रांची : फसलों को पाला से बचायेगी लो टनल प्लास्टिक तकनीक

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बिरसा कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने झारखंड में लगातार गिर रहे तापमान से बचने के उपाये बताये लो टनल प्लास्टिक एक छोटा गुफानुमा घर है, जिसमें ग्रीन हाउस का प्रभाव दिखता है रांची : बिरसा कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने झारखंड में लगातार गिर रहे तापमान से फसल व सब्जियों को बचाने के उपाय बताये […]

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बिरसा कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने झारखंड में लगातार गिर रहे तापमान से बचने के उपाये बताये
लो टनल प्लास्टिक एक छोटा गुफानुमा घर है, जिसमें ग्रीन हाउस का प्रभाव दिखता है
रांची : बिरसा कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने झारखंड में लगातार गिर रहे तापमान से फसल व सब्जियों को बचाने के उपाय बताये हैं. कृषि अभियांत्रिकी विभाग के वैज्ञानिक डॉ प्रमोद राय ने कहा कि सफल खेती के लिए खेती, बीज, उर्वरक, कीट व रोग प्रबंधन के अलावा मौसम एवं तापमान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. जाड़े के मौसम में कम तापमान होने और पाला पड़ने पर किसान इस बात को नजरअंदाज करते हैं. विभिन्न फसलों के पौधे के विकास में 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक का तापमान होना जरूरी है.
विवि ने शोध कर लो टनल प्लास्टिक तकनीक विकसित की है. डॉ राय ने बताया कि लो टनल प्लास्टिक एक छोटा गुफानुमा घर होता है, जिसके अंदर ग्रीन हाउस का प्रभाव दिखता है.
इसे विभिन्न आवरणों में 50 माइक्रोन की प्लास्टिक फिल्म व 40 मेस वाली कीड़ा रहित जाली और 35 से 50 प्रतिशत शेड नेट से निर्मित किया जाता है. इसका उपयोग कर रहे चान्हो के किसान नंदू बताते हैं कि एक एकड़ में खेती के लिए पौध नर्सरी तैयार करने में शिमला मिर्च बीज पर करीब 25 हजार, तरबूज बीज पर 15 हजार, प्याज बीज पर 25 हजार तथा टमाटर बीज पर चार हजार रुपये का खर्च आता है.
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