रांची :युवाओं को शराब से दूर रखने के लिए क्या कर रही सरकार
Updated at : 09 Nov 2019 3:07 AM (IST)
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य में शराबबंदी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस हरीश चंद्र मिश्र और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. इसमें शराब के दुष्परिणाम को रोकने के लिए राज्य सरकार को विभिन्न विभागों से चर्चा कर सुझाव देने को […]
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य में शराबबंदी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस हरीश चंद्र मिश्र और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.
इसमें शराब के दुष्परिणाम को रोकने के लिए राज्य सरकार को विभिन्न विभागों से चर्चा कर सुझाव देने को कहा गया. खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब के नशे से दूर रखने की आपके पास क्या योजनाएं हैं.
खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि शराब के सेवन से युवाअों में नशे की लत लग रही है. इसका असर परिवार और समाज पर पड़ रहा है. युवाओं को नशे से दूर रखने का कोई मैकेनिज्म नहीं है. 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब नहीं बेचना, लिखा होना काफी नहीं है.
शराब के नशे से युवाअों को कैसे बचाया जाये, इस पर विचार करने की जरूरत है. हाइकोर्ट ने पूछा है कि नशा करने से रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है या उठायेगी? उसे कैसे रोका जायेगा? उस पर सरकार अपना विस्तृत सुझाव अगली सुनवाई के पूर्व प्रस्तुत करें. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 22 नवंबर की तिथि निर्धारित की.
सरकार की शराब पॉलिसी गलतइससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्र ने खंडपीठ को बताया कि शराब का सेवन करना हानिकारक है. युवा देश की ताकत हैं. उन्हें शराब के नशे से दूर रखने की जरूरत है. इसके बावजूद युवा शराब के नशे के आदी बन रहे हैं. युवाअों को पथ भ्रष्ट होने से रोकने के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है. सरकार की गलत शराब पॉलिसी की वजह से युवाअों में नशे की लत लग रही है. शराब विक्रेता अपने फायदे के लिए स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी शराब बेचते हैं. यह किसी से छुपा नहीं है.
19 वर्षों में नहीं हुआ कोई सर्वे
अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्र ने कहा कि झारखंड गठन के 19 साल में राज्य सरकार ने शराब के सेवन से हो रहे दुष्परिणाम को लेकर एक बार भी सामाजिक सर्वे नहीं कराया है. स्कूल जानेवाले छात्रों को भी शराब की लत लग गयी है.
छात्र नशे के कारण आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं. शाम में युवा वर्ग दोपहिया वाहनों या कार या होटलों में बैठ कर शराब पीते नजर आते हैं. मालूम हो कि प्रार्थी शिवकांत पांडेय ने जनहित याचिका दायर कर राज्य में शराबबंदी की मांग की है.
चुनाव के दौरान इको फ्रेंडली प्रचार सामग्री का हो उपयोग
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को चुनाव के दाैरान इको फ्रेंडली प्रचार सामग्री का उपयोग करने काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस हरीशचंद्र मिश्र व जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए माैखिक रूप से कहा कि चुनाव के दाैरान इको फ्रेंडली प्रचार सामग्री का उपयोग करना चाहिए. इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा.
खंडपीठ ने कहा कि रसायन के मिश्रित रंगों से बने हुए फ्लैक्स, झंडा सहित अन्य प्रचार सामग्री का उपयोग नहीं करना श्रेयस्कर रहेगा. खंडपीठ ने भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के आलोक में उठाये गये कदमों की जानकारी देने को कहा. राज्य सरकार को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दायर करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 22 नवंबर की तिथि निर्धारित की.
नहीं हो रहा निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का पालन : इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रचार को लेकर गाइडलाइन जारी किया गया है, लेकिन राज्य सरकार उसका पालन नहीं करा रही है. झारखंड में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गयी है.
ऐसी स्थिति में सभी राजनीतिक दल प्रचार के दौरान वैसी चुनाव सामग्री का उपयोग करें, जो इको फ्रेंडली हो. सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी प्रचार सामग्रियों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. झंडा, फ्लैक्स, हैंड बिल आदि सामग्री शीघ्र नष्ट होनेवाली होनी चाहिए.
प्रार्थी ने सरकार को आदेश देने का आग्रह किया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी गुलाब चंद्र प्रजापति ने जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने केरल हाइकोर्ट के आदेश व भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के आलोक में इको फ्रेंडली चुनाव सामग्री का उपयोग करने की मांग की है.
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