'सच्चे हिंदू’ गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने लखनऊ आए: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद. फोटो- एक्स.
Swami Avimukteshwarananda: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपने ‘गो प्रतिष्ठा-धर्मयुद्ध शंखनाद’ कार्यक्रम को आयोजित करने की इजाजत प्रशासन ने दे दी है. यह कार्यक्रम आज बुधवार से लखनऊ में शुरू होगा.
Swami Avimukteshwarananda: गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार को लखनऊ पहुंचे. उन्होंने लोगों से बुधवार को आयोजित होने वाले ‘गो प्रतिष्ठा-धर्मयुद्ध शंखनाद’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की. यह कार्यक्रम 11 मार्च को कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित किया जाएगा. जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को 26 शर्तों के साथ अनुमति दी है.
अभियान का उद्देश्य: गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके अभियान का मुख्य उद्देश्य गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाना और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराना है. उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘जो भी सच्चे हिंदू हैं, वे कल के कार्यक्रम में जरूर आएं. यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक देश में गाय की हत्या पूरी तरह बंद नहीं हो जाती.’ उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल होने तक यह आंदोलन चलता रहेगा. स्वामी ने कहा, ‘हमें तब तक आगे बढ़ते रहना होगा, जब तक हम यह न कह सकें कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहां गोहत्या नहीं होती.’
प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ दी अनुमति
आयोजकों के अनुसार जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए 26 शर्तों के साथ अनुमति दी है. इनमें किसी भी धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने पर रोक शामिल है. इसके अलावा राजनीतिक या धार्मिक व्यक्तियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी, विवादित नारेबाजी और घातक वस्तुओं के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. प्रशासन ने यह भी कहा है कि नाबालिगों से विवादित नारे नहीं लगवाए जाएंगे, कार्यक्रम स्थल पर वाहनों का प्रवेश सीमित रहेगा और यातायात व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
सुरक्षा और खर्च की जिम्मेदारी आयोजकों पर
आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पारंपरिक झंडों के अलावा कोई प्रतिबंधित सामग्री कार्यक्रम स्थल पर न लाई जाए. इसके साथ ही निजी सुरक्षा व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा और यातायात मानकों का पालन, ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण संबंधी नियमों का अनुपालन भी अनिवार्य किया गया है. कार्यक्रम के दौरान पुलिस तैनाती और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च भी आयोजकों को ही वहन करना होगा.
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‘जजिया’ जैसी स्थिति का लगाया आरोप
प्रशासन की शर्तों और खर्च को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि यह स्थिति मुगलकाल में ‘जजिया’ कर देने जैसी प्रतीत होती है. उनका आरोप है कि जिस तरह उस दौर में लोग अपने धर्म का पालन करने के लिए जजिया कर देते थे, उसी तरह अब धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी खर्च उठाना पड़ रहा है.
वाराणसी से शुरू की थी यात्रा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 5 मार्च को संकट मोचन मंदिर में पूजा करने के बाद गोरक्षा के समर्थन में अपनी यात्रा शुरू की थी. यह यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर से होते हुए मंगलवार को लखनऊ पहुंची.
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किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा अभियान
इस बीच स्वामी ने सोमवार को हरदोई में कहा था कि उनका अभियान किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी मेरी दुश्मन नहीं है, लेकिन दूसरी पार्टियां भी मेरी दोस्त नहीं हैं. जो भी गौमाता की रक्षा और उसे राष्ट्रमाता घोषित करने की बात करेगा, उसे मेरा समर्थन मिलेगा.’ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लोगों से आगामी चुनावों में गौ रक्षा को एक प्रमुख मुद्दा बनाने की भी अपील की.
भाषा के इनपुट के साथ.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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