य क्षमता को बढ़ाया जा सकता है
इनका बनेगा डोजियर : जिन अपराधियों का दोष सिद्ध हुआ है उनका नाम डोजियर में रखना है. खासकर डकैती, लूटपाट, ठगी, नोट व स्टांप की जालसाजी, नशा देकर सामान की चोरी, बच्चा चुराने वाले, अनैतिक काम के लिए बालिका का अपहरण, आदतन जुआरी, नशीले पदार्थ का व्यापार करने वाले, तांबा तार काटने अथवा अवैध हथियार रखने जैसे मामले में.
गुंडों का होगा वर्गीकरण : शराबी, दबाव देकर पैसा एेंठनेवाले, मादक पदार्थों का अवैध कारोबार करनेवाले, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने वाला, कालाबाजारी करने वाला, दंगाई, मुकदमेबाज, तोड़फोड़ करनेवाले, संप्रदायवादी, छात्रों को भड़कानेवाले, स्त्रियों या लड़कियों का व्यापार करनेवाले, जुआरी, मंदिर जानेवाले भक्तों व यात्रियों से पैसा एेंठनेवाले.
किसी विवाहिता की मौत सात वर्ष के अंदर होने पर क्या करना है : किसी विवाहिता की सात वर्ष के अंदर अप्राकृतिक मौत की जांच सही से की गयी है या नहीं. उसके परिवार वालों का बयान लिया गया है या नहीं. सुपरविजन करने वाले अधिकारी विस्तृत जांच कर यह निर्धारित करने का प्रयास करेंगे कि मामला 498ए, 306 व 304बी के तहत सत्य तो नहीं है.
थाना स्तर पर इन बिंदुओं पर रखना है ध्यान
सभी संज्ञेय अपराध को लेकर थानों में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है या नहीं. प्राथमिकी दर्ज करने में थाना के स्तर पर अनावश्यक विलंब तो नहीं की जा रही है. प्राथमिकी के बाद शिकायतकर्ता को एक कॉपी दी जा रही है अथवा नहीं. जो शिकायत थानों में दी गयी है उसके अनुरूप धाराएं लगायी गयी हैं या नहीं.
शिकायत में किसी पर संदेह होने की बात कही जा रही है, तो उनके हुलिया का उल्लेख केस में हो रहा है या नहीं. गंभीर मामलों का अनुसंधान थाना प्रभारी या इंस्पेक्टर के स्तर पर किया जा रहा है या नहीं. एएसआइ स्तर के पदाधिकारी को अनावश्यक रूप से गंभीर मामलों के जांच की जवाबदेही नहीं दी गयी है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




