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वायु प्रदूषण से झारखंड में घटी उम्र, औसतन साढ़े चार साल जीवन काल हुआ कम, समझें छठ का मर्म तभी बचेंगे हम

Updated at : 01 Nov 2019 7:33 AM (IST)
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वायु प्रदूषण से झारखंड में घटी उम्र, औसतन साढ़े चार साल जीवन काल हुआ कम, समझें छठ का मर्म तभी बचेंगे हम

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की रिपोर्ट रांची : देश के मेट्रो शहरों सहित उत्तरी भारत के विभिन्न राज्यों की तरह झारखंड की हवा भी प्रदूषित हो रही है. इस हद तक कि इसका प्रभाव लोगों की जीवन प्रत्याशा (जीवन जीने की उम्र) पर भी पड़ रहा है. शिकागो यूनिवर्सिटी, अमेरिका में किये गये शोध पर […]

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एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की रिपोर्ट
रांची : देश के मेट्रो शहरों सहित उत्तरी भारत के विभिन्न राज्यों की तरह झारखंड की हवा भी प्रदूषित हो रही है. इस हद तक कि इसका प्रभाव लोगों की जीवन प्रत्याशा (जीवन जीने की उम्र) पर भी पड़ रहा है.
शिकागो यूनिवर्सिटी, अमेरिका में किये गये शोध पर आधारित एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार रांची, गोड्डा और कोडरमा के लोग अपने औसत जीवन से लगभग पांच वर्ष अधिक जीवन और जी सकते थे, अगर वायु की गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होती.
इस भयावह स्थिति से हम छठ जैसे पर्व के मर्म को समझ कर ही बच सकते हैं. छठ हमें शुद्धता और सात्विकता का संदेश देता है. छठ पर्व सफाई व स्वच्छता का संदेश देता है. इस पर्व का मर्म भी मन व धरती को पावन व स्वच्छ करने वाला है तथा जल व वायु प्रदूषण घटाने वाला भी.
साल भर उपेक्षित पड़े रहनेवाले तालाबों और नदियों के घाटों को हम साफ-सुथरा करते हैं. कृत्रिम दुनिया से निकल प्रकृति से जुड़ते हैं. प्रकृति प्रदत्त फलों-सब्जियों से भगवान सूर्य की उपासना कर उसका सेवन करते हैं, पर सिर्फ दो-तीन दिन के लिए ही ऐसा करने के बजाय हम अपनी जीवन पद्धति में इन आदतों को शामिल कर लें, तभी प्रदूषण की भयावहता से हम बच पायेंगे.
जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार रांची झारखंड राज्य में प्रदूषित जिलों की सूची में शीर्ष पर नहीं है, पर झारखंड के अन्य जिले और शहर के लोगों का जीवनकाल घट रहा है और वे बीमार जीवन जी रहे हैं. उदाहरण के लिए गोड्डा के लोगों का जीवनकाल पांच साल तक घट गया है. कोडरमा, साहेबगंज, बोकारो, पलामू और धनबाद भी इस सूची में पीछे नहीं हैं, जहां के लोगों का जीवन काल क्रमशः 4.9 वर्ष, 4.8 वर्ष, 4.8 वर्ष, 4.7 वर्ष, और 4.7 वर्ष तक घट गया है. यहां यह उल्लेखनीय है कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम-2.5) 10 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक कम करके लोगों का इतना जीवन काल बढ़ाया जा सकता है. यानी सांस लेने के लिए सुरक्षित हवा से ही हमारी जीवन प्रत्याशा बढ़ सकती है.
बड़ी चुनौती बनता जा रहा है वायु प्रदूषण
दरअसल वायु प्रदूषण पूरे भारत, खास कर उत्तरी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है. भारत की आबादी का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा (48 करोड़) उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में रहता है. जहां बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं.
एक्यूएलआइ के अनुसार भारत के उत्तरी क्षेत्र यानी गंगा के मैदानी इलाके में रह रहे लोगों का जीवन काल करीब सात वर्ष कम होने की आशंका है, क्योंकि इन इलाकों के वायुमंडल में प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों और धूलकणों से होने वाला वायु प्रदूषण यानी पार्टिकुलेट पॉल्यूशन का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय दिशा निर्देशों को हासिल करने में विफल रहा है. पार्टिकुलेट मैटर से संबंधित आंकड़े बताते हैं कि मानव गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है. शोध अध्ययनों के अनुसार इसका कारण वर्ष 1998 से 2016 तक में गंगा के मैदानी इलाके में वायु प्रदूषण 72 फीसदी तक बढ़ जाना है.
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में हुई है. इस कार्यक्रम का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर पार्टीकुलेट पॉल्युशन को 20 से 30 फीसदी तक कम करना है. अगर कार्यक्रम अपना लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा और प्रदूषण स्तर में कमी हुई, तो एक औसत भारतीय की उम्र 1.3 फीसदी तक बढ़ जायेगी. इस तरह गंगा के मैदानी इलाके में रहने वालों लोगों का जीवन काल दो वर्ष तक बढ़ जायेगा.
राज्य में वायु प्रदूषण गंभीर
शिकागो विवि, अमेरिका की शोध संस्था एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एपिक) द्वारा तैयार मॉड्यूल वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण झारखंड के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) औसतन 4.4 वर्ष कम हो रही है.
उम्र बढ़ सकती है, यदि यहां के वायुमंडल में प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों एवं धूलकणों की सघनता 10 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक हो. एक्यूएलआइ के अनुसार रांची के लोग 4.1 वर्ष ज्यादा जी सकते थे, अगर डब्ल्यूएचअो के दिशा निर्देशों को हासिल कर लिया जाता.
झारखंड : औसतन साढ़े चार साल कम हो गया लोगों का जीवन काल
जिला डब्ल्यूएचओ जीवनकाल का नुकसान
का मानक
गोड्डा 10 5.03 2.17
कोडरमा 10 4.94 2.42
साहिबगंज 10 4.86 2.19
बोकारो 10 4.84 2.46
पलामू 10 4.78 2.08
धनबाद 10 4.71 2.21
चतरा 10 4.66 2.01
गिरिडीह 10 4.65 2.23
देवघर 10 4.62 1.87
रामगढ़ 10 4.54 2.28
जामताड़ा 10 4.52 1.87
हजारीबाग 10 4.52 2.13
सरायकेला 10 4.48 2.09
दुमका 10 4.46 1.81
गढ़वा 10 4.41 1.75
पाकुड़ 10 4.41 2.03
पू.सिंहभूम 10 4.25 1.95
रांची 10 4.13 2.00
खूंटी 10 3.95 1.78
लातेहार 10 3.88 1.65
प.सिंहभूम 10 3.75 1.71
लोहरदगा 10 3.58 1.61
सिमडेगा 10 3.45 1.58
गुमला 10 3.40 1.50
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