रांची : पांच लाख मां-बच्चे हेल्थ ट्रैकिंग सिस्टम से बाहर

Updated at : 16 Dec 2019 9:28 AM (IST)
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रांची : पांच लाख मां-बच्चे हेल्थ ट्रैकिंग सिस्टम से बाहर

संजय रांची : राज्य भर में गर्भवती व धात्री महिलाएं करीब 7.28 लाख तथा नवजात बच्चे 5.17 लाख हैं. यह अांकड़ा प्रजनन योग्य महिलाओं की कुल आबादी में उनके गर्भवती होने के ट्रेंड (लगभग तीन फीसदी) के आधार पर तय किया जाता है. पर उपरोक्त में से करीब तीन लाख गर्भवती व धात्री महिला तथा […]

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संजय
रांची : राज्य भर में गर्भवती व धात्री महिलाएं करीब 7.28 लाख तथा नवजात बच्चे 5.17 लाख हैं. यह अांकड़ा प्रजनन योग्य महिलाओं की कुल आबादी में उनके गर्भवती होने के ट्रेंड (लगभग तीन फीसदी) के आधार पर तय किया जाता है. पर उपरोक्त में से करीब तीन लाख गर्भवती व धात्री महिला तथा दो लाख बच्चे स्वास्थ्य विभाग की नजर से बाहर हैं. कुल पांच लाख का यह आंकड़ा गर्भवती व धात्री महिलाएं तथा बच्चे के कुल लक्ष्य (12.45 लाख) का करीब 42 फीसदी है. यानी इनके स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर नजर नहीं रखी जा रही है.
गर्भवती व धात्री महिलाओं तथा बच्चों के संपूर्ण टीकाकरण सहित स्वास्थ्य संबंधी अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए एक कार्यक्रम संचालित होता है. इसे मदर-चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (अारसीएच पोर्टल) कहते हैं. इसमें सरकारी अस्पतालों में जन्म लेनेवाले बच्चे तथा उसकी मां सहित गर्भवती महिलाओं के नाम-पते तथा उनके टीकाकरण, उन्हें दिये गये या दिये जा रहे विटामिन के डोज, उनके वजन व लंबाई सहित स्वास्थ्य संबंधी सारी जानकारी हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम के तहत कंप्यूटर में दर्ज होती है. दरअसल यह काम किसी महिला के गर्भवती होते ही शुरू हो जाता है, जो मां बनने के बाद तक जारी रहता है.
अमूमन किसी बच्चे को उसके पांच साल का होने तक ट्रैक पर रखा जाता है. इस तरह राज्य के करीब पांच लाख गर्भवती महिलाएं, मां व बच्चे का सरकार के पास कोई रिकॉर्ड (हेल्थ ट्रैक) नहीं है. यह कार्यक्रम मातृ तथा शिशु व बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए चलाया जाता है. एनएचएम के तहत मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (अारसीएच पोर्टल) की राज्य व केंद्र स्तरीय समीक्षा होती है.
नौ से 58 फीसदी तक सुधार के लिए मिला पुरस्कार : दिसंबर 2018 में कुल 12.45 लाख में से सिर्फ 1.11 लाख का विवरण ही आरसीएच पोर्टल पर उपलब्ध था. यह कुल लक्ष्य 12.45 लाख का सिर्फ नौ फीसदी था.
इधर एनएचएम के एमडी डॉ शैलेश कुमार चौरसिया व आरसीएच पोर्टल प्रभारी सुब्रतो रॉय सहित अन्य संबंधित लोगों के प्रयास से अगस्त से नवंबर 2019 में 58 फीसदी महिलाअों व बच्चों का रिकॉर्ड उपलब्ध हो गया है. इधर पांच दिसंबर को एनएचएम की इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने झारखंड को बेस्ट इंप्रूवमेंट इन आरसीएच पोर्टल के लिए अवार्ड दिया है.
कैसे होती है ट्रैकिंग
राज्य की करीब 41 हजार सहियाओं सहित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र तथा अस्पतालों से मिली सूचना के आधार पर यह ट्रैकिंग की जाती है. कंप्यूटर पर संबंधित डाटा लोड करने की जिम्मेवारी प्रखंड व जिला डाटा मैनेजर की होती है. यानी लापरवाही भी इसी स्तर से है. डेढ़ वर्ष पहले भी वेतन रोकने की चेतावनी के बाद आरसीएच पोर्टल के आंकड़े सुधरे थे, जो फिर से कम हो गये.
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