झारखंड में चुनाव की तारीखों का ऐलान, अब जानिए कौन कितनी सीटों पर लड़ सकता है चुनाव

Updated at : 01 Nov 2019 6:10 PM (IST)
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झारखंड में चुनाव की तारीखों का ऐलान, अब जानिए कौन कितनी सीटों पर लड़ सकता है चुनाव

रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का ऐलान हो गया. पांच चरण में होने वाले मतदान में पहले चरण का मतदान 30 नवंबर को होना है. दूसरा चरण – 7 दिसंबर को, तीसरा चरण – 12 दिसंबर को, चौथा चरण – 16 दिसंबर और पांचवा चरण -20 दिसंबर को . 23 दिसंबर को […]

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रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का ऐलान हो गया. पांच चरण में होने वाले मतदान में पहले चरण का मतदान 30 नवंबर को होना है. दूसरा चरण – 7 दिसंबर को, तीसरा चरण – 12 दिसंबर को, चौथा चरण – 16 दिसंबर और पांचवा चरण -20 दिसंबर को . 23 दिसंबर को मतगणना की तारीख है.

राजनीतिक पार्टियां पहले से चुनावी मोड में है. तारीखों के ऐलान के साथ ही समझते हैं क्या है राजनीतिक पार्टियों की स्थिति, सीट बंटवारे का क्या है गणित और कौन – कौन लड़ सकते हैं दो सीटों पर चुनाव. पढ़ें प्रभात खबर के ब्यूरो प्रमुख आनंद मोहन से पंकज कुमार पाठक की बातचीत.
चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया, राजनीतिक पार्टियों की तैयारी कैसी है ?
राजनीतिक पार्टियां पहले से चुनावी मोड में हैं. भाजपा पहले से चुनावी रैलियां कर रही थी मुख्यमंत्री रघुवर दास आशीर्वाद यात्रा पर थे. जेएमएम सुप्रीमो बाबुलाल मरांडी ने प्रभात तारा मैदान में चुनावी रैली की थी. कांग्रेस जनआक्रोश रैली कर रही थी. जेएमएम बदलाव रैली तो राजनीतिक पार्टियां पहले से चुनावी मोड में हैं. ग्राउंड पर सभी एक्टिव थे सबको चुनाव की तारीखों का ऐलान था
सीट के बंटवारे को लेकर तकरार है, कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा ?
यह दो ध्रुवों की लड़ाई है एनडीए और यूपीए की हालांकि बाबूलाल की जेवीएम अलग राह पकड़ सकती है. यह पहली बार नहीं है हर बार 2014 में सीट के बंटवारे को लेकर चर्चा थी. हटिया सीट आजसू को छोड़ना पड़ा था जिसके बाद नवीन जयसवाल जेवीएम चले गये थे. लगभग एक दर्जन से ज्यादा सीटों है जिस पर दोनों दलों का पेंच फंस रहा है. आजसू और भाजपा के बीच चार ऐसी सीटें है जिस पर पेंच फंस रहा है. एक अमर बाउरी जहां से चुनाव जीतकर आये चंदनक्यारी भी फंसा है. इन सीटों को लेकर बातचीत हो रही है.
आजसू और भाजपा के बीच समझौता होता दिख रहा है. बाबूलाल मरांडी के अलग होने के कारण है कि सीट के बंटवारे को लेकर समझैता नहीं हुआ. उन्हें 12 से 13 सीट यूपीए गठबंधन में मिल रहा था. इनमें ज्यादातर ऐसी सीटें थी जिसमें बाबूलाल कुछ खास नहीं कर सकते थे. उन्हें संथाल परगना से बाहर रखा गया था. उन्हें हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ना पड़ता.
क्या हो सकता है समझौता ?
कांग्रेस 25 से 28 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जेएमएम के पास 43 के आसपास सीटें होंगी. पांच राजद को देना चाहते हैं. मणिका सीट पर राजद चाहती है और साथ ही 14 सीटों की सूची उन्होंने दी है. वामदलों के लिए 4 सीटें छोड़ने की योजना है.
एक कोण जदयू का भी है. यह पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में नहीं है लेकिन कुल मिलाकर जो लड़ाई है वह यूपीए और एनडीए के बीच ही है.
क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास, सुदेश महतो, बाबूलाल मरांडी दो सीटों पर चुनाव लड़ेंगे ?
सुदेश महतो सिल्ली और डूमरी से चुनाव लड़ सकते हैं. सुदेश सिल्ली से हार गये नेताओं को अपनी सीट बचाने के लिए दो सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है.बाबूलाल मरांडी राजधनवार से चुनाव लड़ेंगे. रघुवर दास को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन लगता नहीं है वह दो सीटों पर लड़ेंगे
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